चेक पोस्ट बंद हुए तो चेक पॉइंट से वसूली शुर !!!
रीवा में ट्रक में झूलते युवक के बहाने फिर खुली आरटीओ की अवैध वसूली की पोल
- कलेक्टर को बताया गया- दलाली करने वाला कृषि मंडी का कर्मचारी
- कृषि मंडी ने लिखित में बताया- राजकुमार हमारा कर्मचारी नहीं है
- शाम को आरटीओ भी पलटा, कहा- यह हमारा कर्मचारी नहीं
- भास्कर से बोला दलाल- मैं शुरू से RTO के लिए गाड़ी पास कराता हूं
रीवा में एमपी-यूपी बॉर्डर स्थित हनुमना इलाके में ट्रक के गेट से दलाल को लटकाकर कई किमी तक ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद सोमवार को पूरा दिन प्रशासनिक भ्रम और बयानबाजी में गुजर गया। अफसर सुबह से शाम तक यह तय नहीं कर पाए कि ट्रक से लटकाया गया राजकुमार गुप्ता (51) आखिर किसके लिए वसूली कर रहा था?
पहले परिवहन विभाग ने उसे कृषि उपज मंडी समिति, हनुमना का कर्मचारी बताया। लेकिन दोपहर में कृषि उपज मंडी समिति, हनुमना (जिला मऊगंज) ने लिखित में साफ कर दिया कि राजकुमार गुप्ता उनका कर्मचारी नहीं है। इसके बाद परिवहन विभाग ने भी उससे किसी तरह का संबंध होने से इंकार कर दिया।
मामले की गंभीरता देखते हुए कलेक्टर मऊगंज संजय कुमार जैन और एसपी खुद जांच में उतरे। धान खरीदी के लिए बनाए गए नाकों और चेक पाइंट्स की सूची खंगाली गई, लेकिन कहीं भी राजकुमार गुप्ता का नाम सरकारी कर्मचारी के रूप में दर्ज नहीं मिला। जांच में सामने आया कि वह आरटीओ चेक पाइंट के आगे अपनी मर्जी से ट्रक चालकों से वसूली करने वाला निजी दलाल है। इधर, मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं।
मामले में दो एफआईआर…दोनों की कहानी अलग-अलग
पहली एफआईआर… कलेक्टर के निर्देश पर दर्ज की गई। इसमें ट्रक चालक सुमित पटेल व राजकुमार आरोपी बनाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि राजकुमार आरटीओ चेक पाइंट के आगे जबरन ट्रक चालकों से वसूली की कोशिश कर रहा था, इसी दौरान विवाद बढ़ा और यह खतरनाक घटना हुई।
दूसरी एफआईआर… राजकुमार गुप्ता ने दर्ज कराई। उसने दावा किया- ‘मैं बात करने के लिए ड्राइवर की तरफ के पायदान पर चढ़ा था, तभी उसने अचानक ट्रक आगे बढ़ा दिया। मैं ट्रक के दरवाजे के बाहर लटका रहा। ड्राइवर और खलासी ने मुझे गंदी गालियां दीं। ड्राइवर ने मुक्का मारा और धमकी दी।
भास्कर से राजकुमार ने कहा- आरटीओ में मेरे जैसे सैकड़ों दलाल
मेरा काम गाड़ियां पास कराना है और यह गाड़ी भी पास होनी थी। मेरे जैसे सैकड़ों दलाल हैं, जो आरटीओ से जुड़े काम करते हैं। मैं भी शुरू से यही काम कर रहा हूं और पूरा जीवन इसी में बीत गया। मैं 10 टायर के ट्रक को पास कराने के लिए प्रति गाड़ी 400 से 500 रुपए लेता हूं। समझ नहीं आ रहा कि मेरे खिलाफ एफआईआर क्यों हुई, जबकि पीड़ित तो मैं खुद हूं। मेरे मुताबिक कार्रवाई ट्रक ड्राइवर और खलासी के खिलाफ होनी चाहिए।’-जैसा राजकुमार ने भास्कर को बताया
सीधी बात
विवेक शर्मा, परिवहन आयुक्त
चेक पॉइंट पर सिर्फ परिवहन के अफसर, वसूली का हक नहीं
Q. मध्यप्रदेश में चेक पोस्ट कब बंद हुए थे?
-मप्र में 30 जून 2024 को 47 चेक पोस्ट बंद किए थे। 12 जुलाई 2024 को नए चेक पाइंट शुरू किए गए। ये 45 हैं, पर 35 ही संचालित हो रहे हैं। इनका काम वाहनों की फिटनेस जांचना, बिना टैक्स चल रही गाड़ियों और बिना दस्तावेजों के चल रहे वाहनों की जांच करना है।
Q. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद चेक पोस्ट बंद हो गए थे, तो ये अस्थाई चेक पाइंट क्यों चल रहे हैं?
– ये चेक पाइंट नियमानुसार चल रहे हैं। पहले की तरह गाड़ियों की कतारें नहीं लगतीं। जांच के बाद गाड़ियां आसानी से रवाना करते हैं।
Q. चेक पाइंट पर बिना वर्दी वाले दलाल वसूली क्यों कर रहे हैं? क्या आपको इसकी जानकारी है?
– चेक पाइंट पर सिर्फ परिवहन विभाग के अफसर तैनात हैं। बिना वर्दी कोई वसूली करे, इसका किसी को कोई हक नहीं दिया गया है।
Q. अगर अस्थाई चेक पाइंट पर आपके विभाग के अफसर तैनात हैं, तो बिना वर्दी वाले दलाल वसूली कैसे कर रहे हैं? निगरानी का जिम्मा किसका है?
– पूरी टीम को समय-समय पर दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। यह टीम की ही जिम्मेदारी है कि कोई अवैध वसूली न हो।

