उत्तर प्रदेश

UP की ट्रेनों में रिश्वत का सिस्टम अटेंडर्स पर शिफ्ट…

UP की ट्रेनों में रिश्वत का सिस्टम अटेंडर्स पर शिफ्ट…
सुरक्षा से खिलवाड़ कर बेच रहे सीट, TTE खा रहे आधा पैसा
चित्रकूट/ मानिकपुर/ ललितपुर

प्रयागराज तक जाना है ना… कोई दिक्कत नहीं। यहां लेट जाइए, ये हमारी सीट है। दो लोगों के 600 रुपए लगेंगे। टीटी को मैं 300 रुपए दूंगा, टीटी चुप हो जाएगा… कुछ नहीं कहेगा। 300 रुपए उसके हो जाएंगे और 300 रुपए मेरे हो जाएंगे…।

यूपी में ट्रेनों के AC कोच में रिश्वत लेकर एंट्री दी जा रही। यह काम अटेंडर्स के जरिए TTE (Travelling Ticket Examiner) करवा रहे, ताकि रिश्वत लेते पकड़े न जाएं। इधर, अटेंडर आउटसोर्स के कर्मचारी होते हैं, इसलिए उन पर रेलवे एक्शन नहीं ले पाता।

TTE के इस खेल में यात्रियों की सुरक्षा से बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा। क्योंकि, ये लोग बगैर आईडी देखे किसी को भी AC कोच में सीट दे रहे। इसलिए ट्रेनों में बम की अफवाह, यात्रियों के सामान चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं।

पिछले महीने पटना से नई दिल्ली जा रही ट्रेन तेजस राजधानी एक्सप्रेस (12309) में बम होने की सूचना मिली थी। इसके बाद यूपी के चंदौली में ट्रेन को रोका गया। सभी यात्रियों को बाहर निकालकर सभी कोच की जांच की गई थी।

एसी कोच में ये अटेंडर को अलॉट की गई जगह है। अटेंडर रुपए लेकर इसे बेच रहे हैं।
एसी कोच में ये अटेंडर को अलॉट की गई जगह है। अटेंडर रुपए लेकर इसे बेच रहे हैं।

इस घटना के बाद सवाल उठा कि क्या ट्रेनें सुरक्षित नहीं? क्या बगैर टिकट या जनरल टिकट लेकर सफर करने वालों की आईडी चेक की जाती है? इन सवालों के जवाब के लिए…… की टीम ने 2 ट्रेनों में सफर किया। सीट की डिमांड की तो बिना आईडी देखे और फाइन की रसीद बनवाए अटेंडर रिश्वत लेकर सीट देने को तैयार हो गया। मतलब साफ था, रुपए देकर कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से एसी कोच में घुस सकता है।

सबसे पहले हमने सर्च किया कि अभी किन ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ है? इनमें चंबल-हावड़ा एक्सप्रेस (12178) का नाम सामने आया। क्योंकि, अभी प्रयागराज में माघ मेला अंतिम चरण में है। यह ट्रेन प्रयागराज से होकर जाती है।

ट्रेन के एसी कोच में REGRET (सीट नहीं है) की स्थिति दिखाई दी। हमने चित्रकूट से प्रयागराज तक का जनरल टिकट लिया। फिर TTE से सीट के लिए रिक्वेस्ट किया। उन्होंने पहले तो इनकार किया। बाद में बोले- ट्रेन में चढ़ जाइए, देखते हैं। इसके बाद हम AC कोच B2 में चढ़ गए और 3 घंटे सफर किया। अटेंडर मौसम से हमने कहा कि प्रयागराज तक जाना है, सीट चाहिए। उसने बगैर फाइन रसीद कटाए बर्थ देने की बात कही।

कोच के अटेंडर मौसम दैनिक भास्कर के हिडन कैमरे पर डील करते कैद हुआ है।
कोच के अटेंडर मौसम …… के हिडन कैमरे पर डील करते कैद हुआ है।

रिपोर्टर: भाई, TTE से एक बार बात कर लो… अगर सीट मिल जाए…?

अटेंडर मौसम: इधर तो मिलेगी नहीं… दो सीट बाहर हैं। ज्यादा दूर के लिए नहीं मिलेंगी। प्रयागराज तक यहां व्यवस्था हो जाएगी।

रिपोर्टर: जहां आप हमको सीट दे रहे हैं, वहां लेटना बन जाएगा? चादर देंगे ना आप…?

