धानसभा अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता ने शनिवार को इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), विशेष डीजीपी (साइबर अपराध) और जालंधर के पुलिस आयुक्त को यह नोटिस जारी किया गया है। गुप्ता के अनुसार, जालंधर के पुलिस आयुक्त की भूमिका इस पूरे प्रकरण में अत्यंत संदिग्ध है और यह स्पष्ट रूप से सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस मामले में विशेषाधिकार हनन का सीधा मामला बनता है और सदन इस पर गंभीरता से विचार करेगा।
अध्यक्ष गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा की संपत्ति, जो कि वीडियो रिकॉर्डिंग के रूप में है, का उपयोग और उसके आधार पर पंजाब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई उनके जवाब मिलने के बाद ही तय की जाएगी।
यह पूरा विवाद विधानसभा की वीडियो रिकॉर्डिंग के एक क्लिप के उपयोग से शुरू हुआ। दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और कई भाजपा विधायकों ने इस क्लिप का उपयोग करते हुए आरोप लगाया था कि विपक्ष की नेता आतिशी ने विधानसभा में एक बहस के बाद गुरु तेघ बहादुर का कथित तौर पर अपमान किया था। यह बहस पिछले साल नवंबर में नौवें सिख गुरु के 350वें शहादत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक दिल्ली कार्यक्रम पर हुई थी। इसके बाद जालंधर पुलिस आयुक्त कार्यालय ने कपिल मिश्रा और अन्य के खिलाफ वीडियो को अपलोड करने और प्रसारित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता ने पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर राज्य पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए आलोचना की। उन्होंने कहा कि सदन का दुरुपयोग राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, भाजपा विधायकों ने सिख गुरु के कथित अपमान के लिए आतिशी की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि आतिशी से माफी मांगने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया, अन्यथा मामला वहीं समाप्त हो सकता था।