दिल्लीबिहार

तेजस्वी की मनमानी के चलते मिली करारी हार

बिहार: कांग्रेस और राजद में टकराव, तेजस्वी की मनमानी के चलते मिली करारी हार

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने मंथन शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, सीट बंटवारे में तेजस्वी यादव ने जमकर मनमानी की थी, जिसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा है. इस हार का जिम्मेदार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को माना जा रहा है.

बिहार: कांग्रेस और राजद में टकराव, तेजस्वी की मनमानी के चलते मिली करारी हार

तेजस्वी यादव और राहुल गांधी.

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने मंथन शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, इस हार का जिम्मेदार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को माना जा रहा है. कांग्रेस का आरोप है कि राजद की तरफ से उन्हें खराब सीटें दी गईं. सीट बंटवारे में राजद ने जमकर मनमानी की.

कांग्रेस को कुल 61 सीटें दी गई, जिसमें से 9 सीटों पर फ्रेंडली फाइट हुई. 23 ऐसी सीटें दी गई, जहां पिछले कई चुनावों में कांग्रेस या राजद जीते ही नहीं थे. जबकि 15 सीटें ऐसी मिलीं, जहां पिछले कई चुनावों में कांग्रेस और राजद सिर्फ एक बार ही जीते थे. यानी अगर देखा जाए तो कांग्रेस को जिताऊ 14 सीटें ही मिलीं, जिसमें वो 6 जीती है. सूत्रों के मुताबिक, सीट बंटवारे में तेजस्वी यादव ने जमकर मनमानी की थी, जिसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा है.

राजद की वजह से ओवैसी और जेडीयू को हुआ फायदा

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस का आरोप है कि राजद ने तेजस्वी को महागठबंधन का नेता बनाने के लिए सीएम फेस घोषित कराने के लिए अड़ा रहा. इस पर महागठबंधन में काफी खींचतान वाली स्थिति बनी थी. जबकि सरकार बनने पर उनको ही सीएम बनना था. तेजस्वी को सीएम घोषित करने से मुकेश सहनी की डिप्टी सीएम की मांग भी पूरी करनी पड़ी, जो भारी पड़ी. मुस्लिमों में इसका नकारात्मक असर दिखा, जिसका फायदा ओवैसी और जेडीयू को मिला. साथ ही दलित और सवर्ण मतदाताओं का भी इससे नुकसान हुआ.

नीतीश के सामने नहीं टिक सके तेजस्वी

सूत्रों के मुताबिक, नीतीश के चेहरे के सामने तेजस्वी टिक नहीं सके, जिसका खमियाजा पूरे महागठबंधन को उठाना पड़ा. सीएम बनने की चाहत पाले तेजस्वी पांच साल लगातार प्रचार-प्रसार से दूर रहे. आखिरी समय में घोषणाएं करने का लाभ नहीं मिला. आखिरी दिनों में रोज 25 रैलियों का कोई मतलब नहीं था, जहां तेजस्वी महज उम्मीदवारों को जिताने की अपील करते दिखे. उनको अपने भाषणों के जरिए अपने रोजगार, पलायन रोकना और लाभार्थी योजनाओं के मुद्दों को जनता को समझाना था. इसके लिए उन्हें काफी पहले से धुआंधार प्रचार में उतरना चाहिए था.

बाहरी बिहारी वोटर और जीविका दीदियों ने दिया वोट

बीजेपी ने दूसरे राज्यों काम करने वाले बिहारियों को अपने खर्चे पर टिकट देकर बिहार भेजा, वो एक अच्छी-खासी संख्या रही. जीविका दीदियों को चुनाव के समय भी 10 हार रुपये आते रहे, जिसने फर्क डाला, लेकिन चुनाव आयोग ने कोई एक्शन नहीं लिया. वोट चोरी और चुनाव आयोग-बीजेपी की मिलीभगत का मुद्दा जनता के बीच क्लिक नहीं किया.

वोट चोरी मुद्दे को सही से नहीं भुनाया

बिहार में कमजोर संगठन और छोटा दल होने के बावजूद कांग्रेस ने वोट चोरी मुद्दे को उठाया, लेकिन बड़ा दल और मजबूत दल होने के बावजूद तेजस्वी ने ममता की तर्ज पर इसे नहीं लिया. अब ये सभी विपक्षी दलों की जिम्मेदारी है कि, लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को इस मुद्दे को कनेक्ट करें वरना बीजेपी यूंही सत्ता हथियाती रहेगी और विपक्ष जनता के समर्थन के बावजूद चुनाव नहीं जीत पाएगा.

वोट चोरी और SIR पर फिर करेंगे रैली

इस शुरुआती समीक्षा के बाद कांग्रेस अब बिहार चुनाव में वोट चोरी और SIR में गड़बड़ी के आंकड़े जल्द जुटाकर जनता और मीडिया के सामने भी रखेगी. लालू-तेजस्वी से राहुल-खरगे की फोन पर चर्चा के बाद कांग्रेस आलाकमान इंडिया गठबंधन के बाकी दलों के नेताओं से संपर्क कर रहा है. इसके बाद दिसंबर की शुरूआत में रामलीला मैदान में इसी मुद्दे पर बड़ी रैली का आयोजन करेगा, जिसमें इंडिया ब्लॉक के दलों को भी बुलाया जाएगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *