बिहार

विधायक दल का नेता चुने जाने की Inside Story

पहले ना फिर लालू के समझाने पर तेजस्वी की हां! विधायक दल का नेता चुने जाने की Inside Story

आरजेडी की अहम बैठक में तेजस्वी यादव ने चुनाव हार की जिम्मेदारी ली और विधायक दल का नेता बनने से इनकार किया. फिर लालू यादव के हस्तक्षेप और मान-मनौव्वल के बाद तेजस्वी नेतृत्व संभालने को राजी हुए. उन्होंने संजय यादव व अपनी टीम का बचाव किया.

पहले ना फिर लालू के समझाने पर तेजस्वी की हां! विधायक दल का नेता चुने जाने की Inside Story

लालू यादव और तेजस्वी यादव. (फाइल फोटो)

विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद सोमवार को आरजेडी की बड़ी बैठक हुई. इसमें तेजस्वी यादव ने विधायक दल का नेता बनने से इनकार कर दिया. हालांकि, लालू यादव के मान-मनौव्वल के बाद तेजस्वी माने. इस दौरान तेजस्वी ने संजय यादव और अपनी टीम के अन्य सदस्यों का बचाव भी किया. ये बैठक तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर हुई. 

आइए जानते हैं आरजेडी की बैठक की इनसाइड स्टोरी.

विधायक दल की बैठक के दौरान तेजस्वी यादव ने चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए दल का नेता नहीं बनने का प्रस्ताव रखा. तेजस्वी ने नेता प्रतिपक्ष का पद भी छोड़ने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि वो पार्टी में सिर्फ एक विधायक की हैसियत से काम करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने आरजेडी को बनाया है. वो (तेजस्वी) पिता के आदेश पर पार्टी का काम संभाल रहे हैं.

तेजस्वी ने नाम लिया तो तुरंत खड़े हो गए लालूजैसे ही तेजस्वी यादव ने लालू यादव का नाम लिया, लालू तुरंत खड़े हो गए. मानो, सब कुछ स्क्रिप्टेड हो. लालू ने कहा कि पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते मैं ये चाहता हूं कि यह जिम्मेदारी तेजस्वी यादव को ही दी जाए. उन्होंने विधायकों से भी उनकी राय मांगी. फिर क्या, सभी विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता भी लालू का समर्थन करने लगे और तब तय हुआ कि तेजस्वी ही नेतृत्व करेंगे.

तेजस्वी ने संजय और टीम का भी बचाव कियालालू यादव के प्रस्ताव और विधायकों की मुहर के बाद तेजस्वी मान गए. इस बैठक में तेजस्वी ने संजय यादव और अपनी टीम का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि संजय और उनकी टीम ने चुनाव के दौरान बहुत अच्छा काम किया. उनकी टीम की मेहनत को मैं जानता हूं. मैंने सबके काम को देखा है. किसी के कुछ बोलने से और संजय पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होता है.

तेजस्वी ने जगदानंद सिंह का उदाहरण देते हुए कहा, जब उन्हें अध्यक्ष बनाया गया तब भी उनका विरोध किया गया. गौरतलब है कि तेजप्रताप यादव ने जगदानंद सिंह का विरोध किया था. तेज प्रताप उन्हें हिटलर कहकर बुलाते थे.

 

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