दिल्लीमध्य प्रदेश

बिगडती छवि से दबाब में मोहन सरकार !

बिगडती छवि से दबाब में मोहन सरकार

मध्यप्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सरकार की छवि दिनोंदिन धूमिल हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पार्टी संगठन में असंतोष के साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भी दबाव में है. सरकार ने अपने कामकाज के महिमामंडन के लिए शिवराज सिंह चौहान की सरकार में काम करने वाले अधिकारियों को फिर से महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर सबको चोंकाया है.
अमूमन हर प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल एक आम कवायद होती है लेकिन जिस तरह से बीते रोज मप्र में प्रशासनिक फेरबदल किया गया उससे जाहिर है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास सरकार की बिगडती छवि को सुधारने के लिए उन अधिकारियों को वापस लाने के अलावा कोई विकल्प बचा ही नही था जिन्हे दो साल पहले शिवराज सिंह चौहान का खास मानकर चलता कर दिया गया था.
डबरा में मप्र के पूर्व गृहमंत्री द्वारा तंत्र -मंत्र से भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आतंकित हैं. दूसरी तरफ मालवा में कैलाश विजयवर्गीय, बुंदेलखंड में गोपाल भार्गव सरकार के खिलाफ न सिर्फ आक्रामक हैं बल्कि निजी रूप से मुख्यमंत्री को क्षति पहुंचा रहे हैं. मीडिया भी सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति मुखर दिखाई दे रहा है, लेकिन मप्र का मेकअप डिपार्टमेंट यानि जनसंपर्क विभाग लचर साबित हो रहा था ऐसे में बहुत सोच विचार क बाद प्रदेश सरकार ने शनिवार देर रात एक बड़ीप्रशासनिक सर्जरी करते हुए 11 भाप्रसे अधिकारियों का तबादला कर दिया.
आपको याद होगा कि पिछले महिने ही मुख्यसचिव अनुराग जैन ने एक वीडियो कांफ्रेंसिंग में मैदानी अधिकारियों को प्रदेश में बढते भ्रष्टाचार के लिए आडे हाथों लिया था, उसी समय से ये संकेत मिल रहे थे कि प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी शुरू हो गई है. जैन का वीडियो वायरल होने और खबर लीक होने से भी सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को भारी क्षति हुई थी.
प्रशासनिक सर्जरी में सबसे महत्वपूर्ण मनीष सिंह की नयी पदस्थापना है. वे मप्र के छवि निर्माण का काम करने वाले जनसंपर्क विभाग का मुखिया बनाया गया है.एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अशोक बरनवाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बरनवाल ने संदीप यादव की जगह ली है, जिन्हें फॉरेस्ट का प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया गया है. यादव को एन आर आई विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का एडिशनल चार्ज भी दिया गया है. मप्र में पत्रकारों की आखरी पंचायत कराने वाले मनीष सिंह को एक बार फिर पब्लिक रिलेशन्स डिपार्टमेंट का कमिश्नर बनाया गया है और वे ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी का एडिशनल चार्ज भी संभालते रहेंगे.
पब्लिक रिलेशन्स कमिश्नर दीपक सक्सेना, जो चार महीने से इस पोस्ट पर थे. उन्होने इस संक्षिप्त कार्यकाल में ही विभाग का भट्टा बैठा दिया था. इस वजह से सरकार के साथ ही मुख्यमंत्री की छवि को भी गहरा धक्का लगा था. दीपक सक्सेना को हटाना मुख्यमंत्री की मजबूरी बन गई थी.सक्सेना अब ग्वालियर में एक्साइज कमिश्नर बनाये गया है. उन्होंने अभिजीत अग्रवाल की जगह ली है. जिन्हें स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है.
गौरतलब है कि अभिजीत अग्रवाल का तबाला नई आबकारी लागू होने से पहले हुआ है. इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार को अभिजीत की क्षमताओं पर भरोसा नहीं था. वैसे भी अग्रवाल मुख्यमंत्री का दिल नहीं जीत पाए थे.वे छग के एक भाजपा नेता के दामाद हैं.
अजय गुप्ता को किसान कल्याण और कृषि विकास के डायरेक्टर पद से ट्रांसफर करके ईस्ट रीजन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, जबलपुर का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है.एक और आई एएस उमाशंकर भार्गव आठ महीने बाद राजभवन से किसान कल्याण और कृषि विकास के डायरेक्टर का पद संभालने के लिए लौटे हैं. भिंड जिला पंचायत के सीईओ सुनील दुबे को गवर्नर का डिप्टी सेक्रेटरी बनाया गया है. जबकि हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट की डिप्टी सेक्रेटरी संघमित्रा गौतम को अलीराजपुर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है.
इस प्रशासनिक सर्जरी पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि एक्साइज डिपार्टमेंट में भ्रष्ट लोगों को बचाया जा रहा है. अभिजीत अग्रवाल ने एक्साइज डिपार्टमेंट में भ्रष्ट लोगों को पनाह दी. इंदौर में 75 करोड़ रुपये के नकली चालान, जबलपुर में जहरीली शराब से 15 से ज़्यादा मौतें. लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई!”
इस प्रशानिक सर्जरी को लेकर जितने मुंह हैं उतनी बातें है. अब इन सब पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी मनीष सिंह पर है. वे साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल करने में दक्ष माने जाते हैं. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हे शिवराज सिंह चौहान की तरह कितनी छूट देंगे ये अभी पता नहीं है.

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