भोपाल-इंदौर के आईटी पार्क की 13.57 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण !
विधानसभा में गुरुवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मप्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में प्रदेश के आईटी पार्कों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ।
ऑडिट में सामने आया कि कई आईटी फर्मों ने एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) से सब्सिडी ली, लेकिन शर्तों का पालन नहीं किया। कुछ फर्मों की जमीन पर नर्सिंग कॉलेज चल रहा था। भोपाल और इंदौर में आईटी पार्कों के लिए आवंटित 63 एकड़ जमीन में से 13.57 एकड़ पर अतिक्रमण मिला, जिसे विकसित करने पर 3.62 करोड़ रुपए खर्च हुए।
प्रदेश में 31 मार्च 2023 तक 73 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में से 15 बीते 33 साल से बंद हैं। 21 पूरी तरह निष्क्रिय। सिर्फ 32 चालू उपक्रमों की रिपोर्ट पेश की गई।
ये गड़बड़ियां मिली
- आईटी पार्कों का दीर्घकालिक योजना नहीं बनी। 240 भूखंडों में से सिर्फ 26 ने कमर्शियल उत्पादन शुरू किया। मार्च 2023 तक केवल 4% रोजगार दिए गए। 14,548 को रोजगार देने का लक्ष्य था, लेकिन सिर्फ 576 को काम मिला।
- 2013–2023 में आईटी पार्कों पर 328 करोड़ खर्च हुए। 29.27 करोड़ निवेश बेकार।
- नवंबर 2020 से ऑनलाइन भूखंड आवंटन नहीं, ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति जारी।
- विकास शुल्कों को 2013 के बाद संशोधित नहीं किया गया, 42.86 करोड़ की वसूली हुई जबकि खर्चा 228.10 करोड़।
- स्किल गैप स्कीम में 12 फर्मों को 1.55 करोड़ दिए, लेकिन प्रशिक्षण कैलेंडर जमा नहीं किए गए। पांच फर्मों ने 20 से अधिक कर्मचारियों की प्रतिपूर्ति मांगी, लेकिन कोई भी ईपीएफओ में रजिस्टर्ड नहीं था।
डेटा प्रोसेसिंग व प्रशिक्षण के लिए जमीन आवंटित, वहां मिला नर्सिंग कॉलेज
परिसर में 300 के बैठने की क्षमता, ट्रेनिंग 935 को दे दी… मेसर्स स्टार इंडिया रिसर्च, जिसे सेबी ने नवंबर 2015 में ब्लैकलिस्ट किया था। उसे मप्र में 31 दिसंबर 2015 से 12 अप्रैल 2018 के बीच 935 युवाओं के प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया और 93.50 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। ऑडिट में पाया गया कि फर्म के परिसर में 300 लोगों के बैठने की क्षमता थी, फिर भी उसे तीन गुना अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का कार्य सौंप दिया गया।
एलईडी और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन का सिर्फ दावा, मिले बल्बों के कलपुर्जे…
मेसर्स ग्रीन सर्फर, भोपाल को मई 2018 में एलईडी लाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन के लिए दो एकड़ जमीन दी गई। जून 2023 के ऑडिट में पाया गया कि उत्पादन नहीं हो रहा था, मौके पर सिर्फ बल्बों के कलपुर्जे मिले। इसे 165.40 लाख रुपए की सब्सिडी दी गई। इसी तरह मैसर्स अदिति इलेक्ट्रिकल्स, एक्वा साल्यूशन, सरोवा पंप और स्नेह कृषि केंद्र में भी गड़बड़ी मिली।
सोलर पैनल निर्माण के लिए जमीन मिली, लेकिन मशीन एक भी नहीं… मैसर्स साईं ग्राफिक्स, जबलपुर को जून 2017 में आईटी पार्क में जमीन दी गई थी। पट्टा अनुबंध के अनुसार प्रशिक्षण व डेटा प्रोसेसिंग सेंटर लाना था। लेकिन यहां बेसमेंट में स्मिता कॉलेज ऑफ नर्सिंग मिला। इसे 53.36 लाख रु. की सब्सिडी दी गई। मेसर्स सैफरान सोलर सिस्टम, जबलपुर को पीवी सोलर पैनल निर्माण के लिए जमीन मिली, लेकिन मौके पर कोई मशीन नहीं मिली। कंपनी को 60.73 लाख की सब्सिडी दी गई।

