क्या MVA में बढ़ा कांग्रेस का कद?
क्या MVA में बढ़ा कांग्रेस का कद? निगम चुनाव में करारी शिकस्त के बाद पवार और ठाकरे पर प्रेशर
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव के नतीजों से साफ जाहिर है कि राज्य में कांग्रेस का कद बढ़ा है. पार्टी ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और वो तीसरे नंबर पर रही. कांग्रेस की जीत के साथ ही विकास आघाडी में समीकरण बदलने की उम्मीद जताई जा रही है.

महाराष्ट्र में बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) सहित 29 नगर महापालिकाओं के चुनाव नतीजों ने राज्य की राजनीति की दिशा और दशा को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. इस चुनाव में महायुति ने शानदार प्रदर्शन किया. इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में फिलहाल विकास बनाम पहचान की लड़ाई में विकास का एजेंडा भारी पड़ा है.
चुनाव के नतीजे
नतीजों पर नजर डालें तो बीजेपी ने 29 नगर निकायों की कुल 2,869 सीट में से 1,425 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि शिंदे की शिवसेना ने 399, कांग्रेस ने 324, अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने 167, शिवसेना (UBT) ने 155, राकांपा (शरद चंद्र पवार) ने 36, MNS ने 13, BSP ने 6, राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के साथ पंजीकृत दलों ने 129, गैर-मान्यता प्राप्त दलों ने 196 सीट पर और 19 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है.
चुनाव नतीजों के मुताबिक बीजेपी और शिवसेना के बाद कांग्रेस ने सबसे ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया. कांग्रेस ने चुनाव में कुल मिलाकर तीसरा स्थान हासिल किया और महा विकास आघाडी में अपने सहयोगी दलों शिवसेना (UBT) और NCP (शरद पवार गुट) से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. ऐसे में माना जा रहा है कि स्थिति 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले समन्वय, सीट बंटवारे और नेतृत्व पर पुनर्विचार के लिए बाध्य करेगी. इन नतीजों से साफ लग रहा है कि MVA में कांग्रेस का कद बढ़ सकता है.
अपने ही गढ़ में मिली करारी शिकस्त
शिवसेना (UBT) जहां ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका की सत्ता गंवा दी. वहीं NCP (शरद पवार गुट) को अजित पवार की NCP के साथ गठबंधन करने के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवड में अपने गढ़ गंवाने पड़े. यहां इस गठबंधन को करारी हार मिली, जिससे साफ लग रहा है कि अपने ही गढ़ में इनकी पकड़ कमजोर हुई है. इन सब के बीच कांग्रेस कोल्हापुर, चंद्रपुर और भिवंडी में सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफल रही.
ठाकरे और पवार BJP को रोकने में नाकाम
इन नतीजों के बाद कांग्रेस MVA में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर सकती है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब यह दावा करते हुए महाविकास आघाडी (MVA) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग करेगी कि ठाकरे और पवार का क्षेत्रीय गौरव कार्ड बीजेपी की बढ़त को रोकने में असफल रहा.
कम हुआ ठाकरे का प्रभाव
जानकारों का कहना है कि ठाकरे की पार्टी मुंबई में बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में उसका प्रभाव घट गया है, जो सीधे तौर पर MVA में वरिष्ठ साझेदार होने के उसके दावे को प्रभावित करेगा. माना जा रहा है कि कांग्रेस अब महाराष्ट्र में बड़े भाई की भूमिका में नजर आ सकती है.
सीट बंटवारे से महायुति को फायदा
विश्लेषकों के मुताबिक शिवसेना (UBT) और शिवसेना के बीच वोटों के बंटवारे से कई वार्ड में सत्तारूढ़ गठबंधन यानी महायुति को फायदा हुआ है. उनका मानना है कि ठाकरे की पार्टी भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखे हुए है, लेकिन एकजुट संगठनात्मक ढांचे के बिना इसे वार्ड स्तर पर जीत में बदलना चुनौती बना हुआ है.
शरद पवार गुट को हुआ नुकसान
जानकारों का कहना है कि शरद पवार गुट सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, खासकर पुणे जिले में बुरी हार और ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में एक अंक में सीट मिलने के बाद, जिससे अब MVA के वास्तुकार होने के उसके दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
कांग्रेस ने दर्ज कराई मौजूदगी
सीटों की संख्या से पता चलता है कि विपक्षी दलों में कांग्रेस ही अब एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी पूरे महाराष्ट्र में मौजूदगी है, जो इसे अपने राष्ट्रीय एजेंडे को प्राथमिकता देने और उसे आगे बढ़ाने के लिए मजबूर करेगी. इससे शिवसेना (UBT) और राकांपा (शप) को या तो सहायक भूमिका में रहने या विपक्षी वोट में तीन तरफा बंटवारे का जोखिम उठाना पड़ सकता है.
क्या कांग्रेस के साथ चलेंगे पवार और ठाकरे गुट
जानकारों के अनुसार राकांपा (शप) और शिवसेना (UBT) के पास कोई विकल्प नहीं है सिवाय इसके कि वो अपने पूर्वाग्रहों को छोड़कर कांग्रेस के साथ आएं, ताकि उनका चिह्न पूरे महाराष्ट्र में पहुंचे. हालांकि 2029 के विधानसभा चुनाव अभी काफी दूर हैं, लेकिन जिला परिषद के चुनावों से ही दोनों दलों को कांग्रेस के साथ मिलकर चलना होगा.
संगठन को मजबूत करने पर जोर
इस बीच राकांपा (शप) के महासचिव अरविंद तिवारी का कहना है किअब समय आ गया है कि शिवसेना (UBT) और राकांपा (शप) सड़कों पर उतरें और अपने संगठन को फिर से मजबूत करके नया नेतृत्व बनाएं.
कांग्रेस नेता ने कही ये बात
वहीं कांग्रेस नेता रत्नाकर महाजन का कहना है कि उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन हाल के स्थानीय निकाय और नगर निकाय चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि विजेताओं और विपक्ष के बीच अंतर काफी बड़ा है. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं तक कैश पहुंचना इसकी वजह हो सकती है, लेकिन इस तथ्य की अनदेखी की गई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि बीजेपी से लड़ने के लिए पार्टी को एकजुट होना होगा और गठबंधन रणनीति पर दोबारा सोचना होगा.

