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ग्वालियर : नाम का सिविल अस्पताल !

नाम का सिविल अस्पताल:मेडिसिन-ईएनटी के डॉक्टर नहीं, ऑर्थोपेडिक सर्जन लेकिन उपकरण नहीं, रोज लौट रहे हैं मरीज

शासन ने जच्चाखाना बिरला नगर को सिविल अस्पताल बिरला नगर का दर्जा तो दे दिया लेकिन यह अस्पताल सिर्फ नाम का ही बनकर रह गया है। सिविल अस्पताल बिरला नगर में शासन मेडिसिन, सर्जन, ईएनटी और डेंटल के डॉक्टर नियुक्त करना ही भूल गया है। यहां ऑर्थोपेडिक सर्जन,नेत्र रोग विशेषज्ञ नियुक्त भी किए हैं तो उनके लिए उपकरण ही नहीं हैं।

सामान्य एक्सरे की जांच तक की सुविधा अस्पताल में नहीं है। इसके चलते ऑर्थोपेडिक सर्जन और नेत्र रोग विशेषज्ञ सिर्फ ओपीडी में ही मरीज का सामान्य इलाज ही कर पा रहे हैं। अगर किसी मरीज का ऑपरेशन करना है तो उसे दूसरे अस्पताल रैफर किया जा रहा है। यह अस्पताल प्रसूतिगृह बनकर ही रह गया है।

इसके चलते गायनिक को छोड़कर अन्य बीमारियों को लेकर आने वाले मरीजों को रोज लौटना पड़ता है। बिरला नगर व आसपास के क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल हजीरा या जेएएच नहीं जाना पड़े। इसी उद्देश्य को लेकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के प्रयासों से जच्चाखाना बिरला नगर का विस्तार करते 100 बिस्तर का नया अस्पताल बनाने के साथ ही इसे सिविल अस्पताल बिरला नगर का दर्जा दिलवा दिया।

इसे शुरू हुए करीब 8 माह से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है लेकिन अब तक यहां सर्जन, मेडिसिन, ईएनटी और डेंटिस्ट की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है।

एक्सरे कराने के लिए डेढ़ किमी दूर जा रहे हैं मरीज

यहां ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एके खरे पदस्थ हैं। उनकी ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 40 मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों को अगर डॉक्टर एक्सरे के लिए कहते हैं तो मरीज को करीब डेढ़ किमी चलकर सिविल अस्पताल हजीरा जाकर एक्सरे कराना पड़ता है। इससे उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है कि जब ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के प्रयासों से यह हॉस्पिटल बना है।

डॉक्टर की नहीं होगी कमी भर्ती प्रक्रिया चल रही है

एक्सरे और सी-ऑर्म मशीन के ऑर्डर हो गए हैं। जल्द ही ये मशीनें अस्पताल में आ जाएंगे। साथ ही डॉक्टरों से डिमांड मांगी है कि उन्हें क्या चाहिए। ये डिमांड भोपाल भेजी जाएगी। भोपाल में विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही विशेषज्ञ भी मिल जाएंगे। इस संबंध में भोपाल मुख्यालय में जानकारी दे दी है। -डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर

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