उत्तर प्रदेशकानपूर

आशीष द्विवेदी के कानपुर जॉइनिंग से लेकर बर्खास्तगी तक की कहानी ?

कानपुर के इंस्पेक्टर की 15 साल में नौकरी खत्म…​​​​​​
अखिलेश दुबे जेल गया तो कच्चा चिट्‌ठा खुला, जॉइनिंग से लेकर बर्खास्तगी तक की कहानी

कानपुर में मां-बेटी को उठवाने वाला बर्खास्त इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी की जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। आशीष ने बर्रा में ही रहकर अपनी स्कूलिंग और ग्रेजुएशन किया। इसके बाद मृतक आश्रित कोटे से पिता की जगह दरोगा की नौकरी मिल गई।

इसी दौरान, अखिलेश दुबे सिंडीकेट से जुड़ गया और फिर प्राइम थानों का चार्ज मिलता रहा। पूर्व पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने ऑपरेशन महाकाल चलाकर अखिलेश दुबे को जेल भेजा तो आशीष द्विवेदी का भी कच्चा चिट्‌ठा खुल गया।

आशीष, पुलिस कमिश्नर का पीआरओ रहते हुए अखिलेश दुबे के लिए काम कर रहा था। खुलासा होने के बाद तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने उसे सस्पेंड कर जांच शुरू कराई। अब उसे बर्खास्त भी कर दिया गया है। सिर्फ 15 सालों में ही उसकी नौकरी खत्म हो गई।

चलिए, आशीष द्विवेदी के कानपुर में पहले थाने के चार्ज से लेकर बर्खास्तगी तक की कहानी पढ़ते हैं…

यह तस्वीर बर्खास्त इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी की है।
यह तस्वीर बर्खास्त इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी की है।

अखिलेश दुबे से जुड़ते ही बड़े थाने का मिला चार्ज

आशीष कानपुर के बर्रा-2 में परिवार के साथ रहता था। उसने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई गोविंद नगर के श्रीमुनि हिंदू इंटर कॉलेज से की। इसके बाद डीबीएस कॉलेज, गोविंद नगर से ग्रेजुएशन पूरा किया। इस दौरान वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहा।

इसी बीच, आशीष के पिता की मौत हो गई। 2010 में पिता की जगह मृतक आश्रित कोटे से उसे दरोगा की नौकरी मिल गई। कानपुर में तैनाती मिलने के बाद आशीष ने जुगाड़ से सबसे पहले मलाईदार नवाबगंज थाना, फिर गोविंद नगर और फजलगंज थानों का चार्ज हासिल कर लिया।

एक के बाद एक तीन बड़े थानों का चार्ज मिलने के बाद आशीष अखिलेश दुबे सिंडीकेट से जुड़ गया। कानपुर का हर बड़ा और रसूखदार आदमी आशीष के संपर्क में आ गया, क्योंकि वह पहले से ही शहर के चप्पे-चप्पे और प्रभावशाली लोगों से वाकिफ था।

उसे अपना नेटवर्क खड़ा करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। आशीष ने कानून और नियमों को ताक पर रखकर थानेदारी की। उसे सर्विस नियमों के उल्लंघन के 6 नोटिस भी मिले, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। इसके बाद वह अफसरों के रडार पर आ गया।

इंस्पेक्टर को स्टार लगाते पुलिस अफसर।
इंस्पेक्टर को स्टार लगाते पुलिस अफसर।

कैसे खुला इंस्पेक्टर आशीष का कच्चा चिट्‌ठा, जानिए

कानपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन महाकाल शुरू किया और अखिलेश दुबे को गिरफ्तार कर जेल भेजा। अखिलेश की जांच में सामने आया कि आशीष द्विवेदी जेल में बंद अखिलेश दुबे के सिंडीकेट से जुड़ा था और उसके लिए काम करता था।

जब अखिलेश दुबे के खिलाफ तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने जांच शुरू की, तो आशीष पुलिस कमिश्नर ऑफिस में जन शिकायत प्रकोष्ठ में रहते हुए एक-एक सूचना दुबे तक पहुंचाता था। अखिलेश दुबे के कास्मोजिन बार पर छापेमारी से पहले सूचना लीक हुई, तो पुलिस अफसरों का शक आशीष पर गया।

जांच में वह फंस गया। इसके बाद भाजपा नेता रवि सतीजा ने अगस्त 2025 में अखिलेश दुबे और उसके साथियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उन्होंने अखिलेश पर 50 लाख रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया।

रवि सतीजा ने बताया कि उन्होंने अखिलेश दुबे के खिलाफ पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसके बाद इंस्पेक्टर आशीष उन्हें अखिलेश दुबे के पास ले गया। वहां अखिलेश ने कहा कि मामला एसआईटी तक नहीं जाना चाहिए, वरना जीवन भर जेल में रहना पड़ेगा।

हालांकि बाद में भाजपा नेता पुलिस कमिश्नर से मिले, तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि ऐसे मामलों में जांच होने दीजिए। इसके बाद जब एसआईटी ने जांच की, तो अखिलेश दुबे समेत अन्य आरोपी दोषी पाए गए।

एसआईटी ने अखिलेश और उसके सहयोगी लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इसके बाद इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया, लेकिन वह तब से गायब हो गया।

यह तस्वीर इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी के एक कार्यक्रम के दौरान की है।
यह तस्वीर इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी के एक कार्यक्रम के दौरान की है।

इन मामलों में भी आशीष पर लगे आरोप

1. थाने में रखे गए ट्रांसफॉर्मर बेच डाले

एक IPS का आशीर्वाद होने के कारण मां-बेटी की पिटाई के मामले में आशीष पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और उसे नवाबगंज थाने से हटाकर फजलगंज थाने का चार्ज दे दिया गया। यहां चोरी के ट्रांसफॉर्मर पकड़े गए थे।

माल बरामद कर इन्हें थाने में रखा गया था। आशीष ने इंस्पेक्टर रहते हुए इन ट्रांसफॉर्मरों को थाने से ही एक कंपनी को बेच दिया और आरोपियों को भी कानून को ताक पर रखकर राहत दे दी। मामले में उसका नाम आया, लेकिन जुगाड़ के चलते वह बड़ी कार्रवाई से बच गया।

2. इंस्पेक्टर की प्रताड़ना से महिला ने किया सुसाइड

मई 2022 में नवाबगंज के एक कारोबारी के घर चोरी हुई। शक के आधार पर आशीष उन्नाव की रहने वाली नौकरानी और उसकी बेटी को ले आया, जबकि किसी FIR दर्ज नहीं की गई थी। अवैध हिरासत में रखकर आशीष ने मां-बेटी को इतना धमकाया कि वे टूट गईं।

9 मई 2022 को सुबह आशा ज्योति केंद्र (वन स्टॉप सेंटर) के टॉयलेट में महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी। नए कमिश्नर अखिल कुमार ने जांच कराई तो आशीष को महिला और उसकी बेटी को अवैध हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने का दोषी पाया गया।

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