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 अमेरिकी यूनिवर्सिटियों में भारतीय छात्रों की संख्या 75 फीसदी घटी ?

 अमेरिकी यूनिवर्सिटियों में भारतीय छात्रों की संख्या 75 फीसदी घटी, आंकड़े चौंका रहे

US Visa: डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले साल में अमेरिकी यूनिवर्सिटियों में भारतीय छात्रों का नामांकन 75 फीसदी तक गिर गया है. वीजा रिजेक्शन, इंटरव्यू स्लॉट की कमी मुख्य वजह मानी जा रही है.मेरिकी वीजा में गिरावट

अमेरिका में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला साल निराशाजनक साबित हुआ है. ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों का नामांकन करीब 75 प्रतिशत तक घट गया है. यह गिरावट हाल के दशकों में सबसे तेज मानी जा रही है और इसका सीधा असर हजारों छात्रों के भविष्य पर पड़ा है.

शिक्षा सलाहकारों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी वीजा नीति में आई सख्ती है. वीजा इंटरव्यू स्लॉट्स की भारी कमी, लंबी जांच प्रक्रिया और रिजेक्शन रेट में अचानक बढ़ोतरी ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है. कई मामलों में छात्रों को समय पर इंटरव्यू स्लॉट नहीं मिल पाए, जिसके कारण उन्हें आखिरी समय में अपनी पढ़ाई की योजना टालनी पड़ी.

भारतीय छात्रों की संख्या में कमी

अगस्त से अक्टूबर के बीच जब सबसे अधिक छात्र अमेरिका जाते हैं, उसी दौरान सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. ओवरसीज एजुकेशन कंसल्टेंसीज के अनुसार इस अवधि में भारतीय छात्रों की संख्या करीब 70 प्रतिशत तक कम रही. केवल वही छात्र अमेरिका पहुंच सके, जिन्होंने फरवरी या मार्च तक अपनी आवेदन और वीजा प्रक्रिया पूरी कर ली थी. बाद में आवेदन करने वाले छात्रों के लिए हालात लगातार कठिन होते चले गए.

आवेदन करने से परहेज

वीजा जांच के दौरान सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा जैसे नए कदमों ने भी छात्रों की चिंता बढ़ा दी है. कई छात्रों ने इस डर से आवेदन ही नहीं किया कि छोटी-सी गलती उनके वीजा रिजेक्शन की वजह बन सकती है. हैदराबाद स्थित एक एजुकेशन कंसल्टेंसी के अनुसार, पहली बार ऐसा हुआ है जब बड़ी संख्या में छात्रों ने अमेरिका के टॉप विश्वविद्यालयों में आवेदन करने से भी परहेज किया.

8000 स्टूडेंट वीजा रद्द कर

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों में सामने आया कि दिसंबर 2025 तक लगभग 8000 स्टूडेंट वीजा रद्द कर दिए गए. कुछ छात्रों को अचानक ईमेल भेजकर अमेरिका छोड़ने के निर्देश दिए गए. कई मामलों में पुराने और पहले से सुलझ चुके मामलों के आधार पर भी कार्रवाई हुई, जिन्हें बाद में कानूनी हस्तक्षेप से ठीक कराया गया.

भारतीयों के लिए भी हालात आसान नहीं

छात्रों के साथ-साथ कामकाजी भारतीयों के लिए भी हालात आसान नहीं रहे. H-1B वीजा प्रोग्राम पर अनिश्चितता बनी रही, फीस बढ़ाने और इसे सीमित करने जैसे प्रस्तावों ने आईटी सेक्टर से जुड़े पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी. H-1B वीजा धारकों में करीब 72 प्रतिशत भारतीय हैं, जिससे इस नीति का असर सबसे ज्यादा भारतीय समुदाय पर पड़ा.

अमेरिका के जॉब मार्केट में आई सुस्ती

अमेरिका के जॉब मार्केट में आई सुस्ती ने हालात और खराब कर दिए. कई कंपनियों ने नई भर्तियां टाल दी हैं, वीजा ट्रांसफर रोक दिए और कुछ मामलों में पहले से दिए गए जॉब ऑफर भी रद्द कर दिए हैं. वर्क परमिट से जुड़े नियमों में बदलाव और ऑटोमैटिक एक्सटेंशन की सुविधा खत्म होने से छात्रों और प्रोफेशनल्स की अनिश्चितता और बढ़ गई.

भारतीय दूतावासों में मदद मांगने वालों की संख्या

इन परिस्थितियों के बीच भारतीय दूतावासों में मदद मांगने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इमिग्रेशन वकीलों का मानना है कि यह स्थिति जल्द सुधरने के संकेत नहीं दे रही. लंबे समय से अमेरिका में रह रहे कई भारतीय अब अपने करियर और भविष्य की योजनाओं पर दोबारा विचार कर रहे हैं.

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