विदेशी हमारी संस्कृति से फायदा ले रहे हैं और हम?

विदेशी हमारी संस्कृति से फायदा ले रहे हैं और हम?

ये एक सामान्य दक्षिण भारतीय फॉर्मूला है, जिसके साथ मैं बचपन से कॉलेज तक बड़ा हुआ, फिर कामकाजी दिनों से शादी तक देखा। पहले मेरी नानी, फिर मां रात में बचे चावल में पानी डालकर रख देतीं और उसे फ्रिज में नहीं रखतीं।

अगले दिन वे तिल के तेल (दिल के लिए अच्छा, शरीर ठंडा रखता है) में थोड़ी मिर्ची (स्वाद हेतु), अदरक (पेट की समस्याओं में सुधार) कड़ी पत्ता (सप्लीमेंट्स से भरपूर) डालकर तड़का लगातीं और बाद में दही (आंतों के लिए लाभदायक बैक्टीरिया) मिलाकर पानी में भिगोकर रखे फर्मेंट चावल (इससे ऊर्जा मिलती है) मिलातीं। ये तृप्ति देने वाला, संपूर्ण सेहत के लिए उपयोगी नाश्ता है।

जब नानी कहतीं कि ये फॉर्मूला शरीर ठंडा रखने के साथ पूरा दिन तरोताजा भी रखता है, तो मुझे कभी यकीन नहीं हुआ। मुझे लगता कि वो शायद ताजा नाश्ता नहीं दे पाने के असामर्थ्य (पढ़ें गरीबी) को ढंकने की कोशिश कर रही हैं।

कुछ समय पहले तक मुझे जरा भी एहसास नहीं था कि अमेरिकी हमारी नानी-मां का नाश्ता 9 डॉलर प्रति लीटर में बेच रहे हैं, वहीं अमेरिकन न्यूट्रिशन एसोसिएशन (एएनए) ने भी इसके कई फायदे बताए हैं, बशर्ते इसे नियमित खाएं।

ताज्जुब नहीं कि ये पयडू (तमिल में) बंगाल में पंता भात, असम में पोइता भात, बिहार में गील पोइता और ओडिशा में पखाल नाम से जाना जाता है! इन सभी राज्यों में समानता ये है कि चावल यहां का मुख्य भोजन है।

इसलिए हर कोई जानता था कि ये शरीर के लिए प्रचुर मात्रा में लाभकारी बैक्टीरिया पैदा करता है और इसलिए उन्होंने इसे अगले दिन के नाश्ते के लिए रिसाइकल किया। ठीक इसी तरह कोरिया का ‘किमचि’, जर्मनी में ‘साउरक्राउट’, यहूदी में ‘कोशर डिल पिकल्स’ और दक्षिण पश्चिम चीनी परंपरा में ‘पाओ चाइ’ भी इसी श्रेणी के फूड हैं।

इन संस्कृतियों में गहराई से उतरते हुए, विशेष रूप से भारत के विभिन्न राज्यों में लोगों के चावल खाने की आदतें देखते हुए एएनए ने इस पर गहराई से शोध किया, वैज्ञानिक टूल इस्तेमाल किए और इस फर्मेंटेड चावल के कई फायदे बताए हैं, इनमें शामिल हैं।

1. यह शरीर को हल्का-ऊर्जावान रखता है। सुबह इसके सेवन से पेट की बीमारियां दूर हो जाती हैं और शरीर में बनी अत्यधिक और हानिकारक गर्मी खत्म हो जाती है। 2. फाइबर से भरपूर होने के कारण कब्ज दूर करता है, शरीर की सुस्ती दूर करता है। 3. बीपी सामान्य हो जाता है और हाई बीपी काफी हद तक कम हो जाता है। इससे एलर्जी से होने वाली परेशानियां और त्वचा संबंधी बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। यह शरीर के सभी प्रकार के अल्सर को दूर करता है। ताज़ा संक्रमणों को दूर रखता है। 4. सबसे बड़ी बात यह विटामिन बी12 का सबसे बड़ा स्रोत है। संक्षेप में कहूं तो फर्मेंटेशन के कारण ये सबसे हेल्दी नाश्ता हो सकता है। नमक, अम्ल के साथ ही ऑक्सीजन की कमी वाले माइक्रोबायोलॉजिकल माहौल में फूड फर्मेंट हो जाता है। ये न सिर्फ खाना संरक्षित रखने की प्राचीन तकनीक है बल्कि विशिष्ट स्वाद, गंध बरकरार रखने का तरीका भी है।

सूक्ष्मजीव स्तर पर वास्तविक रूप से हम वही हैं जो हम खाते हैं। शरीर खरबों सूक्ष्मजीवों से भरा है। ये जटिल इकोसिस्टम त्वचा, मुंह, आंत में मौजूद होते हैं। येे आस-पास के वातावरण से प्रभावित होते हैं, खासकर भोजन से। बाकी इको-सिस्टम की तरह आंतों में माइक्रोबायोम को भी हेल्दी रहने के लिए विविधता चाहिए।

 अगर विकसित देश हमारी संस्कृति अपना रहे हैं, शोध से इसका समर्थन कर रहे हैं, अपने देश में इसे वही नाम ‘पया सोरू’ दे रहे हैं, तो हम अपने भोजन को नया रूप देने से क्यों कतराते हैं और उस पर गर्व नहीं करते? सोचें, ये बहुत अच्छा बिजनेस आइडिया है।

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