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DGCA की नई गाइडलाइन, प्रबंधन या पायलट… IndiGo Crisis के लिए कौन जिम्मेदार?

DGCA की नई गाइडलाइन, प्रबंधन या पायलट… IndiGo Crisis के लिए कौन जिम्मेदार? कैप्टन सेवियो फर्नांडिस ने बताया

इंडिगो की लगातार उड़ानें रद्द होने और लेट होने से यात्रियों को भारी परेशानी हुई है. यह संकट डीजीसीए के नए नियमों और पायलटों की कमी से जुड़ा बताया जा रहा है. इस बारे में टीवी9 भारतवर्ष ने कैप्टन सेवियो फर्नांडिस से बातचीत की. उन्होंने बताया कि इंडिगो के पास पर्याप्त पायलट और स्टाफ हैं, लेकिन परिचालन संबंधी खामियां और नियोजन में कमी मुख्य कारण हो सकती है.

DGCA की नई गाइडलाइन, प्रबंधन या पायलट... IndiGo Crisis के लिए कौन जिम्मेदार? कैप्टन सेवियो फर्नांडिस ने बताया

इंडिगो संकट और एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़.

इंडिगो की सभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स कैंसिल होने और लेट होने का सिलसिला शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रहा. इस वजह से सुबह से हजारों पैसेंजर्स परेशान रहें और एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी मची रही, हालांकि शुक्रवार को, एयरलाइन ने इस बड़ी मुश्किल के लिए माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि सभी कैंसिल फ्लाइट्स का पैसा रिफंड कर दिया जाएगा.

400 से ज्यादा एयरक्राफ्ट के फ्लीट के साथ रोजाना 2,300 फ्लाइट्स ऑपरेट करने वाली इंडिगो की पंक्चुएलिटी में भारी गिरावट आई है, क्योंकि ऑपरेशनल रुकावटों के कई और दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है.

टीवी9 भारतवर्ष ने इंडिगो महासंकट को लेकर कैप्टन सेवियो फर्नांडिस से बातचीत की. यह जानने की कोशिश की कि इंडिगो एयरलाइन का ये जो क्राइसिस हुआ है, इसके पीछे क्या कारण हैं? क्या इस क्राइसिस के लिए पायलेट जिम्मेदार है? या DGCA की नई FDTL गाइडलाइन इसके लिए जिम्मेदार है? अगर इंडिगो एयरलाइन को डीजीसीए ने पहले ही नए नियम की जानकारी दे दी थी तो इतनी बड़ी समस्या कैसे हुई?

बता दें कि कैप्टन सेवियो फर्नांडिस बोइंग 777 सहित सभी हवाई जहाज उड़ाए हैं. ये सर्विंग पायलट हैं. इनकी उम्र 52 और 13 साल की सर्विस बाकी है. ये 25 साल से फ्लाइट उड़ा रहे हैं.

IndiGo में Crisis की ये है वजह

कैप्टन सेवियो फर्नांडिस ने बताया कि इंडिगो इतनी बड़ी एयरलाइन है. मार्केट का 63 प्रतिशत शेयर इंडिगो के पास है. 20 साल से इंडिगो ऑपरेशन में है. इन्हीं 5 हजार पायलट ने 20 साल से इंडिगो को चलाया है तो अब ये क्यों चाहेगे कि इंडिगो का नाम खराब हो. उन्होंने कहा कि पहले 2000 से ज्यादा उड़ानों का ऑन टाइम परफॉमेंस 95 प्रतिशत था. अब जो सिट्यूएशन है. इसमे 1 हजार फ्लाइट्स उड़ रही हैं तो ओटीपी 10 परसेंट कैसे हो गई? ये मिनिमम 50 प्रतिशत होना चाहिए था. ये सबसे बड़ा सवाल है.

उन्होंने कहा कि इसमें डीजीसीए की कोई गलती नहीं है. डीजीसीए ने अपना नियम बनाया, जो 8 महीने पहले बता दिया था. डीजीसीए परमिशन देने के पहले पूछता है कि आपके पास पायलट हैं?और हां बोलने के बाद ही विंटर सीजन में 1000 अतिरिक्त उड़ानों की मंजूरी दी तो आज ये स्थिति क्यों आई?

DGCA के नये नियम से क्या पैदा हुई समस्या?

दूसरी ओर, पायलट एसोसिएशन से पूछा गया कि DGCA के नियमों के अनुसार फ्लाइट का टर्न अराउंड टाइम कम से कम कितना होना चाहिए, उन्होंने बताया कि यह 40 मिनट होना चाहिए.

यह पूछने पर कि DGCA का क्या कोई ऐसा नियम है कि एक एयरलाइंस के पास प्रति फ्लाइट कितने पायलट होने चाहिए? इंडिगो के पास कितने हैं? उन्होंने बताया कि एक फ्लाइट पर 5.5 से 6 तक पायलट का सेट होना चाहिए . ये डीजीसीए का नियम है.

यह सवाल कि इंडिगो जितनी उड़ान भरता है? क्या उसके पास पर्याप्त पायलट और स्टाफ हैं? क्या कुछ मानक है DGCA का, इस सवाल के जवाब में उन्होंने् बताया कि इंडिगो के पास 5400 पायलट और 10 हजार केबिन क्रू हैं. डीजीसीए के नियम के अनुसार इंडिगो सभी मानक पूरा करता है.

 

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