मध्य प्रदेश

चंबल सेंचुरी में पनडुब्बी से रेत खनन !

चंबल सेंचुरी में पनडुब्बी से रेत खनन:डॉल्फिन-घड़ियाल के अस्तित्व पर खतरा

नेशनल हाईवे-719 पर एमपी-यूपी सीमा जोड़ने के लिए चंबल नदी पर बन रहे हैंगिंग ब्रिज निर्माण में प्रतिबंधित रेत के उपयोग का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य उत्तरप्रदेश सरकार करा रही है और कंपनी द्वारा नदी में पनडुब्बी लगाकर उत्खनन किए जाने के आरोप हैं।

चंबल नेशनल सेंचुरी संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र है, जहां डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुओं का प्राकृतिक आवास है। रेत खनन से जैव विविधता और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ड्रोन कैमरा लेकर पहुंची भास्कर टीम को कंपनी कर्मचारी ने रोक दिया।

एसडीओ श्याम सिंह चौहान और टीआई सतेंद्र राजपूत ने मामले की जांच व कार्रवाई की बात कही है। पुल की लंबाई 594 मीटर और लागत 296 करोड़ रुपए बताई गई है।

चंबल की रेत मिलने पर वाहन राजसात का प्रावधान

चंबल नदी सेंचुरी क्षेत्र में रेत उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों के अनुसार यदि किसी वाहन में चंबल का रेत मिलता है तो सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि वाहन को सीधे राजसात करने तक का प्रावधान है। प्रशासन का कहना है कि अवैध खनन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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