मौसम: हां।

रिपोर्टर: मान लो टीटी आया और पूछा तो फिर क्या बताएंगे? फिर फाइन लगेगा?

मौसम: कोई पूछेगा ही नहीं… यह सीट हमारी है।

रिपोर्टर: जनरल टिकट दिखाया और बताया यह टिकट है हमारे पास?

मौसम: जनरल टिकट है ना… कोई दिक्कत नहीं। यहीं बैठ जाइए… कोई दिक्कत नहीं।

रिपोर्टर: हमको एक ही सीट मिल जाए तो कोई दिक्कत नहीं। उतने में काम चल जाएगा। नहीं तो आगे वाले डिब्बे में देख लें।

मौसम: अंदर खाली हो तब तो मिलेगी। कहीं खाली ही नहीं होगी। मैं तो कहूंगा कि एक आदमी यहां लेट जाओ और एक यहां…।

रिपोर्टर: चलो ठीक है, मैं अपने साथी से बात कर लूं। अगर वह भी 300 देने को तैयार हो तो ठीक है…।

मौसम: बात कर लो, बाहर ही तो खड़ा है।

अटेंडर मौसम से हुई बातचीत से साफ हो गया कि कोच में बर्थ नहीं है। लेकिन वह खुद की सीट बेच रहा। इसके लिए वह 300 रुपए प्रति सवारी ले रहा। अब हमें समझना था कि क्या TTE चेक नहीं करता? इसके जवाब में मौसम ने बताया कि टीटी कुछ नहीं कहेगा।

अटेंडर मौसम पैसे लेकर अपनी सीट देने को तैयार हो गया।
अटेंडर मौसम पैसे लेकर अपनी सीट देने को तैयार हो गया।

रिपोर्टर: यहां लेट गए और TTE परेशान करने लगा तो…?

मौसम: प्रयागराज तक ही जाना है… कोई दिक्कत नहीं है। बैठो… तुमसे-उनसे क्या मतलब?

रिपोर्टर: मानिकपुर तक इसी तरह चलें, इसके बाद ट्रेन बदल लेंगे। क्योंकि हमारे पैर डिस्टर्ब है… ऑपरेशन के पैर हैं।

मौसम: आराम से यहां लेट जाइए।

रिपोर्टर: नहीं यार… बढ़िया सीट चाहिए। हम यह तो नहीं कह रहे कि पैसा नहीं देंगे। जो तुम कह रहे, उसमें हम तैयार हैं।

मौसम: चलो देख रहे हैं, शायद कोई पैसेंजर ना आए। चेक तो कर लें। हमारे पास अभी लिस्ट नहीं है।

रिपोर्टर: क्या यह लिस्ट टीटी के पास रहती है?

मौसम: अभी हमने दो पैसेंजर अपने बाहर किए हैं। TTE ने बताया नहीं है अभी तक।

रिपोर्टर: जहां तुम बैठे हो, यहां भी टिकट कटता है?

मौसम: नहीं, यह तो हमारा है। यहीं पर हमारा खाना-पीना, रहना होता है।

स्टेशन से ट्रेन चलने के बाद अटेंडर के पास सूची आती है। इससे उन्हें पता चल जाता है कि कौन-सी सीट खाली है? बस, उसी सीट को वे बेच देते हैं। यात्रियों से लिए जाने वाले इन रुपए में टीटी का हिस्सा कितना होता है? यह जानने के लिए जब हमने मौसम से बात की तो उसने पूरा खुलासा किया।

अटेंडर मौसम ने टीटी से भी मिलीभगत होने का खुलासा किया।
अटेंडर मौसम ने टीटी से भी मिलीभगत होने का खुलासा किया।

रिपोर्टर: पैसा कम नहीं कर रहे हैं?

मौसम: पहले से ही अगर तुमको 500 रुपए बताते तो तुम खुद ही कहते कि कम कर दो। इसीलिए मैंने 300 रुपए बताए हैं।

रिपोर्टर: 300 रुपए ले रहे हो तो बढ़िया सीट दिला दो।

मौसम: जब सीट खाली होगी तभी तो दिलाएंगे। जब वहां पर खाली नहीं है, तब तो कहीं ना कहीं लोगे?

रिपोर्टर: अभी डिब्बे में तो बहुत सीट खाली हैं?

मौसम: अभी मानिकपुर आएगा, तभी पता चलेगा?

रिपोर्टर: यहां तो मुझे ठीक नहीं लग रहा है। यहां पर अगर हम लेट गए और टीटी ने खड़ा कर दिया, तो ठीक नहीं रहेगा।

मौसम: मैं यहीं रहूंगा। आप लेट जाओ, मैं बाहर से कुंडी लगा दूंगा।

रिपोर्टर: आप लोग स्टाॅफ वाले हैं आगे अगर स्टाॅफ चेंज हो गया तो?

चंबल-हावड़ा एक्सप्रेस (12178) के बी-2 कोच का अटेंडर मौसम था।
चंबल-हावड़ा एक्सप्रेस (12178) के बी-2 कोच का अटेंडर मौसम था।

मौसम: कोई स्टाॅफ चेंज नहीं होगा हावड़ा तक जाएंगे और हावड़ा से यही गाड़ी लेकर आएंगे… हमारा सफर रेगुलर है… 3 दिन का… वहीं तक जाएंगे… वहां से वापस आ जाएंगे…।

रिपोर्टर: आपके साथ क्या कुछ टीटी का भी रहता है?

मौसम: टीटी को तो देना पड़ेगा भाई, इसीलिए तो कुछ नहीं कहेगा वो।

रिपोर्टर: वही तो…।

मौसम: टीटी को मैं 300 रुपए दूंगा, टीटी चुप हो जाएगा, कुछ नहीं कहेगा। 300 रुपए उसके हो जाएंगे और 300 मेरे हो जाएंगे। टीटी तो 500 रुपए ले लेगा, 1000 रुपए ले लेगा। जितना चाहे उतना ले लेता है।

अब हमने प्रयागराज डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस (14116) ट्रेन पकड़ी। ये प्रयागराज से आ रही थी। हमने ललितपुर तक का जनरल टिकट लिया और B2 कोच में चढ़ गए। इस ट्रेन में हमने 6 घंटे सफर किया। यहां हमारी मुलाकात अटेंडर धर्मेंद्र से हुई। उसने भी 700 रुपए रिश्वत लेकर बर्थ देने की बात कही।

यह एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 14116 के बी-2 कोच का अटेंडर धर्मेंद्र है।
यह एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 14116 के बी-2 कोच का अटेंडर धर्मेंद्र है।

रिपोर्टर: टीटी नहीं है क्या?

धर्मेंद्र: कहां जाएंगे?

रिपोर्टर: मुझे जाना है, ललितपुर…।

धर्मेंद्र: ललितपुर?

रिपोर्टर: हां, खजुराहो स्टेशन के आगे।

धर्मेंद्र: जनरल टिकट है?

रिपोर्टर: हां।

धर्मेंद्र: 700 रुपए लगेंगे।

रिपोर्टर: कितना?

धर्मेंद्र: 700 रुपए।

धर्मेंद्र से हुई बातचीत से साफ हो गया कि वो 700 रुपए लेगा। रुपए कम नहीं करेगा। रसीद भी नहीं मिलेगी। अब हम जानना चाहते थे कि इसमें टीटी का हिस्सा कितना है? इसके जवाब में धर्मेंद्र ने कहा कि उसे केवल 50 रुपए टीटी से और 50 रुपए यात्री से मिलते हैं।

धर्मेंद्र ने हमें टीटी का डर दिखाया कि वह फाइन भी वसूल करेगा।
धर्मेंद्र ने हमें टीटी का डर दिखाया कि वह फाइन भी वसूल करेगा।

धर्मेंद्र: अगर टीटी बनाएगा, तो इससे ज्यादा बना देगा… बोलो…?

रिपोर्टर: 700 रुपए बहुत हैं बाबूजी… यह टिकट है हमारे पास।

धर्मेंद्र: टिकट की बात छोड़ो।

रिपोर्टर: टिकट जनरल का है।

धर्मेंद्र: टीटी फाइन-वाइन सब जोड़ेगा।

रिपोर्टर: 700 रुपए लेंगे, तो क्या उसमें रसीद भी देंगे?

धर्मेंद्र: टीटी आएगा, तो रसीद कटवा लीजिएगा।

रिपोर्टर: अगर कुछ कम हो जाए, तो कर दीजिए… जो जैसा सिस्टम हो?

धर्मेंद्र: हमें वह 50 रुपए देगा… साफ बात है। अब 50 रुपए में हम तुमको क्या कम कर दें? सिर्फ खाने का दाम 100-200 रुपए यहां से वहां तक में मिल जाता है। यह आप भी जानते हो। खाना ट्रेन में मनाएंगे तो 300 से कम नहीं मिलेगा। उसमें आप क्या कम करवाएंगे भाई? ललितपुर, खजुराहो के बाद आएगा ना?

रिपोर्टर: हां, अगर ललितपुर तक ना हो तो खजुराहो तक ही हो जाए। खजुराहो के बाद एक ही स्टेशन तो बचता है, ललितपुर।

धर्मेंद्र: भैया, 1 बचे या 1 किलोमीटर बचे?

रिपोर्टर: अगर खजुराहो से बुक हो सीट तो आप हमें खजुराहो तक दे दीजिए। फिर वहां से हम खड़े-खड़े ललितपुर चले जाएंगे।

धर्मेंद्र: अरे, हम बैठने की जगह दे देंगे। जब टीटी आएगा, फाइनल कर देगा, तभी तो हम कुछ नहीं कहते। अभी वह आएगा, फाइन-वाइन बनाकर आपको दे देगा तो। पहली चीज तो आप एसी डिब्बे में चढ़े हैं। यहां फाइन ज्यादा बनेगा।

हमने जब भी रुपए कम करने की बात की, अटेंडर धर्मेंद्र ने फाइन काटने की धमकी दी। इससे हम समझ गए कि वो 700 रुपए ही लेगा। अब हम जानना चाहते थे कि क्या इसकी रसीद दी जाती है? इसके जवाब में धर्मेंद्र ने बताया कि आधे की रसीद कटेगी।

700 रुपए में एक सीट, क्या पूरी फैमिली लेकर चलोगे?

अटेंडर धर्मेंद्र ने कहा- ये पूरा एसी है। कंबल बिछा देंगे, आराम से लेटे-लेटे चले जाओ।
अटेंडर धर्मेंद्र ने कहा- ये पूरा एसी है। कंबल बिछा देंगे, आराम से लेटे-लेटे चले जाओ।

रिपोर्टर: अगर 700 रुपए दे दिए जाएं तो फिर फाइन नहीं कटेगा?

धर्मेंद्र: नहीं, कोई फाइन नहीं…।

रिपोर्टर: क्या सीट यही वाली मिलेगी या अंदर वाली?

धर्मेंद्र: मिल जाएगी… पहले देखेंगे… जहां जगह खाली रहेगी, वहां मिलेगी। अगर यहां जगह नहीं मिलेगी तो आगे बैठा देंगे। और क्या कर सकते हैं?

रिपोर्टर: हम 2 लोग हैं?

धर्मेंद्र: एक की बात हो रही है। पता चले 700 रुपए में पूरी फैमिली लेकर चलोगे क्या?

रिपोर्टर: एक सीट तो दे देंगे आप?

धर्मेंद्र: देखिए, मान लीजिए अभी बोर्डिंग नहीं देखा जाएगा, तो जगह कैसे मालूम चलेगी? जगह तो दे देंगे, बोलो फिर… नहीं तो दरवाजा लॉक करें?

रिपोर्टर: लॉक करिए, फिर आप हमको सीट बता दीजिए कौन-सी है?

धर्मेंद्र: लेटना हो तब बता देना। ये पूरा एसी है, कंबल बिछा देंगे और चादर दे देंगे। आराम से लेटे-लेटे चले जाओ।

रिपोर्टर: इस तरह ना दीजिए सीट… बढ़िया प्रॉपर सीट दीजिए।

धर्मेंद्र: इसमें बढ़िया लेटे रहेंगे। यह पूरा चैंबर एसी है… बोलिए?

रिपोर्टर: अंदर व्यवस्था बनवा दो।

धर्मेंद्र: इस सीट में ऊपर बैठ जाओ… इसलिए कि हम उनके खिलाफ न जाएं भाई। साफ बात है, हमको आपसे और उनसे 100 रुपए मिलना है, दोनों से 50-50 रुपए। देखो सामने जो बैठे हैं… ये भी दे दिए हैं। जो मिलना है, वह मिलेगा। बिल्कुल साफ बात है, व्यवस्था हम सब कर देंगे।

अटेंडर धर्मेंद्र की बातों से हम समझ गए कि वह रुपए के लालच में अपनी सीट लोगों को दे देता है। लेकिन, एसी कोच में सफर कर रहे लोगों सुरक्षा की उसे बिल्कुल भी चिंता नहीं। इसलिए उसने पहचान आईडी तक नहीं मांगा। क्या ये सब टीटी की मर्जी से होता है? इसके जवाब में धर्मेंद्र ने बताया कि टीटी को सब पता रहता है।

अटेंडर धर्मेंद्र ने हमें टीटी का डर दिखाया।
अटेंडर धर्मेंद्र ने हमें टीटी का डर दिखाया।

धर्मेंद्र: वे लोग जैसे टिकट बनाएं, मान लीजिए 50-50 रुपए मिल गया। यहीं हमारा काम खत्म हो जाता है। दो-चार टिकट का इधर से मिल जाता है, दो-चार टिकट का उधर से मिल जाता है। सुबह के निकले हैं, तीन दिन लग जाते हैंं।

रिपोर्टर: अंबेडकर नगर ट्रेन कहां से चलती है?

धर्मेंद्र: प्रयागराज से चलती है। वहां (डॉ. अंबेडकर नगर) कल पहुंचेगी, सुबह 10:30 बजे। फिर सुबह 11:30 वहां से चलेगी।

रिपोर्टर: बैठ तो जाएं, अगर टीटी साहब आएंगे तो क्या बताएंगे?

धर्मेंद्र: कोई कुछ नहीं कहेगा, हम यहां से अगले दरवाजे तक मिल जाएंगे। हमारी इसी कोच में ड्यूटी है। टीटी आएगा, तभी पैसा देना, टेंशन की बात नहीं है। आपको मालूम है, टीटी दूर से नजर रखता है कि डिब्बे में कौन चढ़ रहा है। टीटी को सब पता रहता है, किसके पास टिकट है… किसके पास नहीं। इसी तरह हमारे पास भी रिकॉर्ड रहता है। हम लोगों के पास भी लिस्ट आ जाती है, लेकिन बिना पूछे काम नहीं करते।

रिपोर्टर: यह लिस्ट टीटी भेजता होगा?

धर्मेंद्र: यह देखो… लिस्ट आ गई है। इसमें तीन लिस्ट हैं। ट्रेन 14116 है ना देखो… लिस्ट आ गई… देखो, यह कितने नंबर सीट है?

रिपोर्टर: यह 8 है, नीचे वाली 7 है।

धर्मेंद्र: आप बैठिए, आगे-पीछे करना हमारा काम है। आपको एडजस्ट कर देंगे।

  • एसी कोच में अटेंडर रुपए के लालच में अपनी सीट और खाली बर्थ बेच रहे। इसमें TTE भी शामिल हैं, इसलिए यात्रियों को रसीद नहीं दी जा रही।
  • ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे के दावे झूठे हैं। पहचान आईडी देखे बगैर जनरल टिकट लेकर आसानी से एसी कोच में सीट दी जा रही।
  • ट्रेनों में रेलवे का मॉनिटरिंग और विजिलेंस सिस्टम फेल है। हमारे 9 घंटे के सफर में रेलवे का कोई अफसर यह जांच करने नहीं आया कि अटेंडर क्या कर रहा है?
  • अटेंडर और TTE ने सीट बेचने का रेटकार्ड तैयार कर रखा है। वे थर्ड एसी कोच में हर 100 किमी के सफर पर 300 रुपए मांग रहे हैं।

टीटीई-अटेंडर गड़बड़ी कर रहे, तो कार्रवाई करेंगे

हमने ट्रेनों में हो रही गड़बड़ियों की सूचना प्रयागराज रेल मंडल के डीआरएम रजनीश अग्रवाल को दी। मंडल के PRO अमित कुमार सिंह ने बताया- हम तो ये जानते हैं कि किसी भी गाड़ी में आजकल सीट मिल ही नहीं रही। यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा और नियमों का ध्यान रखना चाहिए। वे बगैर टिकट यात्रा न करें। अपनी सीट पर किसी अपरिचित को जगह न दें।

यात्री हमें सूचना दें, सख्त कार्रवाई की जाएगी

हमने अटेंडर के पैसा लेने की जानकारी झांसी रेल मंडल के डीआरएम अनिरुद्ध कुमार को दी। पीआरओ ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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