ऐसे में हाल ही में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस जमीन सौदे की पुलिस जांच पर सवाल उठाए थे। साथ ही कहा था कि पार्थ पवार को एफआईआर में नहीं शामिल करने से यह लग सकता है कि जांच में किसी तरह की रोक-टोक या संरक्षण दिया जा रहा है।
अजित पवार ने स्पष्ट किया अपना रुख
मामले में बढ़ती चर्चा को देखते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने स्पष्ट किया कि इस बिल के पीछे का मकसद अपने बेटे को बचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी दस्तावेज रजिस्टर करने के लिए मिले, उन्होंने सही कदम नहीं उठाया। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए था कि यह समझौता रजिस्टर नहीं किया जा सकता।दरअसल, हाल ही में विधान सभा ने रेवेन्यू मंत्री को संवेदनशील मामलों में सुनवाई करने का अधिकार देने वाला बिल पास किया है। इसके तहत पहले शिकायतकर्ता केवल हाईकोर्ट जा सकते थे, लेकिन अब वे सीधे रेवेन्यू मंत्री से मामले की सुनवाई करवा सकते हैं।
99 प्रतिशत हिस्सेदारी के मालिक है पार्थ पवार
गौरतलब है कि इस सौदे में पार्थ पवार 99% हिस्सेदारी के मालिक हैं। सौदे की जांच में पार्थ पवार का नाम एफआईआर में नहीं आया, क्योंकि अधिकारियों के अनुसार, उनके नाम पर कोई दस्तावेज नहीं था। लेकिन उनके व्यापार साथी और रिश्तेदार दिग्विजय पाटिल, पॉवर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी और उप-रजिस्ट्रार रविंद्र तरु को एफआईआर में नामित किया गया है।
बिल पर क्या बोले राजस्व मंत्री बावनकुले?
हालांकि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कुछ लेनदेन से राज्य को वित्तीय नुकसान हुआ है और इसलिए इसे कानूनी और प्रभावी तरीके से सुलझाने के लिए यह बिल जरूरी था। इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र में सरकार और अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं, जबकि अजित पवार ने बार-बार कहा कि जिम्मेदारी दस्तावेज रजिस्ट्रेशन के अधिकारियों की थी, न कि उनके बेटे की।