सेहत से खिलवाड़…फूड विभाग की टीम को नहीं मिलती मावा की खेप; लेकिन … टीम सुबह मोर बाजार पहुंची तो लोडिंग वाहनों से उतरता दिखा मावा

  • ग्वालियर दुग्ध संघ की लैब में बुधवार को जांच के लिए पहुंचे 4 सैंपल में से 2 अमानक पाए गए

शहर में फूड विभाग की टीम को पिछले कुछ दिन से रोजाना दो से तीन घंटे सर्चिंग करने के बाद भी संदिग्ध मावा दिखाई नहीं दे रहा है। न ही वह मावा उतरते समय मुख्य बाजार में जांच के लिए पहुंच पाती है। बल्कि टीम शाम काे पहुंचती है। दैनिक भास्कर टीम ने दो दिन तक जमीनी हकीकत जानी ताे प्रशासनिक दावे के उलट स्थिति मिली।

बुधवार और गुरुवार को मोर बाजार में सुबह 9:15 बजे से लेकर 11:30 के बीच भिंड और मुरैना से आई लोडिंग गाड़ियों से मावा की 180 से 210 डलिया यानी 9 से 10 हजार 500 किलो तक मावा उतारा गया। सिर्फ 5 से 10 मिनट में संबंधित दुकानदार अपने-अपने हिस्से का मावा लेकर वहां से चलते बने। यह कार्य इतना सुनियोजित है कि चंद मिनटों में ही भाव, सौदा और हिस्सा तय हो जाता है।

नहीं मिला मिलावटी मावा
हम नियमित रूप से रेलवे स्टेशन, पुरानी छावनी, ट्रांसपोर्ट नगर, मोर बाजार पर कई घंटों तक सर्चिंग कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हमें मिलावटी मावा नहीं मिला है।
-संजीव खेमरिया, एसडीएम एवं जिला अभिहित अधिकारी, ग्वालियर

खुलेआम हजारों किलो मावा बाजार में आ रहा, लेकिन जांच तक नहीं हो रही

मोर बाजार में हर दिन भिंड और मुरैना से 4 लोडिंग गाड़ियां मावा की डलियों से भरकर आ रही हैं। जिन को सुबह 9:30 से लेकर दोपहर 12 बजे तक खाली करा लिया जाता है। बुधवार को भास्कर रिपोर्टर के सामने ही बीच सड़क पर लोडिंग वाहन से मावा की डलिया तेजी से उतारी गईं।

10 मिनट में अलग-अलग ऑटो रिक्शा, दो पहिया वाहन और साइकिलों पर लादकर बुकिंग कराने वाले कारोबारी और उनके कारीगर मावा की डलियों को उठाकर चलते बने। भास्कर रिपोर्टर की मौजूदगी की खबर जैसे ही बाजार में फैली तो चौथी लोडिंग गाड़ी को बाजार में आने से रुकवा दिया गया। वहीं फूड सेफ्टी विभाग की टीम हर दिन की तरह बुधवार और गुरुवार को देर शाम मोर बाजार पहुंची लेकिन टीम को कोई भी लोडिंग गाड़ी आती नहीं दिखी और सिर्फ दुकानों से सैंपल लेने की औपचारिकता पूरी की।

लैब की जांच में 2 सैंपल में तेल की मिलावट

बानमोर स्थित ग्वालियर दुग्ध संघ की लैब में बुधवार को मावे के चार सैंपलों की जांच की गई। यह जांच लैब ने पांच मानकाें (स्टार्च, यूरिया, ग्लूकोज, बीआर वैल्यू और ऑर्गेनिक लेप्टिक टेस्ट) पर की। टेस्ट में बीआर वैल्यू पता की तो 4 में से 2 सैंपल में वनस्पति या इसी से मिलते जुलते तेल की मिलावट का अंदेशा अधिकारियों ने जताया।

4 में से 2 सैंपल की अम्लता 0.423 तक पाई गई। जाे तय मानक 0.35 से काफी अधिक पायी गई। इसे विशेषज्ञों ने मावा के अशुद्ध होने की पहचान बताया। ऑर्गेनिक लेप्टिक टेस्ट में विशेषज्ञों को मावा तकरीबन 6 से 8 दिन पुराना और दुर्गंध वाला बताया।

मावा की विस्तृत टेस्टिंग में सप्ताहभर लगते हैं

लैब के प्रभारी जीएस पचौरी ने बताया कि मोर बाजार के मावा के 4 सैंपल की जांच के लिए हमने पांच प्रकार के टेस्ट किए, जिसमें 2 सैंपल अमानक पाए गए। पचौरी बताते हैं कि भोपाल और इंदौर में एनएबीएल लैब मौजूद है जहां तकरीबन 15 प्रकार के टेस्ट खाद्य सामग्री पर किए जाते हैं।

अगर वह टेस्ट भी लगा दें तो इसमें और भी कई तरह की अमानक चीजें पाई जा सकती हैं, लेकिन एनएबीएल लैब में विस्तृत टेस्टिंग होने में तकरीबन 7 दिन का समय लगता है। इस बात को कारोबारी जानते हैं इसीलिए सैंपलिंग के वक्त अच्छा वाला मावा सैंपल लेने वाली टीम के सामने रख देते हैं और दुकानों में डलियों में भरकर मिलावटी मावा रखा जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *