IAS अभिषेक प्रकाश के करीबी निकांत जैन की FIR रद्द !!
1 करोड़ की रिश्वत मांगने के हाई-प्रोफाइल केस में आरोपी निकांत जैन को बड़ी राहत मिली है। लखनऊ हाईकोर्ट ने अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। यह वही मामला है जिसने यूपी की नौकरशाही में भूचाल ला दिया था। सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनी से मोटी रकम की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने निकांत जैन की याचिका पर यह आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने पाया कि भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया कोई अपराध नहीं बनता है। इसके बाद न्यायालय ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट और 17 मई 2025 के तलबी आदेश को भी निरस्त कर दिया।
इस मामले में IAS अभिषेक प्रकाश सस्पेंड चल रहे हैं। उनके खिलाफ जांच चल रही है। मुकदमा रद्द होने के बाद अब अभिषेक प्रकाश बहाल हो सकते हैं। आरोप है कि अभिषेक प्रकाश ने निकांत जैन के जरिए बिजनेसमैन से कमीशन की डिमांड की थी। बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने इसकी शिकायत सीएम योगी से की थी। सीएम ने मामले की STF से जांच कराई थी। इसके बाद एक्शन लिया था।

गलतफहमी में दर्ज कराई शिकायत
कोर्ट के सामने बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि उसने शिकायत गलतफहमी के चलते दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग परियोजना की मंजूरी के लिए परियोजना लागत के 5 प्रतिशत की रिश्वत मांगी गई।
न कोई रुपया मिला, न कोई साक्ष्य
निकांत जैन की ओर से न्यायालय को बताया गया कि ये आरोप अस्पष्ट, साक्ष्य विहीन और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता व प्रशासनिक भ्रम का नतीजा है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि न तो कोई धनराशि दी गई, न कोई संपत्ति या मूल्यवान चीज सौंपी गई। न ही किसी प्रकार की धमकी देने की बात सामने आई।
जांच के दौरान नजरी नक्शा नहीं बनाया गया। कथित एक करोड़ रुपए नकद की कोई बरामदगी भी नहीं हुई। न्यायालय ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि अभियुक्त ने किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की है।

20 मार्च को उद्योगपति ने की थी शिकायत
इन्वेस्टर विश्वजीत दत्ता ने 20 मार्च को सीएम योगी से शिकायत की थी। उन्होंने बताया, उनका ग्रुप SEAL सोलर P6 प्राइवेट लिमिटेड यूपी मे सोलर सेल और सोलर उर्जा से संबंधित कल पुर्जे बनाने की यूनिट लगाना चाहता था। इसके लिए उन्होंने इन्वेस्ट यूपी के ऑफिस में और ऑनलाइन आवेदन किया था।
इसके बाद मूल्यांकन समिति की बैठक हुई। जिसमें आवेदन पत्र रखा गया। एक सीनियर IAS अधिकारी ने निकांत जैन का नंबर दिया था। कहा कि उससे बात कर लीजिए। वह कहेगा तो फाइल तुरंत पास हो जाएगी। जैन से बात की तो उसने 5 फीसदी कमीशन मांगा। कमीशन देने से मना करने पर जैन ने कहा कि कितना भी प्रयास कर लो, आना यहीं है।
लखनऊ डीएम रहते IAS अभिषेक प्रकाश पर 20 करोड़ के घोटाले का आरोप
IAS अभिषेक प्रकाश लखनऊ में डिफेंस कॉरिडोर की जमीन घोटाले के आरोपों से भी घिरे हैं। लखनऊ में सरोजनीनगर तहसील के भटगांव गांव के पास डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण 2020–22 में हुआ था।
यहां ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट सहित रक्षा संबंधी यूनिट स्थापित की जानी थीं। उस समय अभिषेक प्रकाश लखनऊ के जिलाधिकारी थे। अधिग्रहण की प्रक्रिया 2021 से शुरू हुई थी। आरोप है- इस अधिग्रहण में फर्जी तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर कर कई फर्जी आवंटियों के नाम जोड़े गए और लगभग 20 करोड़ मुआवजा राशि का बंदरबांट किया गया।

