भोपाल की SBI ब्रांच से हुई थी 1266.63 करोड़ की धोखाधड़ी, ED ने की कार्रवाई

भोपाल के मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड (एओपीएल) की विदेशों में मौजूद 51.70 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को ईडी ने कुर्क कर लिया है।
कुर्क की गई दुबई की यह सभी प्रॉपर्टी भारतीय स्टेट बैंक के साथ 1266.63 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में कार्यवाही के दायरे में आई है। इस कंपनी का दफ्तर राजधानी के मानसरोवर काॅम्प्लेक्स में है।
बेटी को उपहार में दी थी जब्त हुई संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने पीएमएलए 2002 के प्रावधानों अंतर्गत 17 नवंबर को दुबई (यूएई) स्थित नौ आलीशान विदेशी अपार्टमेंट वाली अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
कुर्क की गई संपत्तियां अपार्टमेंट और व्यावसायिक स्थलों के रूप में हैं। जिनकी कीमत 51.70 करोड़ रुपए है।
यह कुर्की मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड (एओपीएल), उसके निदेशकों, गारंटरों और संबंधित व्यक्तियों की प्रॉपर्टी की हुई है, जिनमें इसके मुख्य निदेशक, लाभार्थी स्वामी श्रीकांत भासी भी शामिल हैं।
इनके खिलाफ यह कार्यवाही बैंक धोखाधड़ी के मामले में की गई है। जिससे भारतीय स्टेट बैंक को 1266.63 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईडी द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक कुर्क की गई संपत्तियां श्रीकांत भासी की हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी बेटी को उपहार में दिया था।

ये प्रॉपर्टी हुई हैं कुर्क
ईडी जो प्रॉपर्टी कुर्क की गई हैं उसमें सेंचुरियन रेजिडेंस – दुबई इन्वेस्टमेंट पार्क सेकंड, दुबई सिलिकॉन ओएसिस, लीवा हाइट्स (अल थान्याह फिफ्थ), बिजनेस बे और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर रेजिडेंस में स्थित विदेशी संपत्तियां है जो बैंक धोखाधड़ी कर अपराध की आय (पीओसी) के रूप में अर्जित की गई हैं। इनके कामों से एसबीआई, शाहपुरा शाखा भोपाल को 1266.63 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
ईडी की जांच से पता चला है कि एओपीएल और उसकी संबद्ध संस्थाओं पर रणनीतिक नियंत्रण रखने वाले श्रीकांत भासी ने दुबई में विदेशी संपत्तियां हासिल की थीं। बाद में इन संपत्तियों को जान-बूझकर 2022-2023 में कराई गई रजिस्ट्री में उनकी बेटी को उपहार में दिया है।
यह संपत्तियां एओपीएल और उसके समूह संस्थाओं द्वारा अवैध व्यापारिक लेनदेन, बैंक फंडों के डायवर्जन, दस्तावेजों के निर्माण, सर्कुलर ट्रेडिंग और अवैध आय के स्तरीकरण के माध्यम से हासिल की गई थीं।

12 विदेशी एफएलसी को ट्रांसफर किए फंड
जांच के दौरान पता चला कि एओपीएल द्वारा अनिवार्य मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने और एलसी रोलओवर के समय धनराशि नहीं डाल पाने के बाद अप्रैल-मई 2018 के बीच 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1266.63 करोड़ रुपए) की राशि के 12 विदेशी साख पत्र (एफएलसी) एसबीआई को हस्तांतरित किए गए थे।
सावधि जमा मार्जिन में कमी के कारण बैंक को विदेशी सप्लायरों को भुगतान करने के लिए बाध्य होना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को भारी नुकसान हुआ। ये हस्तांतरित साख पत्र, पीओसी का एक प्रमुख घटक हैं, जिन्हें बाद में संबंधित संस्थाओं के माध्यम से लेवलाइज और दुरुस्त किया गया और विदेशी संपत्ति अर्जित करने के लिए उपयोग किया गया।
ईडी की जांच में घरेलू और विदेशी संस्थाओं के एक नेटवर्क का भी पता चला है, जिसका उपयोग भारत और विदेशों में लेवलाइजेशन, मनी ट्रांजैक्शन और संपत्ति अर्जित करने के लिए किया जाता था।

