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जबरिया रिटायर्ड IPS घर पर लिखवाया, जेल गए अमिताभ ठाकुर की कहानी????

अखिलेश, योगी सरकार से टकराए, मुलायम पर FIR कराई
जबरिया रिटायर्ड IPS घर पर लिखवाया, जेल गए अमिताभ ठाकुर की कहानी

बात 10 जुलाई, 2015 की है। सुबह लखनऊ के हजरतगंज थाने में आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर पहुंचे। उन्होंने एक धमकी देने की FIR दर्ज कराई। इसने सूबे की सियासत को दहला दिया। यूपी में सपा की सरकार थी। अखिलेश यादव सूबे के मुखिया थे। और FIR दर्ज हुई थी तत्कालीन सपा संरक्षक और पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव पर।

देवरिया, बलिया समेत 9 जिलों में एसपी रहे पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह, ट्रेन से गिरफ्तारी है। इस बार ….. में पढ़िए अमिताभ ठाकुर कौन हैं? सपा और भाजपा सरकार में उनसे जुड़े कौन से बड़े विवाद सामने आए? समय से पहले आखिर उन्हें क्यों जबरिया रिटायरमेंट दे दिया गया? उन्हें यूपी का खेमका क्यों कहा जाता है?

 

पहले वो विवाद, जिसमें मुलायम सिंह ने किया था फोन

2012 में यूपी में अखिलेश यादव की अगुआई में सपा ने सरकार बनाई। गायत्री प्रजापति खनन मंत्री थे। 2014 से 2015 के बीच में आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने आरटीआई के जरिए खनन विभाग से कुछ दस्तावेज निकाले।

उन्होंने लोकायुक्त में गायत्री प्रजापति के खिलाफ अवैध रेत-पत्थर खनन कराने और घोटाले की शिकायत की। आरोप लगाया कि गायत्री प्रजापति ने स्टाफ, रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं। ये आरोप सीधे सरकार की छवि पर हमला था।

अखिलेश सरकार में अमिताभ ठाकुर साइडलाइन चल रहे थे। वो उस समय सिविल डिफेंस में आईजी के पद पर तैनात थे। अवैध खनन का मामला लगातार तूल पकड़ रहा था।

अचानक अमिताभ ठाकुर का सामने आए। एक ऑडियो जारी किया, जिससे पूरी सरकार हिल गई। यह ऑडियो था मुलायम सिंह का। मुलायम सिंह ने 10 जुलाई, 2015 को अमिताभ ठाकुर को फोन किया। गायत्री प्रजापति मामले को संभालने के लिए अमिताभ ठाकुर से बात की और जब वे नहीं मानें तो धमकी दी।

पत्नी नूतन ठाकुर के साथ पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर।
पत्नी नूतन ठाकुर के साथ पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर।

अमिताभ ठाकुर की शिकायत के मुताबिक, मुलायम सिंह ने फोन कर धमकी दी थी कि गायत्री प्रजापति के खिलाफ केस बंद करो, वर्ना अंजाम भुगतो। अमिताभ ने इस बातचीत का एक ऑडियो क्लिप भी जारी किया था। कहा था कि यह सत्ता का दुरुपयोग है।

जब यूपी पुलिस ने FIR नहीं लिखी, तो अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ 24 सितंबर, 2015 को हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज हुआ।

हालांकि, FIR दर्ज होने के बाद सपा की तत्कालीन सरकार ने इसे संभालने की कोशिश की। अमिताभ ठाकुर पर बेबुनियाद आरोप लगाने की बात कही गई। कहा गया कि अमिताभ ठाकुर कुंठित मानसिकता के हैं। वे मुलायम सिंह जैसे नेता पर झूठा इल्जाम लगाना उनकी फितरत है।

अमिताभ तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सरकार से सीधे-सीधे पंगा लिया था।
अमिताभ तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सरकार से सीधे-सीधे पंगा लिया था।

मुलायम सिंह से पुरानी खुन्नस थी

बताते हैं, अमिताभ ठाकुर और मुलायम सिंह के बीच पुरानी खुन्नस थी। मामला साल-2006 के फिरोजाबाद में हुए एक विवाद से जुड़ा है। उस समय अमिताभ ठाकुर फिरोजाबाद के SP थे। एक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बदइंतजामी को लेकर विवाद हुआ। इस कार्यक्रम में मुलायम सिंह के समधी बाहुबली विधायक रामवीर सिंह यादव भी मौजूद थे।

