उत्तर प्रदेशलखनऊ

वो 6000 वर्गफीट का प्लॉट, जिसके लिए अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार !

वो 6000 वर्गफीट का प्लॉट, जिसके लिए अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार
नाम बदला, एक ईंट नहीं रखी; देवरिया में शराब कारोबारी को ट्रांसफर किया

……. की टीम मौके पर पहुंची। वह प्लॉट देखा, जिसके मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया गया है। अभी प्लॉट पर क्या बना है? कितने रुपए में लिया गया था? कागजों में क्या हेराफेरी हुई? इस मामले में अमिताभ ठाकुर को क्या सजा हो सकती है? 

देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में 26 साल पहले यही प्लॉट पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी को अलॉट हुआ था।
देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में 26 साल पहले यही प्लॉट पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी को अलॉट हुआ था।

6 हजार स्क्वायर फीट का यह प्लॉट देवरिया शहर से लगे औद्योगिक क्षेत्र में है। यह B-2 श्रेणी का है। यहां कोई उद्योग नहीं लगा है। अभी यहां पर श्रीनेत शांडिल्य कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस है। कुछ हिस्सों में लोहे के बीम बनाने का काम होता है। यह दफ्तर संजय प्रताप सिंह का है। संजय देवरिया के शराब और कंस्ट्रक्शन के बड़े कारोबारियों में शामिल हैं।

जब हम वहां पहुंचे, तो हमें अंदर जाने से रोक दिया गया। वहां सुरक्षा में तैनात गार्ड ने कारोबारी संजय प्रताप सिंह से बात कराई। उन्होंने कहा कि यह प्लॉट हमने उद्योग विभाग से लिया है। कोई विवाद नहीं है।

6 हजार स्क्वायर फीट एरिया के इस प्लाट पर कंस्ट्रक्शन का ऑफिस है।
6 हजार स्क्वायर फीट एरिया के इस प्लाट पर कंस्ट्रक्शन का ऑफिस है।

एसपी रहते अलॉट हुआ था प्लॉट

औद्योगिक क्षेत्र में ये प्लॉट 1999 में अलॉट हो रहे थे। उस समय अमिताभ ठाकुर देवरिया के एसपी थे। प्लॉट उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर अलॉट हुआ था। इसके बदले 3 लाख रुपए चुकाए गए थे। 99 साल की लीज थी। 3 साल तक ऐसे ही पड़ा रहा। फिर यह संजय प्रताप सिंह को ट्रांसफर हो गया।

गड़बड़ी कहां हुई?

प्लॉट अलॉटमेंट में फर्जी दस्तावेज और झूठे नाम-पते का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस के मुताबिक, नूतन ठाकुर ने कागजों में अपना नाम नूतन देवी बताया। ,वहीं पति के रूप में अमिताभ का नाम कुछ जगहों पर अभिजात और अभिताप ठाकुर लिखा है। पता- ग्राम खैरा, जिला सीतामढ़ी, बिहार के नाम दिया गया है। जो आवेदन पत्र, शपथ पत्र, ट्रेजरी चालान और ट्रांसफर डीड तैयार कराए गए हैं, उसमें ये नाम-पते हैं।

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को मेडिकल कराने के बाद जबरदस्ती गाड़ी में बैठाती पुलिस।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को मेडिकल कराने के बाद जबरदस्ती गाड़ी में बैठाती पुलिस।

3 महीने पहले एफआईआर हुई

लखनऊ के तालकटोरा में रहने वाले संजय शर्मा ने 3 महीने पहले इसकी शिकायत की थी। इसमें कहा था- नूतन ठाकुर ने फर्जी दस्तावेज में अपना नाम नूतन देवी और पति अमिताभ ठाकुर के नाम की जगह अभिजात ठाकुर/अभिताप ठाकुर लिखवाया। पता ग्राम खैरा, जिला सीतामढ़ी, बिहार लिखवाया। इसके आधार पर शपथपत्र, बैंक के कागज और ट्रांसफर डीड जैसे दस्तावेज बनवाकर विभागों को गुमराह किया।

इस मामले में 3 महीने पहले लखनऊ में अमिताभ के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। जांच के लिए लखनऊ पुलिस ने SIT बनाई। पुलिस के मुताबिक, SIT ने देवरिया और बिहार में रिकॉर्ड की जांच की। गवाहों से पूछताछ और दस्तावेजों की पुष्टि की। केस को देवरिया ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को आरोपी बनाया गया है। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया गया।

क्या हो सकती सजा

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र बताते हैं-

  • धारा 120बी आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी है। इसके तहत दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी अवैध कार्य की योजना बनाने पर सजा का प्रावधान है।
  • धारा- 34 उन परिस्थितियों में लागू होती है, जब एक से अधिक लोग मिलकर एक ही इरादे से कोई अपराध करते हैं।
  • जाली दस्तावेज के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में धारा- 471 लागू होती है। इसमें किसी नकली दस्तावेज को असली बताकर उपयोग करने पर वही सजा दी जाती है, जो असली जालसाज को मिलती है।
  • धारा- 468 धोखाधड़ी के उद्देश्य से की गई जालसाजी पर कठोर दंड निर्धारित करती है। 7 साज की सजा हो सकती है।
  • दस्तावेजों की जालसाजी से संबंधित धारा 467 सबसे गंभीर मानी जाती है। इसमें किसी को धोखा देने के इरादे से महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाना या उनका दुरुपयोग करना शामिल है। इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
  • धारा- 419 प्रतिरूपण द्वारा छल और धारा- 420 छल-कपट से धोखाधड़ी पर लागू होती है। इसमें 7 साल तक की सजा हो सकती है।

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