ग्वालियर : सड़कों पर धूल और बैजाताल में हरा पानी, सुधारें हालात !!

शहर के हालात दिनों-दिन बेहाल होते जा रहे है। हालात ऐसे हैं कि नगर निगम वाहन पर वाहन उड़ती धूल थामने के लिए खरीदता जा रहा है। नतीजा-सड़कों पर जमा धूल उड़ रही है। सरकारी हो या फिर निजी मकानों के निर्माण के समय ग्रीन नेट तक नहीं डाले जा रहे हैं। बैैजाताल का पानी पूरी तरह हरा हो चुका है।
सफाई व्यवस्था की बात करें तो दोपहर तक कचरा बाजारों से नहीं उठ रहा है। ये स्थिति शहर में गुरुवार को दिखाई दी।ये हालात तब हैं, जब 12 दिन पहले शहर में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक्सपर्ट एसके चतुर्वेदी आए थे। उन्हें शहर के अंदर इस तरह की खामियां मिली थी।
उनकी रिपोर्ट के बाद हाल में एक्सपर्ट द्वारा दिए निर्देश पर कार्रवाई करने के लिए नगर निगम को लिखा गया है। आयुक्त ने भी तीन दिन पहले उक्त पत्र के बाद जिम्मेदारों को जिम्मेदारी दी। तब भी स्थिति में सुधार नजर नहीं आया।
निगमायुक्त संघ प्रिय के अननसार एनजीटी के निर्देश की समीक्षा कर करेंगे कार्रवाई एनजीटी ने पत्र में जो निर्देश दिए हैं। उनकी समीक्षा कर सुधार कार्य करेंगे। वहीं विंटर एक्शन प्लान बनाया है। उस पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में एक्यूआई सुधार हुआ है। वह पुअर से मॉडरेट पर आ गया है।
- डस्ट फ्री रोड: निगम ने जिस ठेकेदार को डस्ट फ्री रोड बनाने के लिए जिम्मेदारी दी है। ठेकेदार ने एजी पुल के बगल की ब्रांच रोड पर काम करने के बाद एक महीने से मिट्टी के ढेर लगाकर छोड़ दिए।
- धूल ही धूल: शहर के अंदर जहां-जहां पर डिवाइडर है। वहां से धूल को रोड स्वीपिंग मशीन साफ नहीं कर रही है। ऐसे हालात जयेंद्रगंज रोड, विक्की फैक्ट्री चौराहा से सिथौली रोड, विक्की फैक्ट्री चौराहा से चार शहर का नाका चौराहा, एजी आफिस पुल के ऊपर और दोनों तरफ आदि कई स्थान शामिल है। ऐसी सड़कों के लिए एक्सपर्ट ने रोज छिड़काव करने की सलाह दी है।
- बैजाताल :यहां टीम को बैजाताल का पानी हरे रंग का मिला था। उन्होंने इस जल को स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं बताया है। वर्तमान में भी ऐसे ही हालात बने हुए है। पानी का अभी भी हरा बना हुआ है।
- ग्रीन नेट: एनजीटी के एक्सपर्ट को बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के दौरान ग्रीन नेट नहीं मिली थी। ऐसी स्थिति शहर के अंदर कई जगह देखने को मिल जाती है।
- साफ-सफाई: शहर में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं मिली थी। इस पर नाराजगी जताई थी। फिर भी शहर के हालात नहीं सुधरे।
4 रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदीं, एक वाटर फोगर गिफ्ट में मिला फिर भी सुधार नहीं
निगम के पास 8 रोड स्वीपिंग मशीन और 8 फोगर हैं। इनमें से 50% वाहनों की स्थिति काम करने लायक नहीं है। निगम ने 2दिन पहले तीन बड़ी और एक मिनी रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी है। गुरुवार को एक ई-रिक्शा निगम को गिफ्ट में दिया गया है। उस पर वाटर फोगर सिस्टम लगाया फिर भी शहर के हालात कोई सुधार नहीं हुआ।

