दोनों सदनों से पारित हुआ ‘SHANTI’ विधेयक !!!!
Nuclear Energy Bill: दोनों सदनों से पारित हुआ ‘SHANTI’ विधेयक, निजी क्षेत्र के लिए खुले परमाणु ऊर्जा के दरवाजे

संसद ने गुरुवार को परमाणु ऊर्जा से जुड़े एक अहम विधेयक को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने सिविल परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी का रास्ता खोलने वाले ‘भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन (शांति) विधेयक, 2025’ (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India – SHANTI) विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक बुधवार को लोकसभा से पारित हो चुका है। अब मौजूदा कानून को बदलने के लिए लाए गए विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद केंद्र परमाणु ऊर्जा पर सरकार का एकाधिकार खत्म करने की ओर कदम बढ़ा देगा।
सुरक्षा तंत्र से किसी भी तरह का समझौता नहीं- सरकार
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा 24×7 विश्वसनीय बिजली आपूर्ति का स्रोत है, जबकि अन्य नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों में यह निरंतरता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा तंत्र से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जितेंद्र सिंह ने विकिरण को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अब तक आम जनता के लिए किसी भी प्रकार के विकिरण-संबंधी खतरे की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को आगाह किया कि परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों की कीमत पर निजी कंपनियों को बढ़ावा देना राष्ट्रीय हित में नहीं है। उन्होंने फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परमाणु ऊर्जा पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में है। रमेश ने विदेशी तकनीक के बजाय भारत के स्वदेशी 700 मेगावाट के रिएक्टरों को मानक बनाने और देश के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग पर जोर दिया। वहीं, भाजपा सांसद किरण चौधरी ने बिल का समर्थन करते हुए इसे आधुनिक परमाणु कानून बताया, जो कड़े सुरक्षा मानकों के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए मील का पत्थर
भाजपा सांसद किरण चौधरी ने बिल का समर्थन करते हुए इसे आधुनिक परमाणु कानून बताया, जो कड़े सुरक्षा मानकों के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा। पूर्व राजनयिक और सांसद हर्षवर्द्धन शृंगला ने इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य के लिए 19 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है, जो निजी भागीदारी के बिना संभव नहीं है।
निजीकरण बुरी बात नहीं: सुधा मूर्ति
स्वतंत्र सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि निजीकरण बुरी बात नहीं है। इससे रोजगार पैदा होता है। गरीबी दूर होती है। परमाणु ऊर्जा को हमेशा हिरोशिमा और नागासाकी की घटनाओं से जोड़ा नहीं जाना चाहिए, क्योंकि परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए इस विधेयक को शांति विधेयक कहा जाता है।
क्या हैं सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव का प्रस्ताव?
सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव के लिए जो विधेयक लाया गया है, उसे सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI), 2025 नाम दिया गया है। इसके जरिए सरकार परमाणु ऊर्जा कानून (एटॉमिक एनर्जी एक्ट), 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को वापस ले लेगी। मौजूदा समय में भारत में परमाणु पदार्थों, ऊर्जा और उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर यही दोनों कानून दिशा-निर्देश तय करते हैं।
जानें- नए विधेयक में क्या?
शांति, 2025 विधेयक में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, इस्तेमाल और नियमन के लिए एक नया वैध ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा रेडिएशन के मानकों को लेकर भी इस विधेयक में कई नियम शामिल किए गए हैं। विधेयक में कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा भारत की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी अहम है। खासकर जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग वाली तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डाटा सेंटर्स और उत्पादन की मांग बढ़ती जा रही है।

