बांधों की नहीं बढ़ा पाए क्षमता…ग्वालियर में सदी की सबसे ज्यादा बारिश !!!
इस बार बारिश के सीजन में 100 साल के सारे रिकाॅर्ड ध्वस्त हो गए। क्योंकि शहर में औसत बारिश का कोटा 30 इंच है, जबकि पानी 61 इंच बरसा। जिले के सभी बांध लबालब हैं, फिर भी पानी की किल्लत है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी बांधों का पानी बचाने सर्दियों में एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि फिलहाल जिला प्रशासन ने रोक दिया है। शहर से सटे 7 बांधों सहित आसपास 12 बांध हैं, पर पानी का प्रबंधन ठीक नहीं है। इनमें 2 बांध आजादी के बाद बने हैं, शेष सभी एक सदी से ज्यादा पुराने हैं। पिछले 50 सालों में हम इन बांधों की क्षमता भी नहीं बढ़ा पाए हैं।
हर बार बहाना- बारिश कम, अब ज्यादा हुई तो पानी सहेजा नहीं
पिछले डेढ़ दशक से शहर के लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस अवधि में हर साल बारिश कम होने की बात कहकर एक दिन छोड़कर सप्लाई शुरू कर दी जाती है। वर्ष 2008 और वर्ष 2017-18 में ककेटो और पेहसारी बांधों से पानी लाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च भी किए गए। इस वर्ष औसत कोटे से दो गुना बारिश हुई तो अफसर बारिश के पानी को सहेज नहीं पाए, क्योंकि अब तक ऐसी कोई प्लानिंग ही नहीं की गई।
अफसरों-दबंगों का गठजोड़- बांधों से पानी निकाल, करते हैं खेती
ग्वालियर शहर के आसपास सटे इन बांधों में बारिश का पानी भर भी जाए तो क्षेत्र के दबंग लोग पानी निकाल देते हैं। इसके बाद बांधों की जमीन पर ही खेती कर रहे हैं। बदले में जल संसाधन विभाग के अफसर अपने हाथ बचाने के लिए इनसे बतौर जुर्माना नाम मात्र की रकम वसूल कर लेता है। खास बात यह है कि गर्मियों में पानी की किल्लत के बाद इतना ही पानी ऊपरी बांधों से लाने के लिए दस करोड़ रुपए तक की राशि खर्च की जाती है।
अफसर नए बांध नहीं बना पा रहे तो पानी सहेजने की प्लानिंग करें
मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन के कारण बारिश की स्थिति अलग-अलग रहेगी। हम पेयजल सप्लाई के लिए हर साल सिर्फ बारिश के भरोसे नहीं बैठ सकते। हमें हर साल बारिश का पानी सहेजना होगा, ताकि अल्प वृष्टि हुई तो उस समय में भी हम लोगों को पर्याप्त पानी दे सकें।
इसके लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को बैठकर प्लानिंग करना होगी कि हम यदि नए बांध नहीं बना पा रहे हैं तो बारिश के पानी को कैसे सहेजें। जल संसाधन विभाग के अधिकारी अभी सिर्फ बड़े बांधों के भरोसे रहते हैं। उन्हें इनके विकल्प भी तलाशने होंगे।

