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रामराज की स्थापना से धर्यध्वजा फहराने तक मोदीजी !

रामराज की स्थापना से धर्यध्वजा फहराने तक मोदीजी

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी को अवतार न मानने वाले हमारे जैसे लोग कलियुग में कूढमगज कहे जा रहे हैं, क्योंकि मोदी जी देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए चुने गए थे. मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो तमाम कामकाज छोडकर अयोध्या में राममंदिर के भूमिपूजन से लेकर धर्मध्वजा फहराने तक की जिम्मेदारी मुस्तैदी से निभा रहे हैं.
मैने कही नहीं पढा कि अवधेश श्रीराम ने ऐसी कोई वसीयत की हो जिसमें कि कलियुग में भारत में रामराज की स्थापना से लेकर धर्मध्वजा फहराने के लिए भाजपा या भाजपा के मोदी जी को नामिनी बनाया गया हो. लेकिन मोदी जी ने चारों शंकराचार्यों के अधिकारों का अतिक्रमण कर न सिर्फ राममंदिर की आधारशिला रखने, विग्रह की स्थापना करने और मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने का काम खुद किया बल्कि खुद धर्मराज बन गए.धर्मांध देश का प्रधान यदि धर्मपारायण हो तो भला किसको आपत्ति हो सकती है? और जिन्हे आपत्ति है, वे सरकार के ठेंगे से.
हमारे आधुनिक धर्मराज का ठेंगा बहुत बडा है. ये ठेंगा शंकराचार्यों को ही नहीं अपितु राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और भारत की न्यायपालिका को भी दिखाया जा चुका है. शिलान्यास, लोकार्पण, धर्मध्वजा फहराने पर धर्मराज मोदी जी का ही एकाधिकार है, फिर चाहे मामला राममंदिर का हो या लोकतंत्र के मंदिर यानि नयी लोकसभा के भूमिपूजन और लोकार्पण का हो. भारत में राष्ट्रपति केवल दही-शक्कर खिलाने या सरकार के लिए आदिवासियों को पटाने के लिए आरक्षित हैं.
हमारा सपना देश में कानून का राज और कानून की धवजा फहराती देखने का था, किंतु ये सपना टूट गया है. भारत में धर्मराज धर्मध्वजा फहरा चुके हैं. वे अब संयुक्त राष्ट्र संघ, जी-20,ब्रिक्स, आसियान में भी धर्मध्वजा लेकर न जा धमकें, इसकी कोई गारंटी नहीं है. वे डंका तो बजाते घूम ही रहे हैं. कभी कभी मुझे भ्रम होता है कि माननीय मोदी जी ने तीनों बार पद और गोपनीयता की शपथ संविधान के तहत ली है या रामचरित मानस के तहत !
भारत धर्मनिरपेक्ष देश था लेकिन अब धीरे -धीरे धर्मसापेक्ष देश बनाया जा रहा है. देश का धर्म हिंदू धर्म को बनाने कोशिश भी पूरी गंभीरता से की जा रही है. इस कोशिश में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका भी मौन सयर्थन दे रही है और खबरपालिका के तो कहना ही क्या ? हमारे जस्टिस गणेश पूजा और गणेश परिक्रमा को महत्वपूर्ण मानने लगे हैं. संसद जनमत के बजाय ध्वनिमत से चलाई जा रही है. कार्यपालिका का रंग भी बदला जा चुका है. उसे रामनामी ओढाई जा चुकी है. खबरपालिका सरकार और धर्मराज के कसीदे काढकर अपना पेट पाल रही हैः
मौजूदा परिदृश्य में सबकुछ राममय होता नजर आ रहा है. सरकार का बजट अस्पतालो, अनुसंधानों के बजाय मंदिरों, कारीडोरों पर खर्च किया जा रहा है. संसद में राजदंड की स्थापना की जा चुकी है. अब केवल भारत को दुनिया से हिंदूराष्ट्र की मान्यता दिलाना शेष रह गया है. हमें उम्मीद है कि यदि विपक्ष का लगातार कचूमर बनाया जाता रहा तो अगले दो पांच साल में देश का रघुपति, राघव, राजाराम हो जाएगा.भाजपा के जन्म की सार्थकता इसी अभियान के पूरे होने में है.
आप यकीन कीजिए कि माननीय मोदी जी वो काम कर रहे हैं वो काम नेहरूजी को करन था, शास्त्री को करना था, इंदिरा गांधी को करन था, राहुल के पिता राजीव गांधी को करना था लेकिन उन्होनै नहीं किया. और तो और पंडित अटलबिहारी बाजपेई ग्वालियर वाले भी भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना भूल गये.. अब सबकी गलती को हमारे मोदीजी को ठीक करना पड रहा है.
हुइए वही जो राम रचि राखा
को कहि तर्क बढावे शाखा
जब आप ये आलेख पढ रहे होंगे तब तक मोदीजी राममंदिर के शिखर पर धर्यध्वजा फहरा चुके होंगे. पूरी दुनिया टुकुर- टुकुर इस दृश्य को देखकर गदगद हो रही होगी. अब देश में प्रभात फेरियां नहीं बल्कि धर्मयात्राएं भी सरकार निकालेगी.

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