ग्वालियर में शौचालय विज्ञापन घोटाले पर EOW की FIR..7 अधिकारियों को बनाया आरोपी !

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नगर निगम और एक निजी विज्ञापन फर्म की मिलीभगत से करोड़ों रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है।
EOW को मिली शिकायत की जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2017 में नगर निगम ग्वालियर ने 48 सार्वजनिक शौचालयों पर विज्ञापन लगाने के लिए निविदा जारी की थी। यह टेंडर दीपक एडवरटाइजर्स नामक फर्म को मिला। निगम की ओर से तत्कालीन सीसीओ प्रदीप चतुर्वेदी और फर्म संचालक दीपक जेठवानी के बीच अनुबंध हुआ था। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस अनुबंध की कई शर्तें कूटरचित निकलीं। अनुबंध में जो प्रावधान जोड़े गए, उनका मेयर-इन-काउंसिल के आधिकारिक संकल्प में कोई उल्लेख नहीं था।
इन बदली गई शर्तों का फायदा उठाकर फर्म को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया, जिससे नगर निगम को करीब 54 लाख रुपए का नुकसान हुआ। विज्ञापन की वास्तविक देय राशि लगभग 72 लाख रुपए थी, लेकिन नगर निगम की समितियों ने गलत गणना कर इसे कम बताया। वित्तीय गड़बड़ी को देखते हुए EOW ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस मामले में तत्कालीन सीसीओ प्रदीप चतुर्वेदी (जिनकी मृत्यु हो चुकी है) को छोड़कर सहायक नोडल अधिकारी शशिकांत शुक्ला, सहायक लिपिक मदन पालिया, आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र शर्मा, अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव और देवेंद्र पालिया, अधीक्षण यंत्री जेपी पारा और उपायुक्त सुनील सिंह चौहान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दीपक एडवरटाइजर्स के संचालक दीपक जेठवानी को भी आरोपी बनाया है।
EOW ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 409, 467, 468, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराएं 7(ए), 13(1)(क) सहपठित धारा 13(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। EOW आगे की जांच में जुटी है और जल्द ही इस वित्तीय घोटाले की पूरी सच्चाई उजागर होने की उम्मीद है।

