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पद्म पुरस्कारों का नाम पद्म क्यों रखा गया?

Padma Awards 2026: पद्म पुरस्कारों का नाम पद्म क्यों रखा गया? जानें इसके पीछे का आध्यात्मिक अर्थ

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब देश के नायकों के नामों की घोषणा होती है, तो पद्म शब्द गूंज उठता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि देश के इन प्रतिष्ठित सम्मानों का नाम पद्म ही क्यों रखा गया?

Padma Awards 2026: पद्म पुरस्कारों का नाम पद्म क्यों रखा गया? जानें इसके पीछे का आध्यात्मिक अर्थ

पद्म पुरस्कार 2026Image Credit source: PTI

नागरिक पुरस्कारों की सूची आती है, तो पूरा देश गौरवान्वित होता है. कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में अपना जीवन खपा देने वाली विभूतियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से नवाजा जाता है. लेकिन इन पुरस्कारों के पीछे केवल एक मेडल या प्रशस्ति पत्र नहीं, बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी आध्यात्मिक चेतना छिपी है. इन पुरस्कारों की आधिकारिक घोषणा 8 जनवरी 1955 को की गई थी. तब से लेकर आज तक, पद्म पुरस्कार न केवल उपलब्धि का प्रतीक बने हैं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन को भी दर्शाते हैं. आइए जानते हैं इस नाम के पीछे कौन-सा गहरा आध्यात्मिक भाव छिपा है?

पद्म यानी कीचड़ में खिला एक संकल्प

पद्म संस्कृत का शब्द है, जिसका सरल अर्थ है, कमल का फूल. भारतीय संस्कृति में कमल केवल एक पुष्प नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है. भारत में कमल के फूल को राष्ट्रीय पुष्प का दर्जा प्राप्त है. इसलिए इन पुरस्कारों का नाम पद्म रखने के पीछे सबसे बड़ा कारण इसका प्रतीक चिह्न है, जो कमल के आकार का होता है. भारत में कमल के फूल को राष्ट्रीय पुष्प का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसके गहरे अर्थ इससे कहीं अधिक ऊंचे हैं.

भारतीय अध्यात्म में कमल को पवित्रता, ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक माना गया है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जन्म तो कीचड़ में लेता है, लेकिन उससे कभी दूषित नहीं होता. जिस तरह कमल पानी की बूंदों के बीच रहकर भी उनसे अलग रहता है, ठीक उसी तरह पद्म पुरस्कार विजेता भी समाज की चकाचौंध और सांसारिक कठिनाइयों के बीच रहकर निस्वार्थ भाव से अपना काम करते रहते हैं.

इतिहास के पन्नों से: 1954 से अब तक का सफर

इन पुरस्कारों की स्थापना 2 जनवरी 1954 को की गई थी. शुरुआत में इन्हें पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग कहा जाता था, लेकिन 8 जनवरी 1955 को एक आधिकारिक घोषणा के जरिए इनका नामकरण पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री के रूप में किया गया.

श्रेणी महत्व

  • पद्म विभूषण: असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए (दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान)
  • पद्म भूषण: उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए
  • पद्म श्री: किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए

एक भावपूर्ण सम्मान

जब राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में किसी गुमनाम नायक को पद्म सम्मान मिलता है, तो वह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होता. वह उस तपस्या का सम्मान होता है जैसे कमल जल में रहकर भी जल से लिप्त नहीं होता, वैसे ही पद्म पुरस्कार पाने वाले लोग समाज में रहकर भी स्वार्थ, लोभ और दिखावे से ऊपर उठकर देश की सेवा करते हैं. यह पुरस्कार यह संदेश देता है कि सच्ची महानता शोर में नहीं, बल्कि निस्वार्थ कर्म में होती है.

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