प्राधिकरण की 500 करोड़ की भूमि बेचने के आरोपी लोकेंद्र को सशर्त जमानत !
प्राधिकरण की 500 करोड़ की भूमि बेचने के आरोपी लोकेंद्र को सशर्त जमानत
अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया और कहा कि 1.25 करोड़ रुपये का ट्रांसफर स्वयं इस बात का संकेत है कि आवेदक साजिश में शामिल थे। आरोपी के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि जिन बिक्री विलेखों की बात की जा रही है। वह वर्ष 2023 से पहले निष्पादित (संपन्न) किए गए थे। 2024 तक दोनों भूमि के बीच स्पष्ट सीमांकन (डिमार्केशन) नहीं हुआ था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जमानत पर विचार करते समय अपराध की प्रकृति, साक्ष्य, आरोपी की संलिप्तता, जेलों में भीड़भाड़ और ट्रायल में देरी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
क्या है मामला…
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने पिछले साल बिसरख कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि गांव बिसरख जलालपुर में कुछ व्यक्तियों ने बिना अनुमति के अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कर हाईकोर्ट के आदेशों की निरंतर अवहेलना की जा रही है। प्राधिकरण की टीम ने कई बार मौके पर पहुंचकर निर्माण रुकवाने का प्रयास किया था लेकिन निर्माणकर्ता देर-सवेर और विशेषकर रात्रि के समय काम जारी रखते थे। जिन व्यक्तियों को अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के लिए जिम्मेदार बताया है, उनमें सोहरखा के देवेंद्र यादव, बिसरख के कुलदीप, जलालपुर गांव के भारत, महकार, अभिषेक, नैनीताल निवासी गिरीश चंद्र पढ़लनी, सेक्टर-24 नोएडा निवासी पिकी पढ़लनी व एडब्ल्यूएचओ. गुरजिंदर बिहार निवासी प्रिंस शर्मा का नाम सामने आया था। बाद में जांच में लोकेंद्र सिंह भाटी का भी नाम सामने आया था। क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

