कर्ज को हल्के में न लें, वेतन कुर्क हो सकता है!
इस महीने के अंत में स्टीफन (काल्पनिक नाम) का वेतन आधा हो सकता है। अमेरिकी सरकार ने इसी सप्ताह उनके नियोक्ता को इस संबंध में नोटिस भेजा है, क्योंकि उन्होंने 270 दिनों से अपने एजुकेशन लोन की एक भी किस्त नहीं चुकाई है, जबकि नौकरी अप्रैल 2025 में ही शुरू कर दी थी।
क्या आप सोच रहे हैं कि सरकार किसी निजी कंपनी को अपने कर्मचारी का वेतन काटकर सरकारी खाते में जमा करने का आदेश कैसे दे सकती है? इसे ‘वेज गार्निशमेंट’ (वेतन की कुर्की) कहा जाता है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें अदालत या सरकारी एजेंसी किसी नियोक्ता को कर्मचारी की कमाई (मजदूरी, वेतन, बोनस आदि) का एक हिस्सा रोकने का आदेश देती है, ताकि पुराने कर्ज, जैसे कि बकाया टैक्स या डिफॉल्ट हो चुके एजुकेशन लोन का भुगतान किया जा सके।
एक बार नोटिस जारी होने के बाद, यह एक अनिवार्य कटौती बन जाती है जो तब तक जारी रहती है जब तक कि पूरा कर्ज चुकता न हो जाए। यह कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ सरकार की कानूनी कार्रवाई या अदालती आदेश का नतीजा होता है। यह स्थिति सिर्फ स्टीफन की नहीं है; अमेरिका में 30 लाख छात्र लोन डिफॉल्टर हैं, जिन्होंने ट्रम्प सरकार को हस्तक्षेप करने और कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया है।
चूंकि महामारी के दौरान जब अर्थव्यवस्था ठप हो गई थी, तब दुनियाभर की सरकारों ने कर्ज अदायगी पर कुछ महीनों के लिए रोक लगा दी थी। वित्तीय संस्थानों की इस सहानुभूतिपूर्ण सोच ने कई लोगों के मन में कर्ज न चुकाने की मानसिकता को बढ़ावा दिया। भारत में, 30 जून 2025 तक, जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों की कुल बकाया राशि ₹1,76,693 करोड़ तक पहुंच गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर में बढ़ती महंगाई डिफॉल्टरों की लिस्ट को बड़ा कर रही है। यह भविष्य में सरकारों को अपने बैंकों को बचाने के लिए ‘वेज गार्निशमेंट’ जैसे सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर सकती है।
यदि आपको लगता है कि आप हर महीने जारी होने वाली डिफॉल्टरों की लिस्ट में शामिल हो सकते हैं, तो इससे बचने का विकल्प है: सभी लोन का एकीकरण यानी सभी पुराने (डिफॉल्ट) कर्जों को एक नए लोन में बदल देना। उन लोगों के लिए यह सबसे तेज समाधान है, जिन्हें अब भी उधार लेने की जरूरत है। ऋण एकीकरण अलग-अलग कर्जदाताओं को किए गए भुगतानों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित कर सकता है।
…भुगतान में पीछे रहने से बचने के लिए, उधारकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ऐसी भुगतान योजना चुनें, जिसे आसानी से निभा सकें। यह कानूनी कार्रवाई से बचाएगा। साथ ही, क्रेडिट स्कोर सुधारने में भी मदद करेगा।

