मध्य प्रदेश

चुनाव हारे, पद गया, फिर भी सरकारी बंगलो पर कब्जा !!!!

चुनाव हारे, पद गया, फिर भी सरकारी बंगलो पर कब्जा
प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक अल्टीमेटम, 7 अफसरों को भी नोटिस
विधानसभा चुनाव हारने, मंत्री पद जाने के बावजूद कई नेता बंगलो पर कब्जा किए हुए हैं। ऐसे नेताओं पर अब मोहन सरकार सख्ती बरतने जा रही है। अब इनसे बंगले खाली कराने की तैयारी की जा रही है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को भेजे गए नोटिस में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि यदि 13 जनवरी तक बंगला खाली नहीं किया तो प्रशासन बल प्रयोग कर बेदखली की कार्रवाई करेगा।

पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। इसके बावजूद वे बंगले में दो साल से डटे हुए हैं। वहीं पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी वर्तमान में विधायक नहीं होने के बावजूद मंत्री रहते मिले बंगले को खाली नहीं कर रहीं। ऐसी ही स्थिति भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की है। सांसद नहीं होने के बाद भी वे सरकारी बंगले में डटी हुई हैं।

संपदा संचालनालय के मुताबिक, प्रभात झा के परिवार को पहले ही 6 जनवरी को नोटिस दिया गया था, जबकि रामपाल को इससे पहले नोटिस दिया जा चुका है। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि पात्रता समाप्त होने के बाद किसी भी स्थिति में सरकारी आवास पर कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा।

प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी और रामपाल को इससे पहले नोटिस दिया गया।
प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी और रामपाल को इससे पहले नोटिस दिया गया।

मंत्रियों वाले बंगलों में रह रहे विधायक

  • डॉ. प्रभुराम चौधरी (विधायक सांची)
  • भूपेन्द्र सिंह (विधायक खुरई)
  • मीना सिंह (विधायक मानपुर)

सरकार से अलॉट कराया था भार्गव ने बंगला

सागर जिले की रहली सीट से 9 बार के विधायक गोपाल भार्गव को भोपाल के 74 बंगला में सरकारी आवास अलॉट किया गया था। मोहन मंत्रिमंडल में मंत्री न रहने के बाद उन्हें सरकार ने उन्हें विधिवत उस बंगले को आवंटित किया है। गोपाल भार्गव संपदा संचालनालय के नियमों के मुताबिक उस बंगले का किराया अदा करते आ रहे हैं। भार्गव के करीबियों का तर्क है कि वे भले ही मंत्री न हों लेकिन, उन्हें सरकारी बंगला नियमानुसार आवंटित किया गया है।

भारी-भरकम किराया वसूली होगी

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के बाद भी बंगला खाली नहीं किया गया तो भारी भरकम किराया वसूला जाएगा। नियमों के मुताबिक, पहले तीन महीने तक सामान्य किराया, इसके बाद अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना और इसके बाद भी आवास खाली नहीं होने पर 30 गुना तक किराया वसूलने का प्रावधान है। विधि विभाग ने इस तरह की वसूली को मंजूरी दे दी है।

चार आईएएस सहित 7 अफसरों को भी नोटिस

संपदा संचालनालय के अनुसार, राजधानी भोपाल में चार आईएएस अधिकारियों समेत कुल सात अफसरों को भी बेदखली नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कुछ आईपीएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

पात्रता से ऊपर की श्रेणी के बंगलो में रह रहे विधायक

आमतौर पर मंत्रियों को बी और सी टाइप बंगले दिए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में बीजेपी और कांग्रेस के आधा दर्जन से ज्यादा विधायक ऐसे हैं जो पात्रता से ऊपर वाली श्रेणी के बंगलो में रह रहे हैं। इनमें अधिकांश ऐसे विधायक हैं जो पहले मंत्री रह चुके हैं।

इन माननीयों के पास पात्रता से ऊपर वाले बंगले

  • यादवेन्द्र सिंह, विधायक टीकमगढ़ (पूर्व मंत्री)- बी-23, (74 बंगले)
  • राजेश शुक्ला बबलू, विधायक बिजावर – सी-20, शिवाजी नगर
  • अजय सिंह, विधायक चुरहट (पूर्व नेता प्रतिपक्ष)- सी-19, शिवाजी नगर
  • संजय पाठक, विधायक विजयराघवगढ़ (पूर्व मंत्री) – सी-26, शिवाजी नगर
  • सुरेन्द्र पटवा, विधायक भोजपुर (पूर्व मंत्री)- बी-3 (74 बंगले)
  • अर्चना चिटनीस, विधायक बुरहानपुर (पूर्व मंत्री)- सी-28, शिवाजी नगर
  • डॉ. विक्रांत भूरिया, विधायक झाबुआ – सी-1 (74 बंगला)
  • ओमप्रकाश सखलेचा, विधायक जावद (पूर्व मंत्री) सी-16, शिवाजी नगर

हमें डेढ़ वर्ष रहने दिया, इसके लिए धन्यवाद- तुश्मुल

प्रभात झा के बेटे तुश्मुल झा ने भास्कर से कहा कि अभी खरमास चल रहा है। इसमें कोई भी ऐसी चीजें नहीं की जाती। ये सहज प्रक्रिया है। इस बंगले में 20-21 वर्ष रहे। पिताजी यहां लंबे समय तक काम करते रहे। उनको सांसद के नाते इस बंगले में रहने की पात्रता थी। हम सरकार को धन्यवाद देते हैं कि डेढ़ वर्ष तक हमें यहां रहने दिया।

मुझे लगता नहीं कि ये बहुत बड़ा विषय है, जिस पर बहुत ज्यादा बात करने की आवश्यकता है। सरकारी व्यवस्थाओं का उपयोग तभी तक करना चाहिए, जब तक आप उस दायित्व पर रहते हैं। चाहे वह गाड़ी हो या घर। इस पर बहुत ज्यादा राय रखने की आवश्यकता नहीं है।

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