उन्होंने अमिताभ ठाकुर को इस कार्यक्रम में थप्पड़ मार दिया था। बताते हैं, इसके बाद पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच जमकर बवाल हुआ था। कई पुलिसवालों को चोटें आई थीं। कुछ की वर्दी तक फट गई थी। तब मुलायम सिंह सूबे के सीएम थे। इस विवाद के बाद अमिताभ ठाकुर का वहां से ट्रांसफर कर दिया गया था।

ये तस्वीर अमिताभ ठाकुर की नौकरी के दौरान की है। साथ में पत्नी नूतन ठाकुर हैं।
ये तस्वीर अमिताभ ठाकुर की नौकरी के दौरान की है। साथ में पत्नी नूतन ठाकुर हैं।

अमिताभ पर रेप, पत्नी नूतन पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग का केस हुआ दर्ज

मुलायम सिंह पर आरोप लगाने के 24 घंटे के अंदर ही लखनऊ के गोमतीनगर थाने में गाजियाबाद की एक महिला ने अमिताभ पर रेप का आरोप लगाया। नूतन को सहआरोपी बनाया गया।

उन पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग का केस दर्ज हुआ। हालांकि बाद में पता चला कि महिला को गायत्री प्रजापति ने पैसे देकर इस्तेमाल किया। इसके बाद नूतन ठाकुर ने कोर्ट के जरिए गायत्री और हाजी जमाल पर FIR दर्ज कराई।

रेप केस में अमिताभ ठाकुर को सस्पेंड किया गया था। हालांकि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने अप्रैल- 2016 में उनके सस्पेंशन पर रोक लगा दी। 11 अक्टूबर, 2015 से पूरे वेतन के साथ उनकी बहाली का आदेश दिया था।

बिहार में जन्मे अमिताभ ने पहली बार में ही IRS बीट किया था।
बिहार में जन्मे अमिताभ ने पहली बार में ही IRS बीट किया था।

2017 में सत्ता बदली, लेकिन सरकार से टकराते रहे

2017 में यूपी में सत्ता परिवर्तन हुआ। सपा सरकार की विदाई हुई। अमिताभ ठाकुर का योगी सरकार से भी समीकरण नहीं बैठा। 2018 में सिविल डिफेंस में उनकी और जसवीर सिंह की तैनाती हुई। वहां दोनों एक-दूसरे के खिलाफ लिखा-पढ़ी करने लगे थे। इसके बाद वहां से उन्हें हटाया गया।

आईजी रूल्स एंड मैनुअल्स रहते हुए पुलिस सुधार, माफिया संरक्षण जैसे मुद्दों पर मुखर रहे। इससे कई बार सरकार की किरकिरी हुई। सरकार पर बृजेश सिंह जैसे सजातीय माफियाओं के संरक्षण देने का आरोप लगाया। माफिया को जातीय और धार्मिक आधार पर बांटने का आरोप लगाया।

2021 में सोशल मीडिया पर सीधे सीएम योगी से सवाल कर बैठे कि 5 साल में एक भी भ्रष्ट आईएएस-आईपीएस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इसके बाद उनके खिलाफ कई विभागीय जांच शुरू हो गई।

सेवानिवृत्ति से 7 साल पहले जबरिया रिटायर किए गए

अमिताभ ठाकुर के आवास पर जबरिया रिटायर्ड आईपीएस लिखा हुआ है। दरअसल, उनका रिटायरमेंट 2028 में था। लेकिन, वह सेवाकाल में कई विभागीय जांच में फंस चुके थे। प्रदेश सरकार की अनुशंसा पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें जबरिया रिटायरमेंट दे दिया। आरोपों के चलते केंद्र सरकार ने IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की नौकरी की स्क्रीनिंग कराई थी।

घर के बाहर बोर्ड पर लिखवाया जबरिया रिटायर्ड IPS अमिताभ ठाकुर।
घर के बाहर बोर्ड पर लिखवाया जबरिया रिटायर्ड IPS अमिताभ ठाकुर।

स्क्रीनिंग की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमिताभ ठाकुर सरकारी नौकरी में रहने के योग्य नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने अपने घर के बाहर बोर्ड लगवाया- “जबरिया रिटायर IPS अमिताभ ठाकुर”। बाद में राजनीति में सक्रिय हुए और कई मामलों पर सरकार से टकराव जारी रखा।

2021 में पहली बार गए अमिताभ ठाकुर जेल गए

घोसी से बसपा सांसद अतुल राय पर रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता और उसके साथी ने 16 अक्टूबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट के बाहर आग लगा ली थी। बाद में इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी।

आत्महत्या से पहले फेसबुक लाइव पर दोनों ने एसएसपी अमित पाठक, सीओ अमरेश सिंह, दरोगा संजय राय, उनके बेटे विवेक राय और पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

अमिताभ ठाकुर पर आरोप था कि वे मुख्तार अंसारी के कहने पर अतुल राय को बचाने के लिए पीड़िता के खिलाफ तमाम दस्तावेज जारी कर उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले में यूपी सरकार ने एसआईटी बनाकर जांच कराई थी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को 9 दिसंबर की देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारी 26 साल पुराने देवरिया में एक प्लॉट आवंटन से जुड़ी है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को 9 दिसंबर की देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारी 26 साल पुराने देवरिया में एक प्लॉट आवंटन से जुड़ी है।

एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में बताया था कि बलात्कार पीड़िता ने 10 नवंबर, 2020 को एसएसपी वाराणसी को एक पत्र दिया था। जिसमें उसने अमिताभ ठाकुर पर बसपा सांसद अतुल राय से अदालत में झूठे सबूत गढ़ने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया था।

इसी कारण उसे आत्मदाह करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस रिपोर्ट के आधार पर पहली बार अमिताभ ठाकुर पर सुसाइड करने के लिए मजबूर करने का प्रकरण दर्ज हुआ। उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। तब वह 8 महीने जेल में रहे।

देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में 26 साल पहले यही प्लॉट पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी को अलॉट हुआ था।
देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में 26 साल पहले यही प्लॉट पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी को अलॉट हुआ था।

राजनीतिक पार्टी बनाई, योगी सरकार पर हमला जारी रखा

अमिताभ ठाकुर ने अगस्त, 2021 में नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी आजाद अधिकार सेना बनाई। वह खुद इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जबकि पत्नी नूतन ठाकुर प्रवक्ता हैं।

अमिताभ ठाकुर ने 2022 में मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। तब उन्‍होंने सीएम योगी पर हमला करते हुए आरोप लगाए थे कि उनके कार्यकाल में तमाम अलोकतांत्रिक, अराजक, दमनकारी काम हुए। इसके विरोध में वह मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था।

IPS अमिताभ ठाकुर ने आजाद अधिकार सेना नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई है।
IPS अमिताभ ठाकुर ने आजाद अधिकार सेना नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई है।

2024 में संत कबीर नगर में एक प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया था कि माफिया को जातीय आधार पर मारा जा रहा। सवाल उठाया कि बृजेश सिंह जैसे माफिया कैसे सुरक्षित हैं?

फिर जून, 2024 में संभल हिंसा में न्यायिक आयोग में बयान दर्ज कराया और प्रशासन पर तथ्य छिपाने का आरोप मढ़ दिया। इसी साल कानपुर के गैंगस्टर अखिलेश दुबे प्रकरण में उन्होंने खुलकर एडीजी अमिताभ यश पर संरक्षण देने का आरोप लगाया। साथ ही सीएम योगी को पत्र लिखा और इसकी सीबीआई जांच की मांग की थी।

फिर जब प्रदेश में कफ सिरप कांड का मामला उछला तो ठाकुर ने कुछ फोटो राजनीतिक और अफसरों के जारी किए। साथ ही दावा किया कि इसमें सिरप कांड के आरोपी हैं। कई और संगीन आरोप लगाए। सरकार के हर फैसले पर सवाल उठाते रहे।

अतीक अहमद मर्डर की सीबीआई जांच कराने की उठाई थी मांग

15 मई, 2023 को चर्चित माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के मर्डर के मामले में भी अमिताभ ठाकुर कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। कहा था कि इस मर्डर की सही जांच होनी चाहिए। इसलिए केस को CBI को सौंप दिया जाए। बता दें, गुजरात से पेशी के लिए लाए गए अतीक अहमद और उनके भाई की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पूर्व IG अमिताभ ठाकुर को देवरिया कोर्ट में पेशी के लिए ले जाती पुलिस।
पूर्व IG अमिताभ ठाकुर को देवरिया कोर्ट में पेशी के लिए ले जाती पुलिस।

