खतरे में BJP युवा मोर्चा नेताओं की दावेदारी ?
भारतीय जनता युवा मोर्चा में प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदारों में उम्र का पेंच फंस गया है। पार्टी 32 से 35 वर्ष की आयु के युवा को ही युवा मोर्चा की कमान सौंपने की तैयारी कर रही है। ऐसे में यूपी में युवा मोर्चा अध्यक्ष पद के नेताओं की दावेदारी खतरे में पड़ सकती है।
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महज 45 साल के हैं, ऐसे में संगठन में मंथन चल रहा है कि युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की आयु सीमा भी 32 से 35 साल की जाए।
यूपी में युवा मोर्चा के मौजूदा अध्यक्ष प्रांशुदत्त द्विवेदी 43 साल के हैं। प्रांशु करीब साढ़े चार साल से युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जल्द ही अग्रिम मोर्चों के गठन का संकेत दिया है। प्रदेश में करीब एक दर्जन से अधिक युवा नेता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन दावेदारों में एक भी दावेदार पार्टी की ओर से निर्धारित आयु सीमा के दायरे में नहीं आता है।

सभी मोर्चों के अध्यक्ष बदले जाएंगे
भाजपा के अग्रिम सभी सात मोर्चों के अध्यक्ष बदले जाएंगे। युवा मोर्चा के अध्यक्ष प्रांशु दत्त द्विवेदी एमएलसी बन गए हैं। महिला मोर्चा की अध्यक्ष गीता शाक्य राज्यसभा सदस्य हैं। ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं।
नरेंद्र कश्यप चार साल से दोनों पदों पर काम कर रहे हैं, जबकि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत है। एससी मोर्चा के अध्यक्ष रामचंद्र कनौजिया, किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासिल अली और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष संजय गोंड को सरकार में समायोजन का मौका नहीं मिला है।

अग्रिम मोर्चों के सभी प्रदेश अध्यक्ष जून, 2021 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने नियुक्त किए थे। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के कार्यकाल में अग्रिम मोर्चों में नई टीम का गठन नहीं हुआ। लिहाजा पंकज चौधरी के कार्यकाल में नई टीम गठित होना तय है।
युवा ही होना चाहिए अध्यक्ष
राजनीतिक विश्लेषक आनंद राय मानते हैं, युवा मोर्चा का अध्यक्ष युवा ही होना चाहिए। यूपी में अखिलेश यादव 39 साल की उम्र में सीएम बन गए थे, बसपा सुप्रीमो मायावती भी 40 साल की उम्र में सीएम बन गई थीं। युवा मोर्चा में पहले भी 35 साल की उम्र के नेता अध्यक्ष रहे हैं।
35 साल से अधिक आयु होनी चाहिए
वरिष्ठ पत्रकार रतनमणिलाल का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई 25 साल की उम्र तक चलती है। 30 साल की उम्र तक सामाजिक और राजनीतिक अनुभव नहीं हो पाता है, जिससे वह राजनीतिक सुझबुझ से काम कर सकें। युवा मोर्चा युवाओं के बीच काम करने वाली बड़ी विंग है। युवा मोर्चा के पार्टी कार्यकर्ता ही आगे चलकर मूल संगठन में पदाधिकारी बनते हैं। युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष पार्टी का चेहरा भी होता है।
पश्चिम कमजोर पड़ा
सरकार और संगठन में पूर्वांचल का दबदबा बढ़ गया है, पश्चिमांचल हल्का पड़ गया वहीं अवध सबसे कमजोर है। भाजपा के अग्रिम मोर्चों और प्रदेश टीम के गठन के साथ योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में यदि समय रहते क्षेत्रीय संतुलन नहीं बनाया गया तो विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ब्राह्मणों और ठाकुरों की दावेदारी प्रबल
प्रदेश में ब्राह्मणों की नाराजगी का मुद्दा गर्माया हुआ है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि संगठन, सरकार और शासन में ब्राह्मणों के पास ज्यादा महत्वपूर्ण पद नहीं है। ऐसे में युवा मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए सबसे प्रबल दावेदारी ब्राह्मणों की बताई जा रही है। वहीं यूजीसी का मुद्दा भी भाजपा के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
यूजीसी का सबसे ज्यादा विरोध ब्राह्मण, ठाकुर, कायस्थ, वैश्य, भूमिहार कर रहे हैं। ऐसे में युवा मोर्चा अध्यक्ष के लिए ठाकुर नेताओं की दावेदारी भी प्रबल है।
दावेदार और उनकी उम्र
प्रदेश में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए डेढ़ दर्जन से अधिक दावेदार हैं। दावेदारों में युवा मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश पदाधिकारी और क्षेत्रीय अध्यक्ष भी शामिल हैं। इनमें से दो-तीन दावेदार ही 32 से 35 साल की उम्र के दायरे में आते हैं। अधिकांश दावेदार 40 वर्ष और इससे अधिक आयु के हैं।


