नोएडा में विजिलेंस ने मांगी विभागीय जांच की फाइल !

नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शासन के निर्देश पर चल रही लखनऊ विजिलेंस की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्राधिकरण के अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ती नजर आ रही हैं। विजिलेंस ने हाल ही में दो अहम बिंदुओं पर नोएडा प्राधिकरण से जवाब तलब किया है, जिनका सीधा संबंध विभागीय जांच से है।
विजिलेंस ने प्राधिकरण से स्पष्ट जानकारी मांगी है
- सुपरटेक बिल्डिंग से जुड़े मामलों में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी?
- किन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर समाप्त की गई? संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित कॉपी भी मांगी गई है।
- इन सवालों ने प्राधिकरण के भीतर हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों बिंदुओं पर जवाब तैयार किया जा रहा है।
3 फरवरी को विजिलेंस टीम की दस्तक
इससे पहले 3 फरवरी को लखनऊ से विजिलेंस टीम नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंची थी। टीम ने नोडल अधिकारी से संपर्क कर ट्विन टावर ध्वस्तीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए थे। इनमें प्रकरण में तैयार कार्यवृत योजना का विस्तृत ब्योरा,ध्वस्तीकरण से संबंधित जारी आदेश पत्र जैसे दस्तावेज शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को ट्विन टावर गिराने के साथ-साथ इनके बनने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए थे। कोर्ट का आदेश आने के बाद प्रदेश सरकार ने इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। टावर बनने के मामले में एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में 26 अधिकारियों के अलावा सुपरटेक के चार निदेशकों और दो आर्किटेक्ट कंपनियों पर लापरवाही तय की थी। नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक की शिकायत पर लखनऊ विजिलेंस में 24 आरोपित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
11 अधिकारियों की विभागीय जांच
जांच रिपोर्ट के आधार पर नोएडा प्राधिकरण ने लखनऊ विजिलेंस संबंधित आरोपियों के खिलाफ 4 अक्टूबर 2021 को मामला दर्ज करा दिया था। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में 11 अधिकारियों और कर्मचारियों का भी दोषी माना था। इनकी विभागीय जांच कराने को कहा गया था। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने इनकी जांच कर 23 मार्च 2023 रिपोर्ट शासन में प्रस्तुत कर दी है।

