ग्वालियर में खुद ‘बीमार’ पड़ा संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक !!!
ग्वालियर में खुद ‘बीमार’ पड़ा संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक; जर्जर छत से गिर रहा प्लास्टर, इंफेक्शन का बढ़ा खतरा
संभाग के सबसे बड़े जया आरोग्य चिकित्सालय का ब्लड बैंक इन दिनों खुद ही बीमार नजर आ रहा है। ब्लड बैंक में हाईजीन के इंतजाम तय मानकों से कोसों दूर हैं, जिससे यहां रखे रक्त में संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि गुरुवार को काम के दौरान छत का प्लास्टर गिर गया, जिसमें एक कर्मचारी बाल-बाल बचा।
ग्वालियर। संभाग के सबसे बड़े जया आरोग्य चिकित्सालय का ब्लड बैंक इन दिनों खुद ही बीमार नजर आ रहा है। ब्लड बैंक में हाईजीन के इंतजाम तय मानकों से कोसों दूर हैं, जिससे यहां रखे रक्त में संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि गुरुवार को काम के दौरान छत का प्लास्टर गिर गया, जिसमें एक कर्मचारी बाल-बाल बचा। इस घटना के बाद से स्टाफ में दहशत का माहौल है।
सख्त मेडिकल प्रोटोकॉल और स्वच्छता अनिवार्य
ब्लड बैंक जैसी संवेदनशील जगह के लिए सख्त मेडिकल प्रोटोकॉल और स्वच्छता अनिवार्य होती है, लेकिन यहां की दीवारों पर सीलन और गिरता प्लास्टर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। मानकों के मुताबिक ब्लड बैंक पूरी तरह संक्रमण मुक्त होना चाहिए, परंतु वर्तमान स्थिति में यहां नमी का साम्राज्य है। संक्रमण के खतरे के कारण न केवल मरीजों को दिए जाने वाले रक्त की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि यहां काम करने वाले टेक्नीशियन और कर्मचारी भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
लाइसेंस रिन्यूअल में अड़ंगा
ब्लड बैंक के संचालन के लिए अनिवार्य लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए प्रबंधन आवेदन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। आशंका है कि यदि ड्रग विभाग की टीम निरीक्षण के लिए आई, तो जर्जर भवन और स्वच्छता की कमियों के चलते लाइसेंस रद हो सकता है। जब तक बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं होता, तब तक मानकों को पूरा करना संभव नहीं दिख रहा है।
शिफ्टिंग की आस में अटका सुधार कार्य
अस्पताल प्रशासन इस भवन की मरम्मत में रुचि नहीं दिखा रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि ब्लड बैंक को जल्द ही कैंसर यूनिट के खाली हुए पुराने भवन में शिफ्ट किया जाना है। हालांकि यह शिफ्टिंग लंबे समय से फाइलों में अटकी हुई है। नए भवन को ब्लड बैंक की जरूरतों और गाइडलाइंस के अनुरूप तैयार करने के लिए सिविल वर्क किया जाना है, जिसके कारण प्रक्रिया धीमी चल रही है।
प्रशासन का दावा- बजट स्वीकृत, जल्द शुरू होगा काम
गुरुवार की घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया है। अस्पताल अधीक्षक डा. सुधीर सक्सेना का कहना है कि नए भवन में जरूरी बदलाव और शिफ्टिंग के लिए आवश्यक बजट की स्वीकृति मिल चुकी है। संबंधित विभाग को जल्द से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ब्लड बैंक को सुरक्षित वातावरण में स्थानांतरित किया जा सके।


ग्वालियर में खुद ‘बीमार’ पड़ा संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक