मध्य प्रदेश

इंदौर ईओडब्ल्यू में ही 10 केस दर्ज, 12 जांच में …लोन घोटाले 100 करोड़ तक पहुंच सकता है आंकड़ा !!!

इंदौर ईओडब्ल्यू में ही 10 केस दर्ज, 12 जांच में:14 महीने में 41 करोड़ के लोन घोटाले 100 करोड़ तक पहुंच सकता है आंकड़ा

राष्ट्रीयकृत बैंकों में आम आदमी के लिए लोन लेना जहां आज भी कठिन प्रक्रिया है, वहीं बैंक मैनेजर और स्टाफ ने कमीशन के लालच में धोखेबाजों के साथ मिलकर ऐसे लोन बांट दिए, जिनकी वसूली संभव ही नहीं है। गिरवी रखी गई संपत्तियों की जांच जब रीजनल मैनेजर स्तर पर हुई तो फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।

इसके बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को शिकायतें भेजी गईं और बीते 14 महीनों में 10 बैंक लोन घोटालों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन मामलों में कुल 41 करोड़ 33 लाख रुपए की धोखाधड़ी हो चुकी है।

जांच एजेंसियों का आकलन है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह राशि 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मामलों में शाखा प्रबंधक ही घोटालों के मास्टरमाइंड निकले हैं।

दर्जनभर से ज्यादा केस जांच में

ईओडब्ल्यू के पास बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामले विचाराधीन हैं। इनमें बिना गारंटी लोन, फर्जी वैल्यूशन, बिक चुकी संपत्तियों को गिरवी दिखाने जैसी शिकायतें शामिल हैं। जांच के दायरे में सहकारी साख संस्थाएं, को-ऑपरेटिव, निजी सेक्टर और राष्ट्रीयकृत बैंक भी हैं।

केनरा बैंक के दो मामले बने जांच की बड़ी कड़ी

केनरा बैंक क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर के उप महाप्रबंधक आनंद शिवानंद तोतड़ की शिकायत पर जांच हुई। चंद्रशेखर पचोरी ने मे. आर. शिवम एंड कंपनी के नाम से 40 लाख का लोन लिया। राममोहन अग्रवाल को को-ऑब्लिगेंट बनाकर संपत्ति गिरवी दर्शाई। जिस प्लॉट को निर्विवाद बताया वहां इमारत थी और फ्लैट बिक चुके थे। पचोरी व अग्रवाल सहित तत्कालीन शाखा प्रबंधक रजतिन गुप्ता सहित अन्य पर केस दर्ज किया।

नेहा तांबी, मनीष तांबी ने कैनरा बैंक से 2 करोड़ 56 लाख रुपए का लोन बैंक अफसरों के साथ मिलकर हासिल कर लिया था। शाखा प्रबंधक पवनकुमार झा द्वारा स्थल निरीक्षण की गलत रिपोर्ट मिलने के बावजूद लोन स्वीकृत कर दिया था। जो संपत्ति गिरवी रखी गई थी, वह पहले ही बेची जा चुकी थी। पैनल एडवोकेट ने भी इस गलती को छुपाया। बैंक ने वसूली का प्रयास किया तो जमीन मालिक ही दूसरा निकला।

ऐसे किया फर्जीवाड़ा

  • 20 लाख से 3 करोड़ रुपए तक के लोन बांटे।
  • पहले से बिक चुकी संपत्तियों को गिरवी दिखाया गया।
  • कम कीमत की संपत्ति का हाई वैल्यूएशन किया।
  • स्थल निरीक्षण व कानूनी रिपोर्ट में गलत तथ्य दिए।
  • बाद में पता चला संपत्ति का मालिक कोई और है।

e 22.88 करोड़ प्रारंभिक जांच में दर्ज धोखाधड़ी कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक e 6.87 करोड़ एचडीएफसी बैंक e 4.20 करोड़ आईसीआईसीआई होम फाइनेंस

e 3.57 करोड़ बैंक ऑफ बड़ौदा e 2.55 करोड़ केनरा बैंक e 85.46 लाख म.प्र. ग्रामीण बैंक e 40 लाख केनरा बैंक

बैंक अधिकारी, वकील, निजी एजेंसियां भी जांच के दायरे में

विभिन्न बैंकों में लोन फ्रॉड की शिकायतें विचाराधीन थीं। जांच में यह सामने आया कि बिक चुकी या कम मूल्य की संपत्तियों को बंधक दिखाकर लोन स्वीकृत किए गए। इसमें बैंक अधिकारियों, पैनल एडवोकेट और निजी एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अब सभी मामलों में चालान पेश करने की तैयारी है। –रामेश्वर सिंह यादव, एसपी दोषी अधिकारियों से वसूली की तैयारी में जांच एजेंसी

दोषी अधिकारियों से वसूली के प्रयास किए जाएंगे। उन्हें पद से हटाने के लिए भी बैंकों के प्रबंधन को पत्र लिखे गए हैं। वहीं बैंकों ने लोन जारी करने की जो फाइल तैयार की थी उसे भी जब्त कर लिया गया है ताकि बैंककर्मी उनमें हेराफेरी नहीं कर सके। इन मामलों में अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, ऐसे में कार्रवाई तेजी से जारी रहेगी।

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