सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111 (संगठित अपराध) के बीच सांविधानिक स्तर पर कोई टकराव है।
कोर्ट ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने दिया। पीठ यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपित लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में यूपी गैंगस्टर एक्ट की कई धाराओं को चुनौती दी गई है।
इनमें धारा 3 (दंड), धारा 12 (विशेष अदालतों द्वारा प्राथमिकता से सुनवाई), धारा 14 से 17 (संपत्ति की कुर्की, रिहाई और अधिग्रहण से जुड़ी जांच) और 2021 के नियमों की कुछ धाराएं शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 300-ए के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।