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अब 55 देशों में वीजा फ्री घूम सकेंगे भारतीय !!!

अब 55 देशों में वीजा फ्री घूम सकेंगे भारतीय, पासपोर्ट रैंकिंग में इस नंबर पर पहुंचा इंडिया, जानें पाकिस्तान-बांग्लादेश कहां?

Henley Passport Index: दुनियाभर के देशों के पासपोर्ट को रैंकिंग देने वाली संस्था हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने 2026 की लिस्ट जारी की है. इसमें भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार हुआ है.

55 देशों में वीजा फ्री यात्रा कर सकते हैं भारतीय

भारतीय पासपोर्ट धारक अब 55 देशों में वीजा फ्री एंट्री, वीजा ऑन अराइवल या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (eTA) के साथ सफर कर सकते हैं. पिछले साल यह संख्या 57 थी, लेकिन अब रैंक में सुधार हुआ है. भारतीय पासपोर्ट की यह रैंकिंग पिछले कुछ सालों में स्थिर या गिरावट के बाद सुधार का संकेत है. 2006 में भारत 71वें स्थान पर था, लेकिन बाद में गिरावट आई. अब यह मिड-टियर में है.

किस देश के पास टॉप रैंकिंग पासपोर्ट है?

  • सिंगापुर का पासपोर्ट सबसे पावरफुल है, जिसे 192 देशों में वीजा फ्री एक्सेस है.
  • जापान और साउथ कोरिया दूसरे नंबर पर है, जिसे 188 देशों में एंट्री मिली है.
  • डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, स्पेन और लक्जमबर्ग तीसरे स्थान पर हैं, जिसे 186 देशों में एक्सेस है.
  • UAE ने 5वें स्थान पर पहुंचकर सबसे मजबूत प्रदर्शन किया, 2006 से 57 पायदान ऊपर चढ़ा और अब 149 देशों में एक्सेस है.

अमेरिकी और पाकिस्तानी पासपोर्ट किस रैंक पर है?

इस रैंकिंग में अमेरिकी पासपोर्ट 10वें पायदान पर लौटा है, जिसे 179 देशों में वीजा फ्री एंट्री है. पिछले साल अमेरिका टॉप-10 की लिस्ट से बाहर हो गया था और 12वें पायदान पर पहुंच गया था. वहीं, पाकिस्तान (98) और बांग्लादेश 95वे पायदान पर हैं.

सबसे कमजोर पासपोर्ट अफगानिस्तान का है, जिसे 101वां स्थान मिला है. यानी अफगानी लोग सिर्फ 24 देशों में ही सफर कर सकते हैं.

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स क्या है?

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया का सबसे भरोसेमंद पासपोर्ट रैंकिंग है, जिसे लंदन में हेनले एंड पार्टनर्स तैयार करता है. यह 199 पासपोर्ट्स की रैंकिंग करता है और 227 देशों/क्षेत्रों में बिना पहले वीजा के यात्रा की सुविधा के आधार पर रैंक तय करता है. इसके लिए इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) से डेटा लिया जाता है.

यह इंडेक्स दिखाता है कि दुनिया में यात्रा की आजादी में बहुत असमानता है. टॉप और बॉटम के बीच 168 देशों का फर्क है. पिछले 20 सालों में ग्लोबल मोबिलिटी बढ़ी है, लेकिन फायदे असमान रूप से बंटे हैं. 

 

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