तहसीलदार को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली जमानत ?

तहसीलदार को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली जमानत
कोर्ट ने जमानत के लिए कहा रेगुलर कोर्ट में जाएं, अब तहसीलदार पर गिरफ्तारी का संकट
  • तहसीलदार को अग्रिम जमानत में सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। - Dainik Bhaskar
तहसीलदार को अग्रिम जमानत में सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है…

शादी का झांसा देकर 17 साल तक महिला से शारीरिक संबंध बनाने के मामले में आरोपी तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान को अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। 28 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने तहसीलदार को अग्रिम जमानत के लिए रेगुलर कोर्ट में ही उपस्थित होने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद अब आरोपी तहसीलदार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। साथ ही पुलिस पर उसे गिरफ्तार करने के लिए दबाव बढ़ गया है। दुष्कर्म पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही है। जिसका फायदा उठाकर भिंड में आरोपी उनके परिजन को परेशान करवा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिला अग्रिम जमानत

तहसीलदार पर एक 34 वर्षीय महिला ने 17 साल तक पत्नी बनाकर रखने और बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। इस मामले में 15 जनवरी को तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान पर महिला थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। दुष्कर्म का मामला दर्ज हुए 46 दिन बीत गए हैं और तहसीलदार पर 5 हजार रुपए का इनाम तक घोषित है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। फरारी के दौरान तहसीलदार लगातार अग्रिम जमानत के आवेदन लगा रहा है।

सबसे पहले तहसीलदार ने जिला कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगाया था जहां से उसका जमानत आवेदन खारिज कर दिया गया था। इसके बाद तहसीलदार चौहान ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, वहां पीड़िता के वकील ने आरोपी तहसीलदार का आपराधिक रिकॉर्ड पेश किया। जिसके बाद वहां से भी उसकी अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी गई। अब तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया था। जिस पर 28 फरवरी को सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आवेदन की यहां जरूरत नहीं है। जमानत के लिए आप रेगुलर कोर्ट में ही उपस्थित होकर आवेदन करें।

तहसीलदार पर 16 आपराधिक मामले हो चुके हैं दर्ज

तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान के एमपी के भिंड व यूपी के इटावा में दर्ज 16 आपराधिक मामलों से संबंधित डिटेल पुलिस पहले ही हाईकोर्ट में पेश कर चुकी है। रिकॉर्ड पेश होने के बाद जिला कोर्ट और हाईकोर्ट ने तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। जिसके बाद तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पर वहां से भी उसे राहत नहीं मिली है। तहसीलदार पर साल 2000 से 2011 तक उसके ऊपर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती जैसे 16 गंभीर अपराध दर्ज होना बताए गए हैं। जिसका रिकॉर्ड पीड़िता के वकील और पुलिस कोर्ट में बार-बार पेश कर चुकी है।

पीड़िता बोली-पुलिस जल्द आरोपी को गिरफ्तार करे

इस मामले में पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि पुलिस तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान को गिरफ्तार नहीं कर रही है। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के अधिकारी उसे बचा रहे हैं। जिस कारण पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार न कर बचने का मौका दिया जा रहा है। पीड़ित महिला ने आरोपी से अपनी जान को खतरा बताया था।

ऐसे समझिए पूरा मामला

शहर के थाटीपुर एरिया में रहने वाली एक 34 वर्षीय महिला ने तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान पर गंभीर आरोप लगाते हुए रेप का मामला दर्ज कराया है। पीड़िता ने बताया है कि वह भिंड की रहने वाली है। साल 2005-06 में उसकी शादी हुई थी। दो साल बाद उसके पति का देहांत हो गया था। साल 2008 में शत्रुघन सिंह चौहान का उसके जेठ के पास आना जाना था। इसके बाद उन्होंने मेरे जेठ को धंधे में फायदा पहुंचाकर जबरन मुझे हासिल किया। मुझसे शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने लगे। 10 अगस्त 2008 को भिंड मानगढ़ महिला के घर आकर रात 10.30 बजे उससे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। इसी साल वह नायब तहसीलदार बन गए। इसके बाद वह लगातार मेरा शारीरिक शोषण करते रहे।

साल 2010 में रतनगढ़ माता मंदिर पर मांग में सिंदूर भरकर मुझसे शादी की नौटंकी की थी। इसके बाद जहां-जहां पोस्टिंग रही वहां-वहां रखा और संबंध बनाए। मेरा खर्चा भी वहीं उठाए थे। महिला का आरोप है कि इसके बाद साल 2014 में उनसे एक बेटे का जन्म हुआ है। जिसका डीएनए टेस्ट कभी भी करा सकते हैं। इसके बाद ग्वालियर के महिला थाने में 15 जनवरी की रात तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान के खिलाफ शादी का झांसा देकर रेप की FIR दर्ज हुई थी।

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