STF के रडार पर अफसर-कर्मचारी:फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे बने पुलिसकर्मी, अब रिकॉर्ड में हेराफेरी
पुलिस महकमे में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे ‘कानून के रखवाले’ बने बैठे कई अफसर और कर्मचारी अब फंसते नजर आ रहे हैं। खुद को बचाने के लिए इन लोगों ने अब प्रशासनिक रिकॉर्ड में हेरफेर कराना शुरू कर दिया है।
ग्वालियर-चंबल संभाग के दतिया में 10, शिवपुरी में 11 और श्योपुर जिले में 11 मामले सामने आ चुके हैं। जहां फर्जीवाड़े की जांच को भटकाने के लिए सरकारी ‘दायरा पंजी’ (रिकॉर्ड रजिस्टर) तक बदल दिए गए। दतिया में तो न्यायालय से नोटिस भी जारी किए गए हैं।
यह खुलासा तब हुआ जब दैनिक भास्कर ने इस मामले की पड़ताल की। पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे इस फर्जीवाड़े के कई महत्वपूर्ण सुबूत भास्कर के पास मौजूद हैं।
एसटीएफ एसपी राजेश भदौरिया ने बताया कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों की जांच चल रही है। एक आरोपी अफसर द्वारा रिकॉर्ड रजिस्टर (दायरा पंजी) में नाम जुड़वाने के सबूत मिले हैं। हम इस एंगल पर भी बारीकी से जांच कर रहे हैं।
ऐसे चल रहा खेल
जांच में सामने आया है कि फर्जी प्रमाण पत्र धारक अब मूल रिकॉर्ड में दर्ज नामों को हटाकर अपना नाम फिट कर रहे हैं। इससे एक ही नंबर पर दो-दो नाम दिख रहे हैं।
केस 1: दायरा पंजी के क्रमांक 741 पर पहले ‘चमेली’ का नाम दर्ज था, लेकिन कथित हेरफेर के बाद अब वहां ‘आरती मांझी’ का नाम दिख रहा है। रिकॉर्ड में इस बदलाव से दस्तावेजों में छेड़छाड़ और जांच से बचने के लिए फर्जीवाड़ा किए जाने की आशंका गहरा गई है।
केस 2: कुलवंत मांझी नाम के कर्मचारी का वेरिफिकेशन जब क्रमांक 836 पर कराया गया, तो वहां नरेंद्र कुमार का नाम निकला। बाद में सेटिंग कर कुलवंत का नाम क्रमांक 434 पर चढ़ा दिया गया, इसी नंबर पर नारायण प्रसाद का नाम भी है।
एक्सपर्ट – त्त शर्मा, रिटायर्ड एसडीएम
क्यूआर कोड से पारदर्शी हो सकती है व्यवस्था फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इनसे बचने के लिए जाति प्रमाण पत्र बनाने और उनके सत्यापन की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी किया जाना जरूरी है। इसके लिए प्रमाण पत्रों पर क्यूआर कोड और बारकोड अनिवार्य किए जा सकते हैं।
इनमें संबंधित व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड और दस्तावेज समाहित किए जा सकते हैं। कोड स्कैन करते ही प्रमाण पत्र की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। यह व्यवस्था आसानी से लागू हो सकती है, जिससे शिकायतें कम होंगी और प्रमाणिकता बेहतर होगी।
श्योपुर, दतिया, शिवपुरी में ‘फर्जी’ दावेदार… दतिया में कोर्ट से नोटिस भी जारी हुए
श्योपुर: रूप माझी, श्रीनिवास मांझी, कुलवंत मांझी, राहुल बाथम, राकेश मांझी, श्रीराम मांझी, मनोज मांझी, जगदीश मांझी, दिनेश्वर सायं पेंकरार व अनिल बाथम शामिल हैं। दतिया में नोटिस जारी हो चुके हैं।
दतिया: शेर सिंह मांझी, नंदकिशोर मांझी, विनोद मांझी, शालिगराम मांझी, मुकेश कुमार मांझी, भरतलाल मांझी, अनिल मांझी, सुनील गौड़, मुनेश कुमार मांझी, कैलाश मांझी और श्रीमती कांतो मांझी।
शिवपुरी में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर 11 लोग नौकरी कर रहे हैं। सभी लोगों की जांच चल रही है।

