बुलडोजर और एनकाउंटर वाली सियासत ?

बुलडोजर और एनकाउंटर वाली सियासत: कैसे इसने योगी की छवि चमकाई, विपक्ष क्यों उठाता है इस नीति पर सवाल?

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद का गुरुवार का एनकाउंटर हो गया। असद के साथ ही अतीक के शूटर गुलाम को भी पुलिस ने मार गिराया। इन दोनों एनकाउंटर के बाद एक बार फिर बुलडोजर और एनकाउंटर वाली राजनीति की चर्चा शुरू हो गई है। 

बड़ी संख्या में लोगों ने माफियाराज खत्म करने के इस तरीके को सही ठहराते हुए सीएम योगी की तारीफ की है, तो कुछ लोग इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। बुलडोजर और एनकाउंटर की राजनीति क्या है? इसने योगी आदित्यनाथ की छवि कैसे चमकाई है? विपक्ष क्यों इस नीति पर सवाल उठाता है? इस सियासत की शुरुआत कब और कहां से हुई? कैसे सीएम योगी आदित्यनाथ ‘बुलडोजर बाबा’ बन गए? आइए जानते हैं…

 

19 मार्च 2017 की बात है। यूपी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की थी। विधायक दल की बैठक बुलाई गई। तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य समेत कई दिग्गज नेता बैठक में मौजूद थे। इस दौरान केशव प्रसाद मौर्य, मनोज सिन्हा समेत कई दूसरे बड़े नामों की चर्चा सीएम पद के लिए हो रही थी, लेकिन अचानक से योगी आदित्यनाथ के नाम का प्रस्ताव आ गया। ये प्रस्ताव पार्टी हाईकमान की तरफ से आया था, इसलिए एक स्वर में सभी ने इसपर अपनी सहमति दे दी। गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बन गए। 

योगी ने शपथ ग्रहण करते ही यूपी में कानून व्यवस्था सुधारने की बात कही। 2017 से 2022 तक योगी ने माफियाओं, बदमाशों, हिस्ट्रीशीटरों के घरों पर बुलडोजर चले। 2022 यूपी चुनाव की घोषणा से काफी पहले सीएम योगी आदित्यनाथ प्रचार में लग गए थे। आठ जनवरी को चुनाव एलान से पहले वो 68 रैलियां कर चुके थे। एक भी जगह उन्होंने बुलडोजर का प्रचार नहीं किया था। 

20 जनवरी को कन्नौज-इटावा समेत 16 जिलों में तीसरे चरण के वोट पड़ रहे थे। अखिलेश बगल के जिले अयोध्या में चौथे चरण के लिए रैली कर रहे थे। यहां उन्होंने मंच से कहा, ‘जो जगहों का नाम बदलते थे, आज एक अखबार ने उनका ही नाम बदल दिया। अखबार अभी गांवों में नहीं पहुंचा होगा। हम बता देते हैं, उनका नया नाम रखा है, बाबा बुलडोजर।’ 

अखिलेश के बाबा बुलडोजर कहते ही योगी आदित्यनाथ और भाजपा ने बुलडोजर का प्रचार तेज कर दिया। अगले दिन योगी ने कहा, ‘बुलडोजर हाईवे भी बनाता है, बाढ़ रोकने का काम भी करता है। साथ ही माफिया से अवैध कब्जे को भी मुक्त करता है।’ 25 फरवरी को जब योगी रैली के लिए निकले तो उन्होंने हेलीकाप्टर की एक फोटो शेयर की। उन्हें अपनी रैली में कई बुलडोजर खड़े नजर आए।

धीरे-धीरे बाबा का बुलडोजर एक ब्रांड बनने लगा। चुनाव में भी ‘यूपी की मजबूरी है बुलडोजर बाबा जरूरी है’ के नारे लगाए गए। पोस्टर, बैनर, सभाएं हर जगह योगी के साथ बुलडोजर नजर आने लगा। योगी के बुलडोजर का प्रचार सिर्फ यूपी तक नहीं, बल्कि देश के बाकी राज्यों तक होने लगा। 

बाकी राज्यों में भी लोग अपराध को खत्म करने के लिए योगी के बुलडोजर पैटर्न को लागू करने की मांग करने लगे। इसका असर यूपी के चुनाव में देखने को मिला। भाजपा ने 2022 में भी 403 में से 273 सीटों पर जीत हासिल कर दोबारा सरकार बना ली। योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार सीएम बने। 
 

अब एनकाउंटर के आंकड़े भी जान लीजिए 
यूपी में 2017 से पहले अखिलेश यादव की सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर खूब सवाल खड़े किए जाते थे। लूट-छिनैती, मर्डर, रेप जैसी घटनाओं पर अखिलेश सरकार लगभग हर दिन घिरी रहती थी। योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से यूपी की छवि बदलने की कोशिश शुरू हो गई। कानून व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए जहां एक तरफ सीएम योगी ने बुलडोजर चलवाए, वहीं दूसरी ओर माफियाओं और बदमाशों का एनकाउंटर भी होने लगा। यूपी सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2017 से अब तक कुल  10,720 एनकाउंटर हो चुके हैं। इनमें अतीक अहमद के बेटे असद अहमद, उसके गुर्गे गुलाम, अरबाज और उस्मान चौधरी भी शामिल हैं। इसके अलावा कानपुर में पुलिस टीम पर गोलियां बरसाने वाले कुख्यात अपराधी विकास दुबे के गुर्गों के नाम भी शामिल हैं। 

अगर पिछले छह साल की बात करें तो बीते वर्ष पुलिस व बदमाशों के बीच मुठभेड़ का आंकड़ा सबसे कम रहा है। वर्ष 2018 में सर्वाधिक 41 अपराधी मारे गए थे। इससे पहले साल 2017 में 28, साल 2019 में 34, साल 2020 में 26, साल 2021 में 26 व पिछले वर्ष 2022 में 14 अपराधी मारे गए हैं।

साल 2023 में अब तक 11 बदमाश मारे गए हैं। बीते छह वर्ष में पुलिस मुठभेड़ में 23 हजार से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। एनकाउंटर के दौरान 12 पुलिसकर्मी शहीद और 1400 घायल हुए हैं। 
 

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Prayagraj News : अतीक के करीबी माशूकउद्दीन के मकान को ध्वस्त करता बुलडोजर। –
इस तरह से पूरे देश में योगी का मॉडल हिट हो गया
अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलने और बदमाश, माफियाओं के एनकाउंटर से सीएम योगी पूरे देश में फेमस हो गए। सोशल मीडिया पर योगी आदित्यनाथ को लेकर अलग-अलग मीम्स बनने लगे। लोग यूपी की कानून व्यवस्था का उदाहरण दूसरे राज्यों में देने लगे।   

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असद एनकाउंटर। 
विपक्ष क्यों उठाता है बुलडोजर और एनकाउंटर पर सवाल
विपक्ष इस नीति पर लगातार सवाल उठाता रहा है। समाजवादी पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस। हर कोई इस कार्रवाई को एकतरफा बताता है। सीएम योगी पर आरोप लगता है कि केवल अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जा रहा है। उन्हीं के घरों पर बुलडोजर चलता है और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले अपराधियों का ही एनकाउंटर होता है।विपक्ष का आरोप है कि भाजपा और उसकी सरकारें न्यायपालिका में विश्वास नहीं करती हैं। अगर कोई अपराधी है तो उसे अदालत सजा देगी। इस तरह से किसी के घर पर बुलडोजर चलाना या आरोपियों का एनकाउंटर किया जाएगा तो अदालतें क्या करेंगी।

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