मऊगंज जेल में हर मुलाकात पर 4000 तक वसूली !
मऊगंज उपजेल में कैदियों से अवैध वसूली और मारपीट का मामला सामने आया है। जेल से छूटने के बाद एक कैदी ने अवैध वसूली का वीडियो कलेक्टर, जेल अधीक्षक को सौंपा है।
मंगलवार रात जेल अधीक्षक ने प्रकाश सिंह बघेल नाम के एक प्रहरी को सस्पेंड कर दिया है। इस दौरान उसका मुख्यालय अनूपपुर जिला जेल रहेगा।
चितईपुरवा गांव निवासी कैदी अंबरीश द्विवेदी ने मऊगंज कलेक्टर को लिखित शिकायत की है। उसने आरोप लगाया कि 16 दिसंबर को जेल लाए जाने के बाद प्रहरी ने उन्हें करीब दो घंटे तक पीटा। इसके बाद परिजनों का मोबाइल नंबर लेकर धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए तो और प्रताड़ित किया जाएगा।
नकद और ऑनलाइन के जरिए लगभग 40 हजार रुपए लिए
शिकायत के अनुसार, परिजनों से नकद और ऑनलाइन के जरिए लगभग 40 हजार रुपए लिए गए। इसके अलावा हर मुलाकात पर 1000 से 4000 रुपए तक वसूले जाते थे।
कैदी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रहरी अन्य बंदियों से भी पैसे लेकर नशे की सामग्री उपलब्ध कराता था और जेल में खाने की गुणवत्ता बेहद खराब थी। निरीक्षण से पहले बंदियों को डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
देखिए वीडियो


जेल अधीक्षक बोले- प्रहरी पर पहले भी इस तरह के आरोप
मामले में केंद्रीय जेल अधीक्षक की ओर से प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय ने आरोपी प्रहरी को सस्पेंड कर दिया। अधीक्षक ने बताया कि इस प्रहरी पर पहले भी इस तरह के आरोप लग चुके हैं।
कैदी ने जेल से बाहर आने पर बताया पूरा मामला
रामपुर चितईपुरवा गांव निवासी अंबरीश द्विवेदी ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को वह एक केस में बंदी के रूप में जेल में बंद था। इस दौरान जेल में पदस्थ आरक्षक प्रकाश सिंह ने उनके साथ करीब दो घंटे तक मारपीट की। इसके बाद चार-पांच अन्य बंदियों के साथ भी मारपीट की।
इसके बाद आरक्षक ने उनके परिजनों का मोबाइल नंबर लेकर धमकी दी कि यदि अच्छा भोजन, बेहतर व्यवस्था और मारपीट से बचाना चाहते हो तो ₹20,000 देने होंगे। दबाव में आकर उनकी बहन ने बताए गए मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन माध्यम से ₹20,000 भेजे।


प्रहरी बोला- मामला जेलर तक पहुंचा और पैसे देने होंगे
कुछ दिनों बाद फिर से ₹20,000 की मांग की गई। आरक्षक ने कहा कि मामला जेलर तक पहुंच गया है। वहां भी राशि देनी होगी। इसके बाद परिजनों से जेलर के नाम पर अतिरिक्त ₹20,000 और मंगवाए गए।
अंबरीश ने आरोप लगाया कि जब भी उनकी माता और बहन मुलाकात के लिए जेल आती थीं, तब हर मुलाकात पर ₹2,000 से ₹4,000 तक वसूले जाते थे। साथ ही आरक्षक द्वारा मांगी गई वस्तुएं भी परिजनों को ले जानी पड़ती थीं।
उन्होंने बताया कि बघेल नाम के व्यक्ति के माध्यम से उनसे बातचीत कराई जाती थी। बघेल द्वारा फोन-पे और नकद माध्यम से कई बार पैसे लिए गए। अंबरीश का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता था और लगातार दबाव बनाया जाता था।
अंबरीश त्रिवेदी के मुताबिक, जेल के सामने एक चाय की टपरी (दुकान) है। जहां बैठकर आरक्षक लेनदेन करते हैं। वहीं एक आरक्षक ने मेरे परिजनों को बुलाकर पैसे लिया। उससे छिपकर मेरे दूसरे परिजन ने उसका वीडियो बनाया।
मजदूर का मोबाइल लेकर जेल के अंदर बनाए वीडियो
अंबरीश द्विवेदी के मुताबिक, मुझे धारा 310 और 126 के केस में 16 दिसंबर 2025 को जेल भेजा गया था। इसके बाद 12 जनवरी 2026 को जमानत मिल गई।
अंबरीश के मुताबिक, जनवरी महीने में जेल परिसर में साफ-सफाई और मेंटेनेंस का काम चल रहा था।
जेल नियमों के अनुसार कैदियों के पास मोबाइल फोन रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, काम करने वाले मजदूर अपने मोबाइल फोन साथ लेकर आते थे।
अंबरीश के अनुसार, इसी दौरान उन्होंने एक मजदूर का मोबाइल लेकर जेल परिसर से जुड़े एक-दो वीडियो बनाए, ताकि वे अपने परिजनों को यहां की व्यवस्था के बारे में जानकारी दे सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैदियों के पास मोबाइल रखने की अनुमति नहीं होती और अधिकांश वीडियो जेल के बाहर गेट के पास मजदूर के मोबाइल से बनाए गए थे।