जहां थे कभी पुलिस कप्तान, अब वहीं की जेल में बंद

अमिताभ ठाकुर को 9 दिसंबर को देवरिया में दर्ज एक जमीन फर्जीवाड़े के प्रकरण में गिरफ्तार किया गया। ये 26 साल पुराना 1999 का मामला है। तब अमिताभ ठाकुर देवरिया में एसपी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर के नाम पर देवरिया के पुरवा इंडस्ट्रियल एरिया में एक औद्योगिक प्लॉट आवंटित कराया।

इसमें फर्जी दस्तावेज और झूठे नाम-पते का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस के मुताबिक, नूतन ठाकुर ने कागजों में अपना नाम नूतन देवी बताया। पति के रूप में अमिताभ का नाम कुछ जगहों पर अभिजात और अभिताप ठाकुर लिखा है।

पता- ग्राम खैरा, जिला सीतामढ़ी, बिहार के नाम दिया गया है। जो आवेदन पत्र, शपथपत्र, ट्रेजरी चालान और ट्रांसफर डीड तैयार कराए गए हैं, उसमें ये नाम-पते हैं। 419, 420, 467, 468, 471, 120-B धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

जांच लखनऊ पश्चिमी जोन SIT कर रही थी। इसकी रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हुई और गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की गई। अमिताभ को दिल्ली जाते हुए शाहजहांपुर में आधी रात ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया।

शाहजहांपुर से उन्हें लखनऊ लाया गया और यहां से देवरिया ले जाया गया। देवरिया पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी का X अकाउंट भी सस्पेंड है। दावा किया जा रहा कि पुलिस ने दोनों का अकाउंट सस्पेंड करवाया है।

कोर्ट में रो पड़े थे अमिताभ ठाकुर, कहा था- मुझे प्रताड़ित करने की साजिश

कोर्ट में पेशी के दौरान अमिताभ ठाकुर मीडिया से बात करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कोर्ट में उन्होंने 8 पेज का स्पष्टीकरण भी दिया, अपना केस खुद लड़ने की इच्छा जताई। उनका आरोप है कि 26 साल पुराने एक सामान्य सिविल विवाद को जानबूझकर आपराधिक केस में बदलकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा।

कोर्ट में जाने से पहले मेडिकल कराए जाने के दौरान उन्होंने पत्रकारों के सामने चिल्लाकर कहा था कि मेरे खिलाफ अन्याय हो रहा। ये सब कुछ सरकार के इशारे पर हो रहा। अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी।

आगे क्या होगा, क्या पत्नी की भी गिरफ्तारी होगी?

देवरिया प्रकरण में अमिताभ ठाकुर के साथ उनकी पत्नी नूतन ठाकुर भी आरोपी हैं। अभी अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी हुई है। अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी। उनकी पत्नी नूतन ठाकुर पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। पति-पत्नी पर जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है। उसमें 7 साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है। हालांकि जिस प्लॉट आवंटन का ये मामला है, उसे ये दंपती पहले ही बेच चुका है।

क्या किसी अधिकारी को जबरन रिटायर किया जा सकता है?

सरकार मौलिक नियम (FR) 56 (J) के तहत IAS, IPS और अन्य ग्रुप-ए सेवाओं, ग्रुप-बी अधिकारियों के साथ अराजपत्रित सेवाओं सहित राजपत्रित अधिकारियों को लोकहित में रिटायर किया जा सकता है। यह नियम सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों (PSU) और स्वायत्त निकायों पर भी लागू हो सकता है।

इस नियम के तहत अगर कोई भी अधिकारी 30 साल तक की सेवा पूरी कर चुके या 50 से 55 साल की उम्र पूरी कर चुका है, तो उसे सरकार रिटायर कर सकती है। सरकार इस नियम का इस्तेमाल करके समय पूर्व रिटायर करती है, तो संबंधित को नोटिस और 3 महीने के वेतन-भत्ते भी देने होते हैं। रिटायरमेंट के बाद उसे पेंशन आदि जी जा सकती है। हालांकि, अमिताभ ठाकुर के प्रकरण में विभागीय जांच लंबित होने के चलते उनकी अभी तक पेंशन जारी नहीं हुई है।

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