मध्य प्रदेश

23 साल पुराने 1.50 करोड़ घोटाले में डॉ. वीरांग, डॉ. वाचस्पति, डॉ. उषा सहित 7 के खिलाफ चालान

23 साल पुराने 1.50 करोड़ घोटाले में डॉ. वीरांग, डॉ. वाचस्पति, डॉ. उषा सहित 7 के खिलाफ चालान
ग्वालियर

स्वास्थ्य विभाग में उपकरण 1.50 करोड़ रुपए के 23 साल पुराने खरीद घोटाले में लोकायुक्त ने तत्कालीन संचालक डॉ. अशोक बीरांग सहित 7 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया। यह चालान 6 साल बाद दूसरी बार पेश किया गया है। लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ यह काफी चर्चित व पुराना मामला था। डॉ. बीरांग के साथ ही डॉ. वाचस्पति शर्मा, डॉ. उषा चिंचौलीकर के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में दो आरोपियों की मौत हो चुकी है और सभी डॉक्टर डेढ़ दशक पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग में उपकरण खरीद घोटाले में 23 वर्ष पूर्व छद्म नाम से शिकायत की गई थी लेकिन शिकायत जांच में सच साबित हुई थी।

डॉ. उषा ने 2019 में कोर्ट से कराए थे आदेश, फिर मंजूरी मिलने लगे 6 साल

स्वास्थ्य विभाग में उपकरण खरीदी के मामले में अभियोजन की पहली मंजूरी 11 साल बाद 2019 में मिली थी। लोकायुक्त की लोक अभियोजक राखी सिंह ने बताया कि 2019 में भी इस मामले में चालान पेश किया गया था। तब डॉ. उषा चिंचोलीकर न्यायालय चलीं गई थी और न्यायालय ने धारा 120 बी में भी अभियोजन स्वीकृति भी विभाग से लेने के लिए चालान को वापस किया था। इस पर विभाग से पुन: मंजूरी मांगी गई और मंजूरी मिलने व पुन: मामले में चालान पेश किया गया।

यह था मामला: 19 जून 2002 को लोकायुक्त के भोपाल मुख्यालय को आवेदक अरुण अग्रवाल निवासी सिंधी कालोनी के नाम से स्वास्थ्य विभाग में उपकरण खरीद में घोटाले की शिकायत की गई थी। शिकायत में ग्वालियर सम्भाग के क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य विभाग ने इसी वर्ष जनवरी से मार्च तक के समय में 1.50 करोड़ के शल्य उपकरणों की खरीद नियम को दरकिनार कर बिना निविदा के किए जाने का आरोप था। यह खरीदी एक ही संस्था जय किट उद्योग, भोपाल व आईडियल सर्जीकल उसकी सहयोगी संस्थाओं से दस गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं थीं।

शिकायत में मामले की जांच कर भ्रष्टाचार के आरोपियों से शासन के धन की वसूली की भी अपील की गई थी। इस शिकायत को लेकर जब शिकायतकर्ता का ढूंढा गया तो यह नाम छदम निकला लेकिन शिकायत जांच में सही निकली। लोकायुक्त मुख्यालय में इस शिकायत को संज्ञान में लेकर 5 फरवरी 2007 को प्रारम्भिक जांच क्रमांक पंजीकृत कर जांच ग्वालियर लोकायुक्त से कराई गई। इस मामले में 2008 सभी सात आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर विभाग से अभियोजन स्वीकृति के लिए 17 साल से लंबित था।

यह है सात आरोपी: 1.50 करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में डॉ. अशोक बीरांग, डॉ. वाचस्पति शर्मा, डॉ. उषा चिंचौलीकर, रामशंकर सक्सैना, अशोक गुप्ता भोपाल, दिनेश अग्रवाल, बाल किशन के खिलाफ धारा 13 (1) डी, 13(2) पीसीएक्ट 1988. सहपठित धारा 120 बी आईपीसी के तहत चालान पेश किया गया है। इनमें से उपयंत्री रमाशंकर शर्मा व कंपनी प्रोपराइटर बालकिशन की मौत हो चुकी है।

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