बिहार

खूब रोशन हुए चिराग, पीके का सूपड़ा साफ;NDA के सामने महागठबंधन चारों खाने चित्त

खूब रोशन हुए चिराग, पीके का सूपड़ा साफ; NDA के सामने महागठबंधन चारों खाने चित्त

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद आज हुई मतगणना के बाद सामने आए आंकड़े लगभग निर्णायक रूप ले चुके हैं। चुनाव नतीजों की औपचारिक घोषणा से पहले अब सर्वाधिक चर्चित सीटों के चुनाव परिणाम का विश्लेषण हो रहा है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री बनेंगे? जानिए ऐसे कई अहम सवालों के जवाब

बिहार में चुनाव नतीजे को लेकर बढ़ी दिलचस्पी के बीच ये जानना रोचक है कि आखिर कौन से बड़े कारण रहे जिनके कारण महागठबंधन धराशायी होती दिख रही है। ये जानना भी दिलचस्प है कि क्या नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इनके अलावा सर्वाधिक चर्चित सीटों की स्थिति, 2020 के मुकाबले इस बार के चुनाव परिणाम में अंतर, प्रशांत किशोर के राजनीतिक दल- जनसुराज और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी- एआईएमआईएम और लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव का हाल को लेकर भी जिज्ञासा रही। चिराग पासवान के दल- लोजपा (रामविलास) के प्रदर्शन, महागठबंधन में शामिल दलों- कांग्रेस, राजद और अन्य पार्टियों को कितने वोट मिले?

की इस खबर में जानिए नतीजे की घोषणा से जुड़े ऐसे तमाम सवालों के जवाब

महागठबंधन चारों खाने चित्त
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम कई मायनों में दिलचस्प रहे हैं। कुल 243 सीटों में महागठबंधन का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। पांच साल पहले आए चुनाव परिणाम में 110 सीटें जीतने वाली महागठबंधन इस बार 30 सीटों पर सिमटती दिख रही है। दूसरी तरफ बमुश्किल बहुमत हासिल करने वाले सत्ताधारी खेमे NDA इस बार 200 सीटों से अधिक जीतती दिख रही है।

चुनाव से पहले दो दशक से अधिक समय बात कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोट चोरी जैसे जुमलों का इस्तेमाल करने वाले विपक्षी खेमे को जितनी सीटें मिली हैं, इससे साफ है कि सीट के मामले में जिस तरह महागठबंधन का सूपड़ा साफ हुआ है, आने वाले समय में इसका विश्लेषण भी किया जाएगा।

बिहार में सबसे बड़ी पार्टी कौन?
बात वोट प्रतिशत की करें तो तेजस्वी की पार्टी- राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सात घंटे की काउंटिंग के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। राजद को 23 फीसदी से अधिक वोट मिले हैं। 20 प्रतिशत वोट के साथ भाजपा दूसरे नंबर पर रही है। हालांकि, सीटों के मामले में भाजपा सबसे आगे है। इस परिणाम का एक चौंकाने वाला पहलू ये भी है कि मतदान प्रतिशत के मामले में जनसुराज का कहीं भी अता-पता नहीं है। ये इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि प्रशांत किशोर की इस पार्टी ने 200 से अधिक सीटों पर ताल ठोकी थी।
बड़े या चर्चित चेहरों का क्या हुआ
इस साल के चुनाव में कई बड़े सूरमा भी पस्त होते दिख रहे हैं। अपने राजनीतिक करियर में करीब तीन साल तक डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव भी पिछड़ते दिख रहे हैं। इनका चेहरा सर्वाधिक चर्चित इसलिए है क्योंकि तेजस्वी को महागठबंधन ने मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया था। इसके अलावा दरभंगा जिले की सीट- अलीनगर से ताल ठोकने वाली सबसे युवा प्रत्याशी मैथिली ठाकुर की निर्णायक जीत भी चर्चा में है।
बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम: आज के नतीजे 2020 से कितने अलग 
सूबे के राजनीतिक इतिहास में करीब तीन दशकों के बाद पहली बार एक ऐसा दल चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहा था, जिसने 200 से अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। बीते तीन साल से अधिक समय से बिहार में सामाजिक-राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे प्रशांत किशोर की पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है। सोशल मीडिया के अलावा जमीनी स्तर पर भी उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनाव को ऐतिहासिक बताया था। पीके उपनाम से चर्चित प्रशांत किशोर तमाम साक्षात्कारों में ये दावे करते दिखे कि उनके पास प्रत्याशियों की ऐसी फौज है, जो बिहार में नई इबारत लिखेगी। हालांकि, वे खुद इस बात को भी रेखांकित करते थे कि जनसुराज पार्टी या तो अर्श पर होगी या फर्श पर। तमाम बातों के बावजूद नतीजे इसलिए भी हैरान कर रहे हैं क्योंकि इस पार्टी को मिलने वाला मतदान प्रतिशत चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आठ घंटे के बाद भी उपलब्ध नहीं दिखी।
पांच साल पहले कैसा रहा था चुनाव परिणाम
2020 विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच था। इस चुनाव में एनडीए ने 125 सीटें जीतीं थीं। इनमें सबसे ज्यादा 74 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। जदयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीट पर सफलता मिली थी। राज्य की 110 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थी। इसमें 75 सीटें जीतकर राजद राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके साथ ही कांग्रेस को 19, वामदलों को 16 सीट पर जीत मिली थी। इनमें 12 सीटें माले और दो-दो सीटें भाकपा और माकपा के खाते में गईं थी। वहीं अन्य दलों में एआईएमआईएम ने पांच, बसपा, लोजपा और निर्दलीय ने एक-एक सीटें जीती थी।
प्रशांत किशोर के हश्र से लेकर ओवैसी को मिली कामयाबी तक…
एक तरफ आज के चुनाव परिणाम में प्रशांत किशोर की पार्टी का सूपड़ा साफ होने की चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ ये भी चर्चा हो रही है कि मुट्ठी भर सीटों पर भाग्य आजमाने वाली पार्टी- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) जैसे छोटे दल कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *