ग्वालियर : एनजीटी का फरमान-दो माह में पूरा करें गैप एनालिसिस !
एनजीटी का फरमान-दो माह में पूरा करें गैप एनालिसिस:अस्पतालों में पलंग की संख्या व बायोमेडिकल वेस्ट का अध्ययन करेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
23 अगस्त 2022 को भी दिया था एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने आदेश
बायोमेडिकल वेस्ट के शत प्रतिशत निस्तारण को ध्यान में रखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बेंच ने एक बार फिर गैप एनालिसिस की प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया है। 23 अगस्त 2022 को बेंच ने एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए एनालिसिस करने का आदेश दिया था। लगभग एक साल बीतने के बाद भी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कार्रवाई पूरी नहीं की गई, तो पुन: बेंच का दरवाजा खटखटाया गया।
अब बेंच ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो माह के भीतर गैप एनालिसिस पूरा करने और उस रिपोर्ट के आधार पर स्टेट इंवायरमेंट प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (एसईआईएए) को एक माह के भीतर विधि अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
यहां बता दें कि धर्मेंद्र गायकवाड़ ने आवेदन देते हुए आरोप लगाया कि ग्वालियर सहित अन्य जिलों में बायोमेडिकल वेस्ट का निष्पादन उचित तरीके से नहीं किया जा रहा।
ऐसे समझें क्या है गैप एनालिसिस; दो बिंदुओं पर अध्ययन
प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था जैसे अस्पताल, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, लैबोरेटरी, ब्लड बैंक इत्यादि से बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है। वेस्ट में सिरिंज, नीडल से लेकर मानव अंग सहित कई ऐसी चीजें रहती हैं, जो उचित तरीके से निष्पादित (डिस्पोज) नहीं की जाएं, तो संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
इसी के चलते बायोमेडिकल वेस्ट को इंसीनरेटर के माध्यम से ही निष्पादित किया जाता है। गैप एनालिसिस में दो बिंदुओं पर अध्ययन किया जा रहा है। पहला, मप्र में कुल कितने पलंग हैं और उनसे सालभर में औसतन कितना बायोमेडिकल वेस्ट निकला। दूसरा , कितना बायोमेडिकल वेस्ट इंसीनरेटर के माध्यम से निष्पादित किया गया। यदि दोनों आंकड़ों में ज्यादा अंतर मिला तो फिर ये सवाल खड़ा होगा कि आखिर वेस्ट का विधि अनुसार निष्पादन क्यों नहीं हो पा रहा है?