तिहाड़ में कैदियों के मोबाइल अब नहीं रहेंगे किसी काम के, …!

तिहाड़ में कैदियों के मोबाइल अब नहीं रहेंगे किसी काम के, जेल से नहीं चला सकेंगे गिरोह, ‘धंधा’ होगा बंद

तिहाड़ जेल से गैंगस्टरों का अब गैंग चलाना पुराने दिन की बात होने वाली है। जेल प्रशासन ने कैदियों के मोबाइल को डब्बा बनाने के लिए 15 जैमर लगाने का काम शुरू कर दिया है। गैंगस्टर जेल में चोरी छिपे मोबाइल का इस्तेमाल कर बाहर मौजूद अपने गैंग के सदस्यों से बातचीत कर संगीन वारदातों को अंजाम देते थे। यहां तक कि जेल से ही वह कारोबारियों को फोन के जरिए धमकी देकर उनसे उगाही भी करते थे। जेल में ही रहकर दूसरे गैंगस्टर की हत्या की साजिश रचते थे।

अमर उजाला ने हाल ही में कैदियों के जेल में रहते फोन पर लगातार बात करने का खुलासा किया था। उसके बाद हरकत में आए जेल प्रशासन ने 15 जैमर लगाने का फैसला किया है। कैदियों के फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन ने तीन जैमर लगाया हुआ था। दो जैमर तिहाड़ जेल में जबकि एक मंडोली जेल में लगा हुआ है। बावजूद कैदी लगातार फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। इस साल प्रशासन जेल से करीब 700 से अधिक फोन बरामद कर चुका है।

कैदी जेल में कैसे फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसको लेकर जेल प्रशासन ने जांच शुरू की।  जांच में यह बात सामने आई कि जैमर लगे होने के बावजूद कुछ ऐसे ब्लैक स्पॉट मौजूद थे, जिसका फायदा उठाकर कैदी जैमर को मात देने में कामयाब हो रहे थे। जेल अधिकारियों ने बताया कि जांच करने पर 40 ऐसे ब्लैक स्पॉट मिले, जहां जैमर काम नहीं कर रहा था और कैदी चोरी छिपे वहां से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे 40 ब्लैक स्पाॅट को चिन्हित करते हुए जेल प्रशासन ने यहां जैमर लगाने का फैसला किया है। जेल प्रशासन ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से 15 जैमर खरीदे हैं।

फोन या इलेिक्ट्रक डिवाइस का पता लगाने में मदद करेगा नॉन लीनियर जंक्शन डिटेक्टर
जेल अधिकारी ने बताया कि 10 नॉन लीनियर जंक्शन डिटेक्टर खरीद रहे हैं, जो आमतौर पर जेल की दीवारों या फर्श के अंदर छिपे किसी भी फोन या इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस का पता लगाने में मदद करेंगे। जेल अधिकारियों ने बताया कि ब्लैक स्पाॅट पर जैमर लगाने के लिए तकनीकी एजेंसियाें से संपर्क किया गया। कई एजेंसियों ने इसमें रुचि दिखाई और जैमर लगाने के लिए राजी हो गए।

जैमर के काम नहीं करने पर कंपनी पर होगा आर्थिक जुर्माना
सूत्रों का कहना है कि जिस कंपनी को जैमर लगाने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें साफतौर पर कह दिया गया है कि जैमर लगाने के बाद जेल में कोई भी नेटवर्क काम नहीं करना चाहिए। जैमर लगने के बाद भी अगर किसी भी दूरसंचार कंपनी का नेटवर्क पहुंचता है तो उन्हें आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ अन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। इसमें भविष्य में किसी भी निविदा में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान भी शामिल होंगे।

कैसे काम कर रहे थे कैदियों के फोन
शुरुआती जांच में पता चला कि अभी जेलों में लगे जैमर कम क्षमता वाले हैं। इनकी रेंज एक सेल से लेकर एक वार्ड तक की होती है। तिहाड़ में दो और मंडोली में एक जैमर लगा हुआ है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि तिहाड़, रोहिणी व मंडोली जेल परिसरों की बाहरी दीवारों से 20 मीटर से कम दूरी पर आवासीय काॅलोनियां हैं। इन काॅलोनियों में कई जगह जेल की दीवार के 50 मीटर के दायरे में भी मोबाइल टावर लगे हुए हैं। यहां से सिग्नल जेल परिसर में आसानी से पहुंच जाते हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि जेल प्रशासन जेल में ज्यादा क्षमता वाले जैमर इस्तेमाल करेगा तो इसका असर जेल के आसपास के काॅलोनियों पर होगा और उन्हें मोबाइल नेटवर्क में दिक्कत होगी।

