ग़ज़िआबाददिल्ली एनसीआर

गाजियाबाद में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर रिश्वत लेते अरेस्ट !

गाजियाबाद में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर रिश्वत लेते अरेस्ट:4 लाख देने वाला कारोबारी भी गिरफ्तार, 4 ट्रक कफ सिरप छोड़ने वाला था
गाजियाबाद पुलिस ने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु को 4 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ अरेस्ट किया है। पुलिस ने उसके पास से 4 लाख कैश बरामद किया। वहीं, रिश्वत देने वाला कारोबारी राहुल भी भागते समय पकड़ा गया।

गाजियाबाद में 3 नवंबर को 3.5 करोड़ का 4 ट्रक कफ सिरप पकड़ा था। उन्हीं 4 ट्रक को छोड़ने के एवज में इंस्पेक्टर ने रिश्वत मांगी थी। शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ऑफिस में कारोबारी रिश्वत लेकर पहुंच गया। वहां इंस्पेक्टर को दिया। जैसे ही इंस्पेक्टर ने रिश्वत लेकर अपने ऑफिस में रखी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

DCP सिटी धवल जायसवाल ने बताया- आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी धाराओं में केस दर्ज किया जा रहा है। जो व्यक्ति घूस दे रहा था, वो भी हमारी गिरफ्त में है। सूत्रों के मुताबिक, इंस्पेक्टर की एक्टिविटी को लेकर कमिश्नर को शिकायत मिली थी। इसके बाद उस पर नजर रखी जा रही थी।

यह फोटो 3 नवंबर की है, जब एडिशनल डीसीपी पीयूष सिंह ने कफ सिरप के साथ आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस ने इसकी प्रेस कॉफ्रेंस की थी।
यह फोटो 3 नवंबर की है, जब एडिशनल डीसीपी पीयूष सिंह ने कफ सिरप के साथ आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस ने इसकी प्रेस कॉफ्रेंस की थी।

3 नवंबर को पकड़ा था 4 ट्रक कफ सिरप

गाजियाबाद पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर को सोनभद्र पुलिस ने दो ट्रक कफ सिरप पकड़े थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये सिरप गाजियाबाद के गोदामों में स्टॉक किए जाते हैं। यहां से देशभर में सप्लाई की जाती है। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने एडीसीपी पीयूष सिंह और क्राइम ब्रांच प्रभारी अनिल राजपूत को जांच की जिम्मेदारी सौंपी।

गाजियाबाद पुलिस ने 3 नवंबर को मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम से छापा मारा। गोदाम की तलाशी ली तो दो ट्रक और दो कैंटर मिले। चूने की बोरियों के बीच इनमें कफ सिरप को छिपाया गया था। यहां से 1,57,350 शीशियां Eskuf और Phensedyl कफ सिरप मिला। इसमें 850 पेटी Eskuf ब्रांड की थी जबकि 300 पेटी Phensedyl ब्रांड की। हर पेटी में 100 मिलीलीटर की शीशियां थीं। कुल मात्रा 15,735 लीटर निकली। एक शीशी की कीमत 210 से 212 रुपए के बीच है, यानी कुल कीमत 3.40 करोड़ रुपए से अधिक।

जहां शराब बंद, वहां सबसे ज्यादा मांग

पुलिस के मुताबिक, इन सिरप में कोडीन नामक तत्व होता है, जो मादक पदार्थ की श्रेणी में आता है। आरोपी इन सिरप की बांग्लादेश और अन्य देशों में तस्करी करते थे। भारत में यह 210 रुपए की शीशी 600 से 1000 रुपए तक बांग्लादेश में बिकती थी। सूत्रों के मुताबिक, जहां-जहां शराब प्रतिबंधित है, वहां यह सिरप नशे के रूप में इस्तेमाल होता है।

प्रतिबंधित कफ सीरप की यह खेप गाजियाबाद से यूपी, दिल्ली, बिहार, झारखंड और बंगाल होते हुए बांग्लादेश भेजी जानी थी। 4 ट्रक से पुलिस ने सिरप बरामद किया था।
प्रतिबंधित कफ सीरप की यह खेप गाजियाबाद से यूपी, दिल्ली, बिहार, झारखंड और बंगाल होते हुए बांग्लादेश भेजी जानी थी। 4 ट्रक से पुलिस ने सिरप बरामद किया था।

3 साल में 550 से ज्यादा ट्रक सिरप खपाया

पूछताछ में सामने आया कि गैंग का मास्टरमाइंड सौरव त्यागी और संतोष भड़ाना ने पिछले तीन साल में 550 से ज्यादा ट्रकों से कफ सिरप की सप्लाई की। गाजियाबाद के गोदाम में एक ट्रक खड़ा करने के 20 हजार रुपए रोज दिए जाते थे। मुख्य आरोपी सौरव त्यागी ने पुलिस को बताया कि प्रतिबंधित कफ सीरप दिल्ली से यूपी, बिहार, झारखंड के रास्ते बांग्लादेश तक भेजे जाते थे।

दुबई से ऑपरेट हो रहा है नेटवर्क

इस सिंडिकेट का सरगना आसिफ है, जो मेरठ निवासी है और दुबई से पूरी गैंग को ऑपरेट करता है। उसके साथ मेरठ का ही वसीम और वाराणसी का शुभम जायसवाल भी शामिल है। तीनों फिलहाल फरार हैं। आसिफ और वसीम की मदद से सौरव त्यागी कफ सिरप को एनसीआर में इकट्ठा करता था और फिर देशभर में सप्लाई कराता था।

गाजियाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच ने गोदाम में छापेमारी कर 4 ट्रक कफ सिरप बरामद किया था।
गाजियाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच ने गोदाम में छापेमारी कर 4 ट्रक कफ सिरप बरामद किया था।

फर्जी फार्मा कंपनियों के जरिए होता था कारोबार

सौरव त्यागी के पास RS फार्मा, इंदिरापुरम गाजियाबाद का लाइसेंस है। उसने कई फर्जी फर्मों-जैसे वान्या इंटरप्राइजेज, लेबोरेट फार्मा (पोंटा साहिब) और एबॉट फार्मा (बद्दी) के नाम पर सिरप खरीदा। इन सिरप को मछली गोदाम परिसर, गाजियाबाद में रखकर वहां से ट्रकों में लोड कर झारखंड, बंगाल, असम भेजा जाता था। हर बार ट्रकों में सिरप को छिपाने का तरीका बदल दिया जाता था, ताकि पकड़ा न जा सके।

क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु 2013 बैच के अफसर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *