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ग्वालियर में फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर नौकरी…STF की FIR के बावजूद विभाग ‘मेहरबान’ !

ग्वालियर में फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर नौकरी, STF की FIR के बावजूद विभाग ‘मेहरबान’, फर्जीवाड़े पर कोई नोटिस तक नहीं

ग्वालियर में फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर एसटीएफ द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन विभागीय स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। आधा सैकड़ा से अधिक कर्मचारियों पर FIR होने के बावजूद किसी भी विभाग ने उन्हें नोटिस तक नहीं दिया। विभागों का तर्क है कि अपराध सिद्ध होने और चालान पेश होने से पहले वे कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं हैं।

ग्वालियर में फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर नौकरी, STF की FIR के बावजूद विभाग 'मेहरबान', फर्जीवाड़े पर कोई नोटिस तक नहींग्वालियर में फर्जी दस्तावेज़ों से सरकारी नौकरी। फाइल फोटो
  1. फर्जी प्रमाण-पत्र पर आधा सैकड़ा कर्मियों पर FIR
  2. विभागों ने अब तक कार्रवाई नहीं शुरू की
  3. शिक्षा विभाग और जीआरएमसी कर्मचारी शामिल

ग्वालियर: फर्जी जाति प्रमाण-पत्र और नकली अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले अधिकारी-कर्मचारी अपने-अपने विभागों की मेहरबानी का लाभ उठा रहे हैं। एसटीएफ द्वारा इन कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों ने अब तक न कोई नोटिस जारी किया और न ही कोई विभागीय कार्रवाई शुरू की। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भले ही एफआईआर दर्ज हुई है, लेकिन जब तक अपराध सिद्ध नहीं होता या चालान पेश नहीं किया जाता, तब तक कार्रवाई का आधार नहीं बनता।

हालांकि FIR हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन जिन विभागों में ये कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्होंने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। न तो पूछताछ की गई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई शुरू हुई।

सबसे अधिक मामले शिक्षा विभाग, जीआरएमसी के डॉक्टरों और कुछ पुलिसकर्मियों से जुड़े हैं। ग्वालियर में पदस्थ शिक्षक बाबूलाल राव, सुनीता राव, सीताराम केवट, जवाहर केवट, सरला मांझी, कुसुम मांझी और राजेश केवट पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के माध्यम से नौकरी पाने के आरोप हैं। वहीं डी.एड की फर्जी अंकसूची से नौकरी हासिल करने वालों में गंधर्व सिंह, साहब कुशवाह, बृजेश रोरिया, लोकेंद्र कुशवाह, रविंद सिंह और अर्जुन सिंह शामिल हैं।

इसके अलावा जीआरएमसी के डा. दिनेश मांझी, डा. सीमा बाथम, डा. रजनीश मांझी, डा. विनोद बाथम तथा आयुर्वेदिक कॉलेज की डा. रेखा बाथम पर भी फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी लेने के आरोप हैं। दोनों ही विभागों ने अब तक इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। विभागों का कहना है कि एसटीएफ ने केवल रिकॉर्ड मांगा था, लेकिन इसके बाद कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।

इस मामले में अभी कोई शिकायत हमारे पास नहीं आई है। कोई शिकायत आएगी तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

– डा.मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जीआरएमसी

शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की है। ऐसी अधिकृत जानकारी नहीं आई है। जो रिकार्ड मांगा था, वह उपलब्ध करा दिया गया है। इसलिए अभी कोई कार्रवाई नहीं की है।

– हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी

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पढ़ाई के समय ओबीसी बन छात्रवृत्ति हासिल कर ली, नौकरी के लिए बन गए आदिवासी, MP में 25 अधिकारी-कर्मचारी चिह्नित

MP News: मध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र (Fake caste certificate) पर नौकरी हासिल करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने घोटाले पर घोटाला किया। यह ओबीसी (Other Backward Class) वर्ग से आते हैं। पढ़ाई कर रहे थे तो ओबीसी को मिलने वाली छात्रवृत्ति हासिल कर ली। इससे पढ़ाई करते रहे। जब नौकरी की बारी आई तो आदिवासी बन गए।

 
पढ़ाई के समय ओबीसी बन छात्रवृत्ति हासिल कर ली, नौकरी के लिए बन गए आदिवासी, MP में 25 अधिकारी-कर्मचारी चिह्नितफर्जी जाति प्रमाण-पत्र पर नौकरी हासिल करने वालों की हुई पहचान।
  1. आदिवासियों के हक पर डाका मारा
  2. पढ़ाई के समय खुद को ओबीसी बताया था
  3. ऐसे 25 अधिकारी, कर्मचारी चिह्नित हो चुके हैं
 

ग्वालियर। फर्जी जाति प्रमाण-पत्र (Fake caste certificate) पर नौकरी हासिल करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने घोटाले पर घोटाला किया। यह ओबीसी (Other Backward Class) वर्ग से आते हैं। पढ़ाई कर रहे थे तो ओबीसी को मिलने वाली छात्रवृत्ति हासिल कर ली। इससे पढ़ाई करते रहे। जब नौकरी की बारी आई तो आदिवासी बन गए।

अनुसूचित जनजाति के फर्जी जाति प्रमाण-पत्र पर नौकरी हासिल कर आदिवासियों के हक पर डाका मारा। जो नौकरियां आदिवासी वर्ग के नागरिकों को मिलनी थीं, उन्हें फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिये इन लोगों ने हासिल कर लिया। ऐसे 25 अधिकारी, कर्मचारी चिह्नित हो चुके हैं। जिन पर एसटीएफ द्वारा एफआइआर की गई है।

पढ़ाई के समय खुद को ओबीसी बताया थाऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की जब पड़ताल की गई तो सामने आया कि पढ़ाई के समय इन्होंने खुद को ओबीसी ही बताया था। जाति प्रमाण-पत्र में भी ओबीसी ही लिखा है। इस आधार पर छात्रवृत्ति हासिल की। 25 अधिकारी-कर्मचारियों के अलावा आठ ऐसे और लोग एसटीएफ के रडार पर हैं, जिन्होंने सत्यापन में इनका साथ दिया। अब इनके नाम एफआइआर में शामिल किए जाएंगे।

फर्जीवाड़ा करने वाले यह अधिकारी, कर्मचारी और इनके विभाग

  • डॉ. दिनेश माझी, जीआरएमसी ग्वालियर।
  • डॉ. सीमा बाथम, जीआरएमसी ग्वालियर।
  • डॉ. रजनीश माझी, जीआरएमसी ग्वालियर।
  • डॉ. विनोद बाथम, जीआरएमसी ग्वालियर।
  • डॉ. रेखा बाथम, आयुर्वेदिक कॉलेज आम खो।
  • डॉ. महेंद्र बाथम, फार्मासिस्ट जिला शिवपुरी।
  • शिक्षक जवाहर सिंह केवट।
  • शिक्षक सीताराम केवट।
  • शिक्षक सरला माझी।
  • शिक्षक कुसुम मांझी।
  • शिक्षक राजेश केवट।
  • शिक्षक बाबूलाल रावत।
  • शिक्षक सुनीता रावत।
  • आरक्षक हेमंत बाथम, साइबर सेल ग्वालियर।
  • गीतिका बाथम, एसआइ पुलिस मुख्यालय भोपाल।
  • लोकेंद्र बाथम, 25वीं बटालियन, भोपाल।
  • आरक्षक महेश बाथम, शिवपुरी।
  • आरक्षक नाहर सिंह, शिवपुरी।
  • सूबेदार अनिल बाथम, यातायात पुलिस, श्योपुर।
  • भागीरथी माझी, स्टेनो, गुना।
  • अनुपम मांझी, स्टेनो, गुना।
  • देवीलाल ढीमर, स्टेनो, राजगढ़।
  • शिक्षक दशरथ रावत, गुना।
  • मनीष गौतम, महाप्रबंधक बिजली कंपनी, जिला बैतूल।
  • हाकिम बाथम, जेई, बिजली कंपनी, होशंगाबाद।
  • यश कुमार सिंह, संयुक्त संचालक उद्यान विभाग, दमोह।
  • सालों से कर रहे नौकरी

यह लोग सालों से सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे हैं। इन पर एफआइआर भी हो गई, लेकिन अब तक विभाग द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से लेकर सत्यापन कराने वाला नेटवर्क इस घोटाले में शामिल है।

डीएड की फर्जी अंकसूची लगाकर नौकरी हासिल करने वाले 16 नाम और बढ़ेइधर…. एसटीएफ द्वारा डीएड की फर्जी अंकसूची पर नौकरी हासिल करने वालों पर एफआइआर दर्ज की थी। एफआइआर में आठ नामजद थे। बाकी सभी अज्ञात में थे। इसमें 16 शिक्षकों को और नामजद कर लिया गया है।

जिन लोगों ने खुद को आदिवासी बताकर नौकरी हासिल की। इन्होंने पढ़ाई के समय खुद को ओबीसी बताया था। ओबीसी का जातिप्रमाण पत्र बना और छात्रवृत्ति भी हासिल की। इसमें उन लोगों के भी नाम बढ़ाए जा रहे हैं, जो सत्यापन में शामिल हैं।

-राजेश सिंह भदौरिया एसपी, एसटीएफ।

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D.Ed की फर्जी मार्कशीट से बने शिक्षक, STF ने 34 पर दर्ज की FIR, सालों से कर रहे थे नौकरी

डीएड (D.Ed) की फर्जी अंकसूची (Marksheet) के जरिए सरकारी शिक्षक बने 34 लोगों पर एसटीएफ(STF) ने एफआइआर(FIR) दर्ज की है। फर्जीवाड़ा करने वाले यह सभी शिक्षक ग्वालियर और चंबल अंचल के रहने वाले हैं।D.Ed की फर्जी मार्कशीट से बने शिक्षक, STF ने 34 पर दर्ज की FIR, सालों से कर रहे थे नौकरीडीएड की फर्जी अंकसूची के जरिए सरकारी शिक्षक बने 34 लोगों पर एसटीएफ ने एफआइआर दर्ज की।

  1. ग्वालियर, भिंड, मुरैना, इंदौर व अन्य जिलों में कर रहे हैं नौकरी।
  2. 34 में से आठ शिक्षक नामजद, 26 के दस्तावेजों की हो रही जांच।
  3. शिक्षा विभाग के पास नहीं है इनका रिकार्ड

ग्वालियर: डीएड (D.Ed) की फर्जी अंकसूची (Marksheet) के जरिए सरकारी शिक्षक बने 34 लोगों पर एसटीएफ(STF) ने एफआइआर(FIR) दर्ज की है। फर्जीवाड़ा करने वाले यह सभी शिक्षक ग्वालियर और चंबल अंचल के रहने वाले हैं। यह नौकरी ग्वालियर, भिंड, मुरैना, इंदौर व अन्य जिलों में कर रहे हैं।

34 में से आठ शिक्षक नामजद34 में से आठ शिक्षक नामजद हैं, जबकि 26 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच चल रही है। इनकी अंकसूचियां संदिग्ध हैं, क्योंकि इनका रिकार्ड शिक्षा विभाग के पास नहीं है। एसटीएफ मुख्यालय के निर्देश पर एसपी राजेश सिंह भदौरिया द्वारा डीएसपी एसटीएफ प्रवीण सिंह बघेल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित की गई थी।

34 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की गई। इनकी अंकसूची फर्जी पाई गई। इस आधार पर आठ नामजद सहित 34 शिक्षकों पर एफआइआर दर्ज की गई है। एसटीएफ द्वारा धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई है।

यह शिक्षक नामजद हैंगंधर्व सिंह पुत्र संतोष सिंह रावत

साहब पुत्र खेमराज कुशवाह

बृजेश पुत्र भान सिंह रोरिया

महेंद्र पुत्र लक्ष्मण सिंह रावत

लोकेंद्र पुत्र जगन्नाथ सिंह

रूबी पुत्री शिवकुमार कुशवाह

रविंद्र पुत्र उदयभान सिंह

अर्जुन सिंह पुत्र बुलाखी सिंह चौहान

अंकसूची फर्जी बनाने से लेकर सत्यापन तक में फर्जीवाड़ामामले की जांच कर रही टीम ने पाया कि सिर्फ अंकसूची ही फर्जी नहीं हैं, बल्कि नियुक्ति होने से पूर्व किए जाने वाले सत्यापन तक में फर्जीवाड़ा हुआ है। इसमें वह लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने सत्यापन किया। अगर सही ढंग से सत्यापन होता तो यह फर्जीवाड़ा उस समय ही पकड़ा जाता, जब नियुक्ति हुई थी। सत्यापन में भी साठगांठ हुई।

फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से भी नौकरी पाने वालेफर्जी डीएड अंकसूची से पहले फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से शिक्षक बनने वाले लोग भी ग्वालियर-चंबल अंचल के जिलों के ही थे। इस मामले में भी एसटीएफ द्वारा एफआइआर दर्ज की गई थी। उस समय भी करीब 26 शिक्षकों पर एफआइआर दर्ज की गई थी।

जांच में अंकसूची के नाम, पते सब अलग निकलेजिन सीरियल व रोल नंबर की अंकसूची का उपयोग इन लोगों द्वारा किया गया था। माध्यमिक शिक्षा मंडल से इन नंबरों के आधार पर सत्यापन कराया गया। इसमें पाया गया कि नाम, पते सब अलग हैं। यह अंकसूची अन्य लोगों को जारी हुईं।

डीएड की फर्जी अंकसूची से शिक्षक बनने वाले शिक्षकों पर एफआइआर दर्ज की गई है। इस पूरे गैंग को पकड़ा जाएगा। इस गैंग द्वारा न सिर्फ अंकसूची फर्जी ढंग से बनाई गई, बल्कि सत्यापन में भी फर्जीवाड़ा हुआ है।

-राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीए

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नकली कागज पर असली नौकरी… ग्वालियर बना फर्जी सर्टिफिकेट बनाने की फैक्ट्री

ग्वालियर चंबल अंचल में बनाए गए फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर मध्य प्रदेश में कई लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की. मामले की शिकायत हुई तो MP में 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई. ग्वालियर अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल में डॉ. दिनेश मांझी, डॉ विनोद मांझी, इंजीनियर रजनीश और एक महिला डॉक्टर पर भी केस दर्ज किया गया है.

नकली कागज पर असली नौकरी... ग्वालियर बना फर्जी सर्टिफिकेट बनाने की फैक्ट्री
 Aug 22, 2025 

मध्य प्रदेश का ग्वालियर चंबल अंचल फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का बड़ा हब बनता जा रहा है. ग्वालियर में अभी तक फर्जी दिव्यांग्यता प्रमाण पत्र, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, फर्जी जाति प्रमाणपत्र, फर्जी अनुकंपा प्रमाण पत्र बनाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं. कुछ मामलों में FIR जरूर हुई है, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने के कारण फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वालों के हौसले अब भी बुलंद नजर आ रहे हैं.

मध्य प्रदेश के कई विभागों में लोग फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरियां कर रहे हैं. खास बात ये है कि जिन फर्जी प्रमाण पत्रों का उपयोग नौकरी पाने में किया गया था, उनमें अधिकांश फर्जी प्रमाण पत्र ग्वालियर चंबल अंचल में ही बनाए गए हैं.

फर्जी जाति प्रमाणपत्र

ग्वालियर चंबल अंचल में बनाए गए फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर मध्य प्रदेश में कई लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की. मामले की शिकायत हुई तो MP में 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई. ग्वालियर अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल में डॉ. दिनेश मांझी, डॉ विनोद मांझी, इंजीनियर रजनीश और एक महिला डॉक्टर पर भी केस दर्ज किया गया है. फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में 50 और लोगों के नाम भी सामने आए हैं.

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र

ग्वालियर चंबल संभाग में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना में बड़ा खुलासा हुआ. जहां जीवित लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर लगभग 20 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया. मामले में EOW ने 14 लोगों पर FIR दर्ज की है. EOW की जांच में इरशाद खान, नसीमा खान, नदीम खान, सिमरन, सुनीता बाई, कल्याण माहौर कृष्णा शंखबार, अरुण कुशवाह, राजा बेटी, औतार और सीमा बाई जीवित निकले.

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फर्जी दिव्यांग्यता प्रमाण पत्र

फर्जी दिव्यांग्यता सर्टिफिकेट के आधार पर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसर की नौकरी हासिल की गई. 123 असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रमाणपत्र फर्जी होने के चलते जांच के दायरे में आए. इनमे अधिकांश सर्टिफिकेट ग्वालियर चंबल से जारी हुए थे. MP में शिक्षक भर्ती में दिव्यांग्यता सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी पाने वाले 184 में से 66 सर्टिफिकेट फर्जी निकले. ग्वालियर में मूल निवासी दस्तावेज बनाने में भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है.

20 हजार में बनते फर्जी प्रमाण पत्र

ग्वालियर चंबल अंचल में लगातार इस तरह के फर्जी प्रमाण पत्रों की जानकारी जुटाने वाले, खासकर दिव्यांग लोगों और उनके अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करने वाले अनूप जौहरी का कहना है कि 15 से 20 हजार रुपए में ग्वालियर चंबल अंचल में फर्जी प्रमाण पत्र आसानी से बन जाते हैं. संबंधित विभागों में मिली भगत कर यह पूरा खेल चल रहा है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि किसी बड़ी जांच एजेंसी से इस पूरे फर्जीबाड़े की पड़ताल कराए और बड़े दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें.

किसी ठोस कार्रवाई की है जरूरत

इस तरह के फर्जीवाड़े पर वरिष्ठ पत्रकार महेश शिवहरे का कहना है कि ग्वालियर चंबल अंचल में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है. विभागों और लोगों के बीच दलालों का एक बड़ा समूह काम कर रहा है, उन्हीं के माध्यम से साठगांठ कर संबंधित विभाग से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए जाते हैं. कई मामलोंकेभी खुलासे हुए, जांच हुई कुछ गिरफ्तारियां भी हुई लेकिन बड़े जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी कार्रवाई में बच निकलते हैं. ऐसे में फर्जी दस्तावेजों को बनने से रोकने के लिए जिम्मेदारों पर एक बड़ी और ठोस कार्यवाही करने की जरूरत है.

फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए हासिल की नौकरी

बहरहाल ग्वालियर चंबल अंचल से बने फर्जी प्रमाण पत्रों के कई बार पहले भी मामले सामने आते रहे हैं. यहीं से बने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर कई लोग अलग-अलग विभागों में नौकरियां भी कर रहे हैं, ऐसे में अब एसटीएफ मध्य प्रदेश में कई विभागों के फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे लोगों पर शिकंजा कस रही है. एसटीएफ जब अपनी जांच का दायरा बढ़ाएगा, तो फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे और भी लोगों का खुलासा होगा.

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