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तिहाड़ से गैंग चलाना अब पुराने दिन की बात
15 जैमर कैदियों के मोबाइल को करेंगे जाम, जेल प्रशासन ने जैमर लगाने का काम शुरू किया

40 ब्लैक स्पॉट का जांच में पता चला, जैमर लगे होने के बावजूद कैदी मोबाइल का कर रहे थे इस्तेमाल

अमर उजाला ने जेल में कैदियों के फोन इस्तेमाल करने का किया था खुलासा

नई दिल्ली। तिहाड़ जेल से गैंगस्टरों का अब गैंग चलाना पुराने दिन की बात होने वाली है। जेल प्रशासन ने कैदियों के मोबाइल को डब्बा बनाने के लिए 15 जैमर लगाने का काम शुरू कर दिया है। गैंगस्टर जेल में चोरी छिपे मोबाइल का इस्तेमाल कर बाहर मौजूद अपने गैंग के सदस्यों से बातचीत कर संगीन वारदातों को अंजाम देते थे। यहां तक कि जेल से ही वह कारोबारियों को फोन के जरिए धमकी देकर उनसे उगाही भी करते थे। जेल में ही रहकर दूसरे गैंगस्टर की हत्या की साजिश रचते थे। अमर उजाला ने हाल ही में कैदियों के जेल में रहते फोन पर लगातार बात करने का खुलासा किया था। उसके बाद हरकत में आए जेल प्रशासन ने 15 जैमर लगाने का फैसला किया है।

कैदियों के फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन ने तीन जैमर लगाया हुआ था। दो जैमर तिहाड़ जेल में जबकि एक मंडोली जेल में लगा हुआ है। बावजूद कैदी लगातार फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। इस साल प्रशासन जेल से करीब 700 से अधिक फोन बरामद कर चुका है। कैदी जेल में कैसे फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसको लेकर जेल प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में यह बात सामने आई कि जैमर लगे होने के बावजूद कुछ ऐसे ब्लैक स्पॉट मौजूद थे, जिसका फायदा उठाकर कैदी जैमर को मात देने में कामयाब हो रहे थे।

जेल अधिकारियों ने बताया कि जांच करने पर 40 ऐसे ब्लैक स्पॉट मिले, जहां जैमर काम नहीं कर रहा था और कैदी चोरी छिपे वहां से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे 40 ब्लैक स्पाॅट को चिन्हित करते हुए जेल प्रशासन ने यहां जैमर लगाने का फैसला किया है। जेल प्रशासन ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से 15 जैमर खरीदे हैं। जेल अधिकारी ने बताया कि 10 नॉन लीनियर जंक्शन डिटेक्टर खरीद रहे हैं, जो आमतौर पर जेल की दीवारों या फर्श के अंदर छिपे किसी भी फोन या इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस का पता लगाने में मदद करेंगे। जेल अधिकारियों ने बताया कि ब्लैक स्पाॅट पर जैमर लगाने के लिए तकनीकी एजेंसियाें से संपर्क किया गया। कई एजेंसियों ने इसमें रुचि दिखाई और जैमर लगाने के लिए राजी हो गए।

जैमर के काम नहीं करने पर कंपनी पर होगा आर्थिक जुर्माना

जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जिस कंपनी को जैमर लगाने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें साफतौर पर कह दिया गया है कि जैमर लगाने के बाद जेल में कोई भी नेटवर्क काम नहीं करना चाहिए। जैमर लगने के बाद भी अगर किसी भी दूरसंचार कंपनी का नेटवर्क पहुंचता है तो उन्हें आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ अन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। इसमें भविष्य में किसी भी निविदा में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान भी शामिल होंगे।

कैसे काम कर रहे थे कैदियों के फोन
शुरुआती जांच में पता चला कि अभी जेलों में लगे जैमर कम क्षमता वाले हैं। इनकी रेंज एक सेल से लेकर एक वार्ड तक की होती है। तिहाड़ में दो और मंडोली में एक जैमर लगा हुआ है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि तिहाड़, रोहिणी व मंडोली जेल परिसरों की बाहरी दीवारों से 20 मीटर से कम दूरी पर आवासीय काॅलोनियां हैं। इन काॅलोनियों में कई जगह जेल की दीवार के 50 मीटर के दायरे में भी मोबाइल टावर लगे हुए हैं। यहां से सिग्नल जेल परिसर में आसानी से पहुंच जाते हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि जेल प्रशासन जेल में ज्यादा क्षमता वाले जैमर इस्तेमाल करेगा तो इसका असर जेल के आसपास के काॅलोनियों पर होगा और उन्हें मोबाइल नेटवर्क में दिक्कत होगी।

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