डरना क्यों जरूरी है, क्या वाकई राहत पहुंचाती हैं ऐसी कहानियां ?

मनोविज्ञान : डरना क्यों जरूरी है, क्या वाकई राहत पहुंचाती हैं ऐसी कहानियां
ऐसे लोगों के बारे में क्या कहा जाए, जो दूसरों का पीछा करने वाले, उन पर हमला करने वाले और कभी-कभी उन्हें खाने वाले को देखना पसंद करते हैं? डरावनी कहानियों के प्रशंसक क्यों बढ़ते ही जा रहे हैं? डर कर क्या मजा आता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए मैंने तीन शोधकर्ताओं से संपर्क किया, जो डरावनी कहानियों के प्रशंसकों के मनोविज्ञान का अध्ययन करते हैं।
Why is it important to be afraid, do such stories really bring relief?
डरना जरूरी है…

मैं जब चौथी कक्षा में थी, तो मेरी एक दोस्त ह्विटनी सप्ताहांत में मेरे घर सोने के लिए आ रही थी। मेरी मां मुझे किराये पर फिल्म का कैसेट लेने के लिए वीडियो की दुकान पर ले गईं। मैंने ए नाइटमेयर ऑन एल्म स्ट्रीट फिल्म चुनी। मां ने फिल्म के नाम पर ध्यान नहीं दिया, अन्यथा वह मना कर देतीं। वह बेहद डरावनी फिल्म थी और मैंने उसका पूरा आनंद उठाया। जबकि मेरी दोस्त ह्विटनी हफ्तों तक ठीक से सो नहीं पाई। उस शाम ने डरावनी कहानियों के प्रति मेरे मन में जीवन भर के लिए प्यार को जगा दिया। मैं वह लड़की बन गई, जिसने अपने सभी दोस्तों को पार्टियों में डरावनी फिल्में देखने के लिए मजबूर किया।

स्टीफन किंग की इट मेरी पसंदीदा पुस्तकों में से एक है। मैं रोज सुबह जब टहलने के लिए जाती हूं, तो अपराधों की डरावनी कहानियों के पॉडकास्ट सुनती हूं। ऐसा करने वाली मैं कोई अकेली नहीं हूं। ऑनलाइन मूवी डाटाबेस द नंबर्स के अनुसार, वर्ष 2014 में वार्षिक बॉक्स ऑफिस कमाई में हॉरर फिल्मों की हिस्सेदारी 2.69 प्रतिशत थी, जो 2021 में बढ़कर 12.75 प्रतिशत हो गई। अब ऐसे लोगों के बारे में क्या कहा जाए, जो दूसरों का पीछा करने वाले, उन पर हमला करने वाले और कभी-कभी उन्हें खाने वाले को देखना पसंद करते हैं? इतने सारे लोग क्यों डरकर खुश होते हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए मैंने तीन शोधकर्ताओं से संपर्क किया, जो डरावनी कहानियों के प्रशंसकों के मनोविज्ञान का अध्ययन करते हैं। मैंने पाया कि ऐसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से लोग इन अनुभवों की तलाश करते हैं। मुझे यह भी महसूस हुआ कि नियंत्रित मात्रा में डर का आनंद लेना वास्तव में हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।

  डरावनी कहानियां और आनंद
जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता सिंथिया हॉफनर, जो मीडिया के मनोवैज्ञानिक प्रभावों का अध्ययन करती हैं, ने कहा कि डरावनी कहानियों के बारे में समझने वाली पहली बात यह है कि लोग इन्हें तभी पसंद करते हैं, जब वे वास्तव में सुरक्षित महसूस करते हैं। उनकी यह बात मुझे बिल्कुल ठीक लगी। सिर्फ एक बार मुझे हॉरर मूवी पसंद नहीं आई, वह तब था, जब मैं रात में घर पर अकेली थी और चाइल्ड्स प्ले देख रही थी। मुझे लगा कि मेरे लिविंग रूम से आवाजें आ रही हैं।

पुरुष, महिलाएं और डरावनी कहानियां
डॉ. हॉफनर के अनुसार, ‘पुरुष डरावनी चीजों का महिलाओं की तुलना में अधिक आनंद लेते हैं, खासकर जब इसमें खून-खराबा शामिल हो। ऐसा इस सांस्कृतिक अपेक्षा के कारण हो सकता है कि पुरुषों को डर से निपटने में सक्षम होना चाहिए।’ हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि महिलाएं सच्चे अपराध की ओर अधिक आकर्षित होती हैं।

 डर पसंद करने वाले क्रूर होते हैं?
हम डरावनी कहानियों को पसंद करने वाले लोगों के व्यक्तित्व के बारे में ज्यादा नहीं जानते, लेकिन इसके कुछ सिद्धांत हैं। प्रकाशित शोध के विश्लेषण में, डॉ. हॉफनर और उनके सहयोगी केनेथ जे. लेविन ने बताया कि जिन लोगों में सहानुभूति का स्तर कम है, वे दूसरों की तुलना में डरावनी चीजों का आनंद लेने की अधिक संभावना रखते हैं, क्योंकि वे पीड़ितों के लिए उतनी चिंता नहीं करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, लेकिन ‘इसका मतलब यह नहीं है कि हर कोई जो डरावनी फिल्मों का आनंद लेता है, उसमें सहानुभूति कम है।’ एक हालिया अध्ययन एक अलग निष्कर्ष पर पहुंचा है, जिसमें बताया गया है कि डरावनी फिल्मों के प्रशंसकों में उतनी ही सहानुभूति और करुणा है, जितनी गैर-प्रशंसकों में होती है।

 किसे पसंद आता है डर
डॉ. हॉफनर ने बताया कि शोध से पता चलता है कि डरावनी फिल्मों के प्रशंसक वे लोग भी होते हैं, जो बौद्धिक उत्तेजना और कल्पनाशील गतिविधियों का आनंद लेते हैं। इनमें से कई सनसनी चाहने वाले होते हैं, जो रोमांच और नए अनुभवों को पसंद करते हैं, क्योंकि जब वे डरते हैं, तो उनमें एड्रेनालाईन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे उन्हें आनंद की अनुभूति होती है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि जो लोग नर्वस महसूस कर रहे हैं या चिंता से ग्रस्त हैं, वे भी हॉरर फिल्मों की ओर आकर्षित होते हैं। शायद डरावनी फिल्में उनकी चिंताओं को एक नया केंद्र बिंदु प्रदान करती हैं। डेनमार्क के आरहूस विश्वविद्यालय में मनोरंजनात्मक भय के शोधकर्ता कोल्टन स्क्रिवनर ने बताया कि जब आप कोई डरावनी फिल्म देखते हैं, तो आपकी चिंता का विषय बदल जाता है। कई मामलों में तो यह भी दिखा है कि जब फिल्म खत्म होती है, तो चिंता भी कम हो जाती है।
 
डर हमें सिखाता है
जब डॉ. स्क्रिवनर और उनके सहयोगियों ने महामारी की शुरुआत में 2020 के वसंत में एक अध्ययन के लिए लोगों का साक्षात्कार लिया, तो उन्होंने पाया कि डरावनी कहानियों के प्रशंसकों ने गैर-प्रशंसकों की तुलना में महामारी से संबंधित मनोवैज्ञानिक संकट का कम अनुभव किया। इसकी क्या वजह हो सकती है? डॉ. स्क्रिवनर के 2020 के अध्ययन में, जिन लोगों ने बड़े पैमाने पर अराजकता, जैसे कि एलियन आक्रमण और सर्वनाश के चित्रण वाली डरावनी फिल्में देखीं, उन्होंने बताया कि वे उन लोगों की तुलना में महामारी के लिए मानसिक रूप से अधिक तैयार महसूस करते हैं, जिन्होंने ऐसी फिल्में नहीं देखीं। खुद को शिक्षित करने की इच्छा भी सच्चे अपराध के प्रति प्रेम की वजह हो सकती है। किसी सीरियल किलर के बारे में पॉडकास्ट सुनने के बाद इस बात का ज्ञान होता है कि लोग ऐसे अत्याचार क्यों करते हैं, या उनकी चाल-ढाल कैसी होती है। शोध से पता चलता है कि सच्चे अपराध की अधिकांश प्रशंसक महिलाएं होती हैं, शायद इसलिए कि उन्हें पुरुषों की तुलना में अपराध का शिकार होने का डर ज्यादा होता है और वे इससे जो कुछ भी सीखती हैं, उसे खुद को बचाने का एक तरीका मानती हैं।

 खुद को समझने में मिलती है मदद
विशेषज्ञों ने कहा कि लोग खुद के बारे में जानकारी पाने के लिए भी डरावनी फिल्में देखते हैं। 2022 के एक अध्ययन में डॉ. स्क्रिवनर, डॉ. एंडरसन और उनके सहयोगियों ने डरावनी फिल्मों के प्रशंसकों से पूछा कि उन्हें डरावने अनुभव क्यों पसंद हैं। इनमें भुतहा घर में जाने वाले लोग भी शामिल थे। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें डर के प्रति अपनी प्रतिक्रियाओं के बारे में जानने में मजा आया। लोगों के डरावनी चीजों से जुड़ने के सभी कारणों को जानने के बाद मैं अपने तर्क के बारे में सोचने से खुद को रोक नहीं पाई। मैं सनसनी खोजने वाली नहीं हूं, लेकिन मैं जितना संभव हो सके, उनके बारे में सीखकर संभावित खतरों से निपटती हूं। शायद हॉरर फिल्में मुझे अपनी भावनाओं पर अधिक नियंत्रण महसूस करने और उन भयावह स्थितियों को बेहतर ढंग से संभालने में मदद करती हैं, जिनका मैं कभी सामना कर सकती हूं। मुझे हॉरर फिल्में पसंद आने की एक और वजह भी है: वे फिल्में मुझे याद दिलाती हैं कि मैं कितनी भाग्यशाली हूं कि कभी किसी मनोरोगी ने चाकू लेकर मेरा पीछा नहीं किया।

शोध बताते हैं कि डरावनी कहानियां जिंदगी के कई पाठ सिखाती हैं। आप भले ही पढ़ाई, नौकरी या आर्थिक कारणों से चिंताग्रस्त हों, लेकिन डरावनी कहानियां कुछ देर के लिए आपकी चिंताओं का विषय बदल कर राहत पहुंचाती हैं।

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