‘गांजे की खेती से ज्यादा क्लिनिक के लिए चाहिए परमिशन ?

मेरी पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। प्रदूषण मंडल के प्रतिनिधि क्लिनिक के अंदर जेम्स बॉन्ड की तरह बेधड़क घुसने की कोशिश करते हैं, जैसे उनके पास अदालत का सर्च वारंट हो। यह स्त्री की गरिमा के प्रतिकूल है और इस पर मरीजों के परिजन आपत्ति जता चुके हैं।
ये गंभीर आरोप बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) के वरिष्ठ चिकित्सक और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. डॉ. सर्वेश जैन ने लगाए हैं। उन्होंने 12 फरवरी को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव को पत्र भेजकर सागर स्थित बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय पर उगाही, अमर्यादित व्यवहार और महिला मरीजों की गरिमा से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
डॉ. सर्वेश जैन का कहना है कि इस देश में गांजे की खेती या बार चलाने के लिए जितनी अनुमति नहीं चाहिए, उससे कहीं अधिक परमिशन एक क्लीनिक चलाने के लिए अनिवार्य कर दी गई हैं। वहीं, बोर्ड की ओर से इन आरोपों की जांच करने की बात कही गई है।

एनओसी के नाम पर उगाही का आरोप
डॉ. जैन ने पत्र में लिखा है कि मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, बीएमसी सागर के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में वे यह निवेदन करना चाहते हैं कि दो संदिग्ध व्यक्ति पूरे सागर जिले के अस्पतालों और क्लीनिकों में पॉल्यूशन एनओसी के नाम पर उगाही कर रहे हैं।
ये लोग खुद को सागर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का प्रतिनिधि बताते हैं और औचक निरीक्षण पर अड़ जाते हैं, जबकि उनके पास किसी वरिष्ठ अधिकारी का हस्ताक्षरित अधिकृत आदेश नहीं होता। इसके गवाह और प्रमाण उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है।
डॉ. जैन ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था का हिस्सा है। निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालक लंबे समय से इस दबाव को झेल रहे हैं, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सामूहिक विरोध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

डॉक्टर बोले- व्यवस्थाएं सुधरने के बजाय घूसखोरी बढ़ी
पत्र से अलग बातचीत में प्रो. डॉ. सर्वेश जैन ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी शिकायत शासन की व्यवस्था से है। निजी क्लीनिक या अस्पताल चलाने के लिए इतनी अधिक अनुमतियां तय कर दी गई हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने के बजाय घूसखोरी को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार ये अधिकारी बिना अनुमति ऐसे अंदर प्रवेश करते हैं, जैसे किसी फिल्मी किरदार की तरह। महिला मरीजों की जांच के दौरान भी संवेदनशीलता का ध्यान नहीं रखा जाता। डॉ. जैन ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने और अनावश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया खत्म करने की मांग की है।
बोर्ड के सचिव ने कहा- होगी जांच
बोर्ड के सचिव अच्युत आनंद मिश्रा ने कहा कि उन्हें डॉ. सर्वेश जैन का पत्र शुक्रवार को व्हाट्सएप से प्राप्त हुआ है। डॉ. जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।
उनका कहना है कि सागर जिले में डॉ. जैन से जुड़े कुछ क्लीनिकों में बायोमेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण को लेकर शिकायतें मिली थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दो बार जांच के प्रयास किए गए, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। सभी पक्षों को सुना जा रहा है और तथ्यात्मक जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
