नोएडा में तीन गांजा तस्कर गिरफ्तार….ऑनलाइन ऐप के जरिए करते थे सप्लाई ?
ऑनलाइन ऐप के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर में गांजे की तस्करी करने वाले गिरोह के सरगना और उसके दो साथियों को सेक्टर-113 थाने की पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से दस किलो सौ ग्राम उच्च गुणवत्ता का गांजा बरामद हुआ है। सरगना का आपराधिक इतिहास है और वह पहले भी जेल जा चुका है।
डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि बीते दिनों एसीपी तृतीय ट्विकंल जैन को इनपुट मिला था कि शहर के कई हिस्से में ऑनलाइन गांजे की आपूर्ति की जा रही है। ऐप के माध्यम से बुकिंग कर कुछ ग्राहक गांजा प्राप्त कर रहे हैं। इसके बाद एडिशनल डीसीपी शैव्या गोयल की अगुआई में तस्करों के पूरे सिंडिकेट को तोड़ने के लिए एक टीम बनाई गई। गिरोह के सदस्य शनिवार को जब गांजे की तस्करी करने आए थे, तभी उन्हें टीम ने दबोच लिया।
हाइ क्वालिटी का है गांजा
तस्करों की पहचान कन्नौज निवासी योगेंद्र प्रताप सिंह, बिहार के नालंदा निवासी सूरज उर्फ रुद्र और हरदोई निवासी शिवकेश के रूप में हुई है। तीनों वर्तमान में शहर के अलग-अलग हिस्से में किराये का कमरा लेकर रह रहे हैं। योगेंद्र गिरोह का सरगना है। आरोपियों से पास से जो गांजा बरामद हुआ है वह ओजी, मैंगो और शिलांग किस्म का है। इस गांजे की गुणवत्ता उच्च किस्म की होती है। कीमत भी आम गांजे से पांच गुना ज्यादा होती है। जिले में सप्लाई किए जाने वाले गांजे को गिरोह का सरगना उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, नेपाल और शिलांग से मंगाता है।
सरगना पूर्व में एनडीपीएस ऐक्ट की धारा में ही जेल जा चुका है। बीते पांच सालों से वह गांजे की तस्करी करवा रहा है। इससे लाखों रुपये वह अबतक अर्जित कर रहा है। गिरोह में शामिल कुछ अन्य सदस्यों के बारे में भी पुलिस को पूछताछ के बाद जानकारी मिली है। उनकी गिरफ्तारी के लिए भी एक टीम गठित की गई है।
पहले पेमेंट इसके बाद सप्लाई एडिशनल डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन ऐप के माध्यम से क्लाइंट से उसकी लोकेशन और ऑर्डर प्राप्त कर लेते थे। इसके एवज में ऑनलाइन भुगतान ग्राहक से करा लिया जाता था। सरगना ऑनलाइन ऐप का इस्तेमाल कर गांजे को पैक कर निर्धारित लोकेशन पर उपलब्ध करवा देता है। सरगना यह पहले ही सुनिश्चित कर लेता है कि गांजे की डिलिवरी के दौरान यदि कोई पकड़ा जाए तो वह राइडर ही हो, न कि उसके गिरोह का सदस्य। निर्धारित स्थान पर गांजा राइडर के माध्यम से ही पहुंचता था।
राइडर तक को नहीं होता पता
राइडर को यह नहीं पता होता था कि जिस उत्पाद की वह डिलिवरी करने जा रहा है उसके अंदर गांजा है। सरगना पूरे दिल्ली-एनसीआर में गांजे की आपूर्ति करवाता था। गांजे की पैकिंग के लिए आरोपी नामी कंपनियों की कवर पैकिंग पॉलिथीन का इस्तेमाल करते हैं। किसी को शक न हो इसके लिए गिरोह के सदस्य पैकिंग के ऊपर फर्जी ऑर्डर की रसीद भी लगा देते हैं।
कर्मी से बना गांजा तस्कर
गिरोह का सरगना योगेंद्र सिंह पहले नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करता था। कंपनी में कई लोग ऐसे थे, जो नियमित गांजे का सेवन करते थे। योगेंद्र को लगा वह कंपनी के लोगों को ही गांजा बेचकर मुनाफा कमा सकता है। इसके लिए उसने दिल्ली के एक गांजा तस्कर से संपर्क किया। वह दिल्ली से गांजा लाकर कंपनी के लोगों को बेचने लगा। जब उसे लगा इसमें काफी मुनाफा है तो उसने बाहर के लोगों को भी गांजा बेचना शुरू किया।
नौकरी छोड़ बना तस्कर
कुछ समय बाद उसने कंपनी की नौकरी भी छोड़ दी और गांजे की तस्करी पर ही ध्यान केंद्रित कर लिया। इसके बाद उसने सूरज और शिवकेश समेत अन्य युवकों से संपर्क किया और गांजे की तस्करी का दायरा काफी बढ़ा लिया। कुछ साल पहले से योगेंद्र सूरज और शिवकेश समेत अन्य से गांजे की तस्करी कराता है। जो मुनाफा होता था उसका तीस प्रतिशत योगेंद्र ही लेता था

