Agritpatrikaदिल्लीशिक्षा

देश की हर प्राइवेट, डीम्ड यूनिवर्सिटी का ऑडिट होगा !

देश की हर प्राइवेट, डीम्ड यूनिवर्सिटी का ऑडिट होगा
स्टूडेंट ने लगाया था ‘मुसलिम नाम’ से भेदभाव का आरोप; SC में 8 जनवरी को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज का ऑडिट करने का आदेश दिया है। इसमें कोर्ट ने केंद्र, सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों और UGC यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन को इस ऑडिट के बाद व्यक्तिगत तौर पर हस्ताक्षर किया हुआ एफिडेविट जमा करने का आदेश दिया है।

यूनिवर्सिटीज की स्थापना कैसे हुई, उन्हें नियंत्रित कौन करता है, किस तरह के रेगुलेटरी अप्रूवल्स इन्हें दिए गए हैं और क्या वाकई ये यूनिवर्सिटीज नॉट-फॉर-प्रॉफिट बेसिस पर चलती हैं- यह सभी जानकारी एफिडेविट में साझा करनी होगी।

बदला नाम यूनिवर्सिटी ने नहीं अपनाया

एमिटि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 23 साल की MBA स्टूडेंट आयशा जैन ने एक पिटीशन दायर की थी। वो यहां से आंत्रप्रेन्योरशिप की पढ़ाई कर रही हैं। साल 2021 तक उनका नाम खुशी जैन था। पर्सनल कारणों से 2021 में उन्होंने अपना नाम बदलकर आयशा जैन कर लिया। इसके बाद गजट ऑफ इंडिया में नया नाम पब्लिश भी करा लिया। नाम बदलने की यह लीगल प्रक्रिया है। अब सभी डॉक्यूमेंट्स जैसे आधार कार्ड पर नाम आयशा जैन हो चुका था।

साल 2023 में आयशा ने एमिटी यूनिवर्सिटी के एक सर्टिफिकेट प्रोग्राम में एडमिशन लिया। कोर्स पूरा हुआ और उन्हें सर्टिफिकेट मिल गया। साल 2024 में आयशा ने एमिटी यूनिवर्सिटी के MBA प्रोग्राम में एडमिशन लिया। इसके लिए उन्होंने सभी लीगल डॉक्यूमेंट्स जमा कराए। यहां यूनिवर्सिटी ने अपने रिकॉर्ड्स में नाम बदलने से मना कर दिया। आयशा ने आरोप लगाया कि मुस्लिम नाम रखने के कारण उनके साथ बदसलूकी की गई। इन कारणों से वो मिनिमम अटेंडेस का क्राइटेरिया पूरा नहीं कर पाई और एग्जाम नहीं दे सकीं। इस वजह से उनका पूरा साल बर्बाद हो गया।

छात्रा का आरोप है कि इसके बाद वो शिक्षा मंत्रालय और UGC के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंची लेकिन यूनिवर्सिटी ने इस संबंध में भेजे गए मेल्स पर कोई ध्यान नहीं दिया।

स्टूडेंट को मिला 1 लाख रुपए का मुआवजा

मामला जब कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने एमिटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. अतुल चौहान को पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट ने उनसे कहा कि स्टूडेंट का पूरा साल बर्बाद हुआ है और VC इसका समाधान निकालें। हालांकि इस बीच आयशा दूसरी जगह एडमिशन ले चुकी थीं और एमिटी यूनिवर्सिटी ने उसकी फीस लौटा दी थी।

इसके बाद कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को आदेश दिया कि वो छात्रा को कंपनसेशन दें क्योंकि उसका पूरा साल बर्बाद हो चुका है। यूनिवर्सिटी ने छात्रा को 1 लाख रुपए का कंपनसेशन दिया।

कोर्ट ने मामला PIL में तब्दील किया

20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानी PIL में बदल दिया। जस्टिस अमानुल्लाह और जस्टिस एन वी अंजरिया की बेंच ने कहा कि सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के गठन, स्थापना और संचालन से जुड़े पहलुओं की जांच की जाए। कोर्ट ने इसे छात्रों के अधिकारों और हायर एजुकेशन में ट्रांसपेरेंसी से जोड़ा है।

कोर्ट ने साफ किया है कि इसकी जिम्मेदारी किसी जूनियर अधिकारी को नहीं दी जा सकती। इसके लिए शीर्ष अधिकारियों को स्वयं जिम्मेदारी उठानी होगी। साथ ही गलत या अधूरी जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2025 को होगी। इससे पहले सभी एफिडेविट जमा कराने होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *