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AI खत्म करेगा दिल्ली का जाम …दिल्ली की सड़कों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम होगा लागू !

AI खत्म करेगा दिल्ली का जाम: राजधानी की सड़कों पर लागू होगा स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, होंगे कई और फायदे

बढ़ते ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही 24 महीनों में तीन चरणों में लागू होने वाली इस योजना को लागू किया जाएगा।

दिल्ली की सड़कों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम होगा लागू …

राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय को भेजा गया है और स्वीकृति मिलते ही इसे 24 महीनों में तीन चरणों में लागू किया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने यह प्रस्ताव 2026 की प्रदूषण कार्ययोजना के तहत कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को सौंपी रिपोर्ट में साझा किया है। अधिकारियों के अनुसार, इसका मकसद ट्रैफिक जाम कम करना, यात्रा समय घटाना और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को मजबूत करना है। प्रस्तावित आईटीएमएस उन्नत एनालिटिक्स, इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिग्नल और रियल-टाइम डिसीजन सपोर्ट सिस्टम पर आधारित होगा। इसके तहत ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक को चालान प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे ट्रैफिक उल्लंघनों की पहचान और चालान स्वतः जारी हो सकेंगे।

पहले चरण में 12 महीनों के भीतर पांच ट्रैफिक कॉरिडोर पर 250 एडैप्टिव सिग्नल जंक्शन और 271 प्रवर्तन बिंदु स्थापित किए जाएंगे। दूसरे चरण में 18 महीनों के भीतर सात और कॉरिडोर, 222 सिग्नल जंक्शन और 236 एनफोर्समेंट प्वाइंट जोड़े जाएंगे। अंतिम चरण में 30 अतिरिक्त कॉरिडोर, 620 सिग्नल जंक्शन और 522 प्रवर्तन स्थल आईटीएमएस से कवर होंगे। अधिकारियों का कहना है कि चरणबद्ध कार्यान्वयन से मौजूदा ट्रैफिक संचालन में न्यूनतम व्यवधान होगा और तकनीक को क्रमिक रूप से एकीकृत किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन और रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग प्रभावी रही, तो वाहन रुकने-चलने की स्थिति कम होगी, जिससे ईंधन खपत और प्रदूषण दोनों में कमी आ सकती है। दिल्ली पुलिस पहले भी चुनिंदा चौराहों पर स्मार्ट सिग्नल का पायलट परीक्षण कर चुकी हैं।

ईंधन खपत आर धुआं दोनों बढ़ाता है जाम
दिल्ली में जाम के दौरान वाहनों का बार-बार रुकना और तेज गति से आगे बढ़ना ईंधन खपत और धुआं दोनों बढ़ाता है। परिवहन विशेषज्ञ डॉ अनिल छिकारा का मानना है कि यदि औसत गति को स्थिर रखा जाए और चौराहों पर प्रतीक्षा समय घटे, तो कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। आईटीएमएस के तहत कंट्रोल सेंटर को रियल-टाइम डेटा मिलेगा, जिसके आधार पर भीड़भाड़ वाले मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन की सलाह दी जा सकेगी। इससे वाहनों की लंबी कतारें बनने से पहले ही दबाव को दूसरे मार्गों पर वितरित किया जा सकेगा।

उल्लंघनों की स्वतः होगी पहचान
एएनपीआर आधारित प्रणाली से बिना हेलमेट, रेड लाइट जंप, ओवरस्पीडिंग और अन्य उल्लंघनों की पहचान स्वतः होगी। इससे ऑन-द-स्पॉट विवाद कम होंगे और कार्रवाई अधिक पारदर्शी बनेगी। हालांकि, निजता और डेटा सुरक्षा को लेकर प्रश्न भी उठ सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि डेटा उपयोग के स्पष्ट प्रोटोकॉल और सीमित एक्सेस नियंत्रण के साथ प्रणाली संचालित की जाएगी।

यह होंगे फायदें
सिग्नल टाइमिंग लाइव ट्रैफिक के अनुसार बदलेगी ।
भीड़ वाले मार्गों पर डायवर्जन की सलाह दी जा सकेगी ।
रुकने का समय घटेगा ।
औसत गति स